उदयपुर | आनंद मार्ग प्रचारक संघ, उदयपुर भुक्ति के टेकरी-मादरी रोड स्थित जागृति परिसर में दिनांक 1 अक्टूबर 2026 को 56वें कीर्तन दिवस के उपलक्ष्य में प्रारम्भ हुए 'बाबा नाम केवलम' अष्टाक्षरी सिद्ध महामंत्र कीर्तन का समापन शनिवार दिनांक 31 अक्टूबर 2026 को हुआ. भुक्ति प्रधान डॉ. एस. के. वर्मा ने बताया की इस अवधि में एक प्रहर अर्थात तीन घंटे की अवधि के 12 अखंड कीर्तन, विजयोत्सव पर एक घंटे का आवर्त कीर्तन तथा अन्य दिवसों पर प्रतिदिन एक घंटे की अवधि का कीर्तन आयोजित किया गया ।
पूरे अक्टूबर माह में उदयपुर जागृति में कुल 56 घंटे कीर्तन का गायन हुआ।
उल्लेखनीय है की इस दौरान कीर्तन की नवीन धुनों का गायन हुआ, साथ ही धर्ममहासम्मेलन में हुई विभिन्न कीर्तन धुनों का समावेश भी किया गया. डॉ. वर्मा ने कहा की कीर्तन मानसिक जगत में परम पुरुष की सेवा का सर्वोत्तम उपादान है।
जनसाधारण के आध्यात्मिक उत्थान के लिए कीर्तन मंत्र 'हरे राम हरे कृष्ण' का प्रतिपादन श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा किया गया था जिसका प्रभाव 500 वर्षों तक बताया गया है ।
तत्पश्चात आनंद मार्ग के प्रवर्तक श्री श्री आनंदमूर्ति जी द्वारा सर्वप्रथम 8 अक्टूबर 1970 को अमझरिया, जिला लातेहार, राज्य झारखण्ड में अष्टाक्षरी महामंत्र 'बाबा नाम केवलम', दिया गया जो वर्तमान समय में आधिभौतिक, आधिदैविक तथा आध्यात्मिक, सभी क्लेशों से निवृत्ति का सबसे सरल उपाय है ।
इस अष्टाक्षरी सिद्ध कीर्तन महामन्त्र की विशेषता यह है की चाहे कोई इसे श्रद्धा से सुने या अवहेलना से सुने, तब भी वह उसके लिए लाभप्रद ही होगा ।
कीर्तन के द्वारा समस्त चर और अचर जगत का सर्वात्मक कल्याण संभव है। अध्यात्म जगत में कीर्तन का विशेष महत्व है, इसीलिए कहा गया है "कीर्तनीय सदा हरि" ।
कीर्तन के ध्वनि तन्मात्रों के माध्यम से धनात्मक माइक्रोवाइटा आकर्षित होते हैं और कीर्तन स्थल को भावना तीर्थ में रूपांतरित कर देते हैं और भक्त को भावसमाधि में ले जाते हैं ।
अतः कीर्तन प्रत्येक मनुष्य की आध्यात्मिक यात्रा में तीव्र गति लाकर परम लक्ष्य की और बढ़ने का स्वर्णिम अवसर प्रदान करता है ।
