उदयपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्थापना दिवस पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ उदयपुर महानगर की ओर से मंगलवार को राजस्थान कृषि महाविद्यालय (आरसीए) खेल मैदान, सूरजपोल में विजयादशमी उत्सव मनाया गया व पथ संचलन निकाला गया ।
मुख्य अतिथि होटल एवं मार्बल व्यवसायी ओ.पी. अग्रवाल व विभाग संघचालक हेमेन्द्र श्रीमाली एवं उदयपुर महानगर संघचालक गोविंद अग्रवाल द्वारा शस्त्र पूजन किया गया ।
स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ चित्तोड़ प्रान्त के प्रान्त प्रचारक मूरलीधर ने कहा कि वर्ष 1925 में विजयादशमी के दिन डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने जिस उद्देश्य और विचार को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की थी, उसका स्वरूप आज 101 वर्ष बाद समाज में दिखाई दे रहा है।
संघ की यह यात्रा कभी आसान नहीं रही। अनेक कठिन परिस्थितियों, विरोध, षड्यंत्र और आरोपों के बावजूद स्वयंसेवक अपने ध्येय की दिशा में निरंतर आगे बढ़ते रहे।
संघ के विरुद्ध समय-समय पर लगाए गए आरोप मूरलीधर ने संघ के विरुद्ध समय-समय पर लगाए गए आरोपों का उल्लेख करते हुए कहा कि संघ को दलित विरोधी, मुस्लिम विरोधी और यहाँ तक कि आतंकवादी संगठन भी कहा गया।
आतंकवादी संगठन कहे जाने के आरोप पर उन्होंने प्रश्न उठाया कि “क्या कभी किसी आतंकवादी संगठन को खुलेआम पथ संचलन करते देखा है, जिसकी सुरक्षा व्यवस्था में पुलिस लगी हो?
क्या कोई आतंकवादी संगठन इस प्रकार खुले रूप से अपना कार्य करता है?” उन्होंने एक राजनीतिक नेता द्वारा संघ को एक इंच भूमि भी नहीं देने संबंधी कथन का उल्लेख करते हुए कहा कि इन सबके बावजूद संघ ने अपने उद्देश्य और कार्यपद्धति को नहीं छोड़ा तथा समाज संगठन के अपने ध्येय की दिशा में निरंतर आगे बढ़ता रहा।
किसी की प्रतिक्रिया या विरोध में नहीं हुई संघ की स्थापना मूरलीधर ने कहा कि वर्ष 1925 में संघ की स्थापना किसी घटना की प्रतिक्रिया अथवा किसी व्यक्ति या संगठन के विरोध के लिए नहीं की गई थी।
उन्होंने तत्कालीन सामाजिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि हिंदू समाज अपने स्वत्व और सामूहिक पहचान से दूर होता जा रहा था। समाज अनेक जातियों और वर्गों में विभाजित था।
व्यक्ति अपनी व्यापक सामाजिक पहचान के स्थान पर ब्राह्मण, राजपूत, वैश्य, जैन, सिख, गुर्जर, मीणा, रेगर, मोची आदि अलग-अलग पहचानों में बँटता जा रहा था।
उन्होंने इस सामाजिक विभाजन को राष्ट्रीय एकता के लिए चिंताजनक बताते हुए अखंड भारत की ऐतिहासिक अवधारणा का उल्लेख किया।
अपने संबोधन में उन्होंने भारत के पूर्ववर्ती विस्तार को लगभग 84 लाख वर्ग किलोमीटर तथा वर्तमान भारत के क्षेत्रफल को लगभग 33 लाख वर्ग किलोमीटर बताते हुए विभिन्न ऐतिहासिक विभाजनों की चर्चा की।
उन्होंने कहा कि संघ का उद्देश्य हिंदू समाज को संगठित, सशक्त एवं एकात्म बनाना है। वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना इसी व्यापक चिंतन का आधार है।
समाज परिवर्तन के लिए स्वयं आदर्श प्रस्तुत करें स्वयंसेवक मूरलीधर ने कहा कि संघ अपनी स्थापना के सौ वर्ष पूर्ण कर 101वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है।
ऐसे समय में स्वयंसेवकों की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि समाज परिवर्तन केवल भाषणों से संभव नहीं है।
स्वयंसेवकों को पहले स्वयं उन आदर्शों का पालन करना होगा, जिन्हें वे समाज में स्थापित करना चाहते हैं। उन्होंने पंच परिवर्तन के अंतर्गत सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी एवं नागरिक कर्तव्य के पालन पर विशेष जोर दिया।
उन्होंने कहा कि खानपान और पहनावे में स्वदेशी वस्तुओं को प्राथमिकता देने, हिंदी में हस्ताक्षर करने तथा जन्मदिन भारतीय पद्धति से मनाने जैसे छोटे-छोटे परिवर्तन दैनिक जीवन का हिस्सा बनने चाहिए।
पर्यावरण संरक्षण, जनसंख्या संतुलन एवं नशामुक्ति जैसे विषयों पर भी समाज को जागरूक करने की आवश्यकता बताई।
इस संदर्भ में उन्होंने संत शिरोमणि रविदास जी की 650वीं जयंती का भी संक्षिप्त उल्लेख करते हुए उनके सामाजिक समरसता एवं समानता के संदेश की ओर ध्यान आकर्षित किया।
महापुरुषों को जाति और बिरादरी के आधार पर ना बांटे उन्होंने गृह संपर्क अभियान का उल्लेख करते हुए बताया कि इसके माध्यम से करोड़ों परिवारों तक पहुंचने का प्रयास किया गया है।
हिंदू सम्मेलनों में बड़ी संख्या में लोगों की सहभागिता और सामूहिक स्नेह भोज का उल्लेख करते हुए उन्होंने सामाजिक समरसता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि समाज के महापुरुषों को जाति और बिरादरी के आधार पर बांटकर नहीं देखना चाहिए, क्योंकि उनका योगदान पूरे समाज का है।
समाज में आपसी सद्भाव और एकजुटता का भाव मजबूत होना चाहिए। सोशल मीडिया की अफवाहों से सावधान रहने का आह्वान मूरलीधर ने सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाली अफवाहों एवं भ्रामक सूचनाओं से सावधान रहने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि किसी भी जानकारी की सत्यता की जाँच किए बिना उस पर विश्वास करना अथवा उसे आगे प्रसारित करना उचित नहीं है।
नियमित शाखा, राष्ट्र चिंतन और समयदान पर विशेष जो र उन्होंने स्वयंसेवकों के प्रतिदिन शाखा आने पर विशेष जोर देते हुए कहा कि नियमित शाखा से राष्ट्र चिंतन, अनुशासन, संगठन और समाज के प्रति उत्तरदायित्व का भाव निरंतर बना रहता है।
उन्होंने कहा कि आज भारत करवट ले रहा है। देश आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है, लेकिन राष्ट्र निर्माण एवं समाज संगठन के कार्यों में समाज की सहभागिता अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुँच पाई है।
उन्होंने स्वयंसेवकों और समाजजनों से अपनी क्षमता के अनुसार समयदान करने, व्यक्तिगत संकल्प लेने और समाज के कार्यों में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।
संघ शतकम् रचना में बैठे स्वयंसेवक, मातृशक्ति की भी रही उपस्थिति राजस्थान कृषि महाविद्यालय के खेल मैदान में स्वयंसेवकों को संघ संघ शतकम् रचना के अनुसार बैठाया गया था।
मैदान के दोनों ओर समाजजनों के बैठने के लिए कुर्सियों की व्यवस्था की गई थी। कार्यक्रम में माताओं एवं बहनों की भी उपस्थिति रही।
स्वयंसेवक कदम से कदम मिलाकर अनुशासित पंक्तियों में आगे बढे हाथों में दंड लिए स्वयंसेवक कदम से कदम मिलाकर अनुशासित पंक्तियों में आगे बढ़ रहे थे।
प्रत्येक वाहिनी के अग्रभाग में वाहिनी प्रमुख भगवा ध्वज लेकर चल रहे थे तथा उनके पीछे संबंधित वाहिनी के स्वयंसेवक निर्धारित क्रम में चल रहे थे।
घोष दल में आनक, पणव, शंख, वंशी, झल्लरी एवं त्रिभुज सहित विभिन्न वाद्ययंत्रों पर घोष वादक अलग-अलग रचनाओं का वादन करते हुए आगे बढ़ रहे थे। घोष प्रमुख हाथ में घोषदंड लेकर संकेतों के माध्यम से घोष दल का संचालन कर रहे थे।
घोष की स्वर लहरियों और स्वयंसेवकों की एकरूप कदमताल ने संचलन को विशेष आकर्षण प्रदान किया।
समाज जनों ने पुष्प वर्षा कर स्वागत किया निर्धारित मार्ग के अनुसार पथ संचलन आरसीए मैदान से प्रारंभ होकर सूरजपोल, बैंक तिराहा-बापू बाजार, दिल्ली दरवाजा, हाथीपोल, चेतक चौराहा, कोर्ट चौराहा, शास्त्री चौराहा, समापति भवन एवं शक्ति नगर सनातन मंदिर होते हुए श्रमजीवी महाविद्यालय पहुँचा।
पथ संचलन मार्ग में जगह जगह समाज जनों व सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। संत रविदास जी की 650वीं जयंती पर प्रदर्शनी कार्यक्रम स्थल पर संत रविदास जी की 650वीं जयंती के अवसर पर विशेष प्रदर्शनी भी लगाई गई।
प्रदर्शनी के माध्यम से संत रविदास जी के जीवन, विचारों, सामाजिक समरसता के संदेश तथा समाज सुधार में उनके योगदान को प्रस्तुत किया गया। इसके माध्यम से उपस्थित लोगों को उनके विचारों से परिचित होने का अवसर मिला।