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भारतीय समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले

मुख्य बिंदु
  • उदयपुर | जनमत मंच के तत्वाधान में भारतीय समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले की जयंती पर व्याख्यान माला का आयोजन किया गया।
  • श्रीनिवास ने बताया कि 1827 ई.
  • पुणे के माली परिवार में हुआ ज्योतिबा फुले महाराष्ट के एक महान भारतीय समाज सुधारक, विचारक और लेखक रहे ,जिन्होंने नारी शिक्षा,दलित उत्थान और जाति-आधारित भेदभाव के खिलाफ लड़ाई लड़ी।
  • उन्होंने पत्नी सावित्री बाई फुले के साथ मिलकर 1848 ई.
  • पुणे में लड़कियों के लिए भारत का पहला स्वदेशी स्कूल खोला।
  • पत्नी सावित्री बाई जो बाद में स्‍वयं एक प्रसिद्ध समाजसेवीका बनी।
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भारतीय समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले

उदयपुर | जनमत मंच के तत्वाधान में भारतीय समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले की जयंती पर व्याख्यान माला का आयोजन किया गया।

इस अवसर पर डॉ. श्रीनिवास ने बताया कि 1827 ई. पुणे के माली परिवार में हुआ ज्योतिबा फुले महाराष्ट के एक महान भारतीय समाज सुधारक, विचारक और लेखक रहे ,जिन्होंने नारी शिक्षा,दलित उत्थान और जाति-आधारित भेदभाव के खिलाफ लड़ाई लड़ी। उन्होंने पत्नी सावित्री बाई फुले के साथ मिलकर 1848 ई. पुणे में लड़कियों के लिए भारत का पहला स्वदेशी स्कूल खोला।

पत्नी सावित्री बाई जो बाद में स्‍वयं एक प्रसिद्ध समाजसेवीका बनी। दलित व स्‍त्रीशिक्षा के क्षेत्र में दोनों पति-पत्‍नी ने मिलकर काम किया वह एक कर्मठ और समाजसेवी की भावना रखने वाले व्यक्ति थे | 24 सितंबर 1873 ई .को महाराष्ट्र में दलितों और पिछड़ों के अधिकारों के लिए 'सत्यशोधक समाज' की स्थापना की।

इस अवसर पर मंच के सचिव शिरीष नाथ माथुर ने कहा कि ज्योतिबा फुले का नारा था- "विद्या बिन मति गयी, मति बिन नीति गयी,, नीति बिन गति गयी, गति बिन वित्त गया,, वित्त बिन शुद्र बना, ये घोर अनर्थ अविद्या ने किए " मंच के सह सचिव डॉ. प्रियदर्शी ओझा एवं डॉ. कुणाल आमेटा ने बताया कि- ज्योतिबा फुले ने आजीवन महिलाओं, पिछड़ों और किसानों के अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी, जिससे उन्हें भारतीय सामाजिक क्रांति का जनक माना जाता है।

इस अवसर पर सहायक सचिव विनोद कुमार चौधरी ने बताया कि- ज्योतिबा फुले, एक अग्रणी समाज सुधारक रहे । उन्होंने ब्राह्मणवादी रूढ़िवाद को चुनौती दी और दलितों एवं महिलाओं के अधिकारों के लिये संघर्ष किया।