राष्ट्रीय खेल दिवस : मैदान से उठती वह आवाज, जो राष्ट्र का भविष्य लिखती है
खेल केवल शरीर को स्वस्थ रखने का साधन नहीं, बल्कि अनुशासन, संघर्ष, आत्मविश्वास और राष्ट्रभक्ति की पाठशाला हैभारत में प्रत्येक वर्ष 29 अगस्त को राष्ट्रीय खेल दिव…
“बनाता” के परिणाम
खेल केवल शरीर को स्वस्थ रखने का साधन नहीं, बल्कि अनुशासन, संघर्ष, आत्मविश्वास और राष्ट्रभक्ति की पाठशाला हैभारत में प्रत्येक वर्ष 29 अगस्त को राष्ट्रीय खेल दिव…
रक्षाबंधन भारतीय संस्कृति का ऐसा पर्व है, जिसमें एक छोटा-सा धागा रिश्तों की विशाल दुनिया को अपने भीतर समेट लेता है। यह केवल भाई की कलाई पर राखी बाँधने और बदले …
उदयपुर। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ के तत्वावधान में आयोजित प्रवचन में डॉ सुरेंद्र मुनि ने कहा कि संसार के पदार्थों के प्रति मोह ही मनुष्य के सुख-दु…
उदयपुर। ‘डर, साहस और भी बहुत कुछ...’ को केवल एक पूर्व आईएएस अधिकारी की आत्मकथात्मक पुस्तक मानना इसके व्यापक अर्थ को सीमित कर देना होगा। यह पुस्तक दरअसल उस प्रश…
विजयनगर : भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर का भविष्य इस अगस्त सिर्फ कागज़ों पर नहीं,बल्कि ज़मीनी हकीकत में दिखाई दिया। बिल्डिंग भारत संपर्क नेशनल स्टार्टअप कॉन्टेस्ट मे…
भीलवाड़ा। पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो दशक से अधिक समय से सक्रिय वरिष्ठ पत्रकार संजय लढ़ा ने अपनी शैक्षणिक यात्रा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है…
माता पिता की अति महत्वाकांक्षाओं और जिद्दी प्रवृति फूल से कोमल बच्चों के लिए कितनी घातक हो जाती है कि वे तनाव और अवसाद नहीं झेल पाते और न केवल नशीली या नींद की…
उदयपुर : देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के जश्न के बीच भारत के लीडिंग प्राइवेट सेक्टर बैंक, एचडीएफसी बैंक ने ‘विजिल आंटी सेज़ - लेज़ीनेस सेव्स’ नाम का एक फ्रॉड अ…
उदयपुर, । श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ, उदयपुर के तत्वावधान में आयोजित धार्मिक प्रवचन में डॉ. सुरेन्द्र मुनि ने दया और अहिंसा को संसार के समस्त धर्मो…
लोकतंत्र किसी राष्ट्र की केवल शासन व्यवस्था नहीं होता, बल्कि वह उसके नागरिकों के विश्वास, स्वतंत्रता, सहभागिता और संवैधानिक मूल्यों का जीवंत प्रतिबिंब होता है।…
उदयपुर। देवेंद्र धाम में चल रहे चातुर्मास में आध्यात्मिक प्रवचन के दौरान डॉ.राजेन्द्र मुनि महाराज ने कर्म, पुण्य और मानव जीवन में भावों के महत्व पर प्रकाश डालत…
मनुष्य प्रायः अपने माता, पिता, आचार्यों तथा सगे सम्बन्धियों को ही अपना मानते हैं। ईश्वर के विषय में मनुष्यों के भिन्न-भिन्न विचार होते हैं। अधिकांश को ईश्वर के…