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पैसिफिक इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (पिम्स ), उदयपुर में नशा मुक्ति सप्ताह का आयोजन

मुख्य बिंदु
  • पैसिफिक इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (पिम्स ), उदयपुर में शुक्रवार को नशा मुक्ति सप्ताह के अवसर पर एक जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया।
  • यह कार्यक्रम मनोचिकित्सा विभाग, शरीर रचना विज्ञान, शरीर क्रिया विज्ञान एवं सामुदायिक चिकित्सा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया।
  • कार्यशाला का विषय “मानसिक स्वास्थ्य – नशे और लत को अलविदा” था।
  • कार्यक्रम में संस्थान के सभी शिक्षक, स्नातकोत्तर छात्र, मेडिकल एवं पैरामेडिकल छात्र उपस्थित रहे।
  • कार्यक्रम की शुरुआत अकादमिक डायरेक्टर प्रो.
  • दिलीप कुमार ने मुख्य अतिथि प्रो.
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पैसिफिक इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (पिम्स ), उदयपुर में नशा मुक्ति सप्ताह का आयोजन

उदयपुर। पैसिफिक इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (पिम्स ), उदयपुर में शुक्रवार को नशा मुक्ति सप्ताह के अवसर पर एक जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम मनोचिकित्सा विभाग, शरीर रचना विज्ञान, शरीर क्रिया विज्ञान एवं सामुदायिक चिकित्सा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया।

कार्यशाला का विषय “मानसिक स्वास्थ्य – नशे और लत को अलविदा” था। कार्यक्रम में संस्थान के सभी शिक्षक, स्नातकोत्तर छात्र, मेडिकल एवं पैरामेडिकल छात्र उपस्थित रहे।

कार्यक्रम की शुरुआत अकादमिक डायरेक्टर प्रो. दिलीप कुमार ने मुख्य अतिथि प्रो. प्रवीण खैरकर के स्वागत से की। प्रो. खैरकर ने अपने व्याख्यान में नशे की समस्या और उसके मानसिक, शैक्षणिक एवं पारिवारिक दुष्परिणामों पर प्रकाश डाला। उन्होंने 5 पीयर ग्रुप रिफ्लेक्शन रोल-प्ले मॉडल के माध्यम से यह बताया कि कैसे नशा धीरे-धीरे पढ़ाई, करियर और पारिवारिक जीवन को प्रभावित करता है।

कार्यक्रम का समन्वय प्रो. गणेश खेमनार द्वारा किया गया। छात्रों के बीच काल्पनिक (सिमुलेटेड) स्थितियों के माध्यम से यह दिखाया गया कि नशे की लत व्यक्ति को व्यक्तिगत स्तर से लेकर पारिवारिक और सामाजिक स्तर तक कैसे नुकसान पहुँचाती है।

प्रो. प्रवीण खैरकर द्वारा माइंडफुलनेस आधारित अभ्यासों का लाइव सत्र भी कराया गया, जिसमें तनाव प्रबंधन और आत्म-नियंत्रण के सरल उपाय बताए गए। उन्होंने यह भी समझाया कि नशे की समस्या को स्वीकार करना ही समाधान की पहली सीढ़ी है।

इस अवसर पर डॉ. प्रियांका झा (सीनियर रेज़िडेंट) एवं डॉ. तेजेन्द्र नाथ (क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट) ने नशे से बाहर निकलने के व्यावहारिक तरीकों और उपचार विकल्पों पर जानकारी दी।

वहीं डॉ. दिव्या चड्ढा ने नशा विरोधी विषय पर एक प्रेरणादायक कविता प्रस्तुत कर सभी को भावनात्मक रूप से जागरूक किया।कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं में यह संदेश देना था कि नशा नहीं, जीवन को अपनाएँ और मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें।