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वन स्टेशन वन प्रोडक्टः भारतीय रेलवे के माध्यम से क्षेत्रीय पहचान का उत्सव मनाना

ओएसओपी का विस्तार 2,000 से अधिक रेलवे स्टेशनों तक हुआ, जिससे 1.32 लाख कारीगरों को सशक्त बनाया गया और लाखों यात्रियों तक सीधी बाजार पहुंच के माध्यम से भारत की पारंपरिक शिल्पकलाओं को पुनर्जीवित किया गया

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वन स्टेशन वन प्रोडक्टः भारतीय रेलवे के माध्यम से क्षेत्रीय पहचान का उत्सव मनाना

नई दिल्ली,। भारतीय रेलवे की ‘‘वन स्टेशन वन प्रोडक्ट’’ (ओएसओपी) योजना स्थानीय शिल्प कौशल को बढ़ावा देने के लिए एक सशक्त मंच के रूप में उभरी है। यह पूरे देश में जमीनी स्तर पर उद्यमिता को बढ़ावा दे रही है। इस पहल का उद्देश्य रेलवे स्टेशनों को भारत की समृद्ध क्षेत्रीय विविधता के जीवंत प्रदर्शन केंद्रों में बदलना है।

स्थानीय विरासत को राष्ट्रीय रेलवे नेटवर्क से जोड़कर, ओएसओपी न केवल यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाता है, बल्कि समावेशी आर्थिक विकास को भी बढ़ावा देता है।

19 जनवरी 2026 तक, 2,002 स्टेशनों पर ओएसओपी आउटलेट स्थापित किए जा चुके हैं, जिनमें से कुल 2,326 आउटलेट चालू हैं। ये आउटलेट हजारों स्थानीय कारीगरों, बुनकरों और छोटे उत्पादकों के लिए आजीविका का स्रोत बन गए हैं, जिनका अब प्रतिदिन लाखों यात्रियों से सीधा संपर्क है। इसके अलावा, 2022 में ओएसओपी के शुभारंभ के बाद से, इस पहल ने पूरे भारत में 1.32 लाख से अधिक लाभार्थियों के लिए प्रत्यक्ष आर्थिक अवसर सृजित किए हैं।

संख्याओं से परे, ओएसओपी उन पारंपरिक शिल्पों और क्षेत्रीय विशिष्टताओं को पुनर्जीवित करने में मदद कर रहा है जो कभी लुप्त हो रहे थे। पूर्वोत्तर में हस्तनिर्मित मिट्टी के बर्तनों और बांस के काम से लेकर अन्य क्षेत्रों में मसालों, हथकरघा और स्थानीय मिठाइयों तकए ये उत्पाद यात्रियों को प्रत्येक क्षेत्र का सार प्रदान करते हैं।

वाणिज्य और संस्कृति को एकीकृत करके, भारतीय रेलवे ने स्टेशनों को स्थानीय उद्यम के केंद्रों में बदल दिया है। ‘‘वन स्टेशन वन प्रोडक्ट’’ पहल ‘‘वोकल फॉर लोकल’’ का एक सच्चा उदाहरण है, जो समुदायों को सशक्त बनाने के साथ-साथ पूरे देश में यात्रियों के यात्रा अनुभव को समृद्ध करती है।