प्रधानमंत्री ने कहा कि शहर को गांवों के लिए बाजार बनना चाहिए। दिवाली के दिये गांव के कुम्हार से खरीदें। 18000 गांव ऐसे थे जो कि 18वीं शताब्दी में जी रहे थे, वहां पर बिजली नहीं थी। हमने लाल किले से 1000 दिन में इन गांवों में बिजली देने का बीड़ा उठाया, अब तक 15,000 गांवों में बिजली पहुंचा चुके हैं।
प्रधानमंत्री ने जिले स्तर पर सरकारी योजनाओं को ठीक से लागू करने वाला पोर्टल भी शुरू किया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि ग्रामीण विकास के लिए सुशासन हमारी सरकार का मंत्र है और हम इस दिशा में प्रयास कर रहे हैं। अब मोबाइल ऐप दिशा से हर व्यक्ति ऊपर तक अपनी बात पहुंचा सकता है। इसके माध्यम से समय सीमा के तहत काम की प्रगति को देखा जा सकता है, योजनाओं में सुधार किया जा सकता है और सतत निगरानी की जा सकती है। इसके माध्यम से सांसदों को जोड़ा गया है जो जिला स्तर पर कार्य की प्रगति को देखते हैं।
गांवों को आत्मनिर्भर तथा गरीबी एवं बीमारी से मुक्त बनाने के लिए जातिवाद के जहर को समाप्त करना जरूरी है क्योंकि जातिवाद का जहर गांवों को बिखेर देता है, विकास के सपने को चूर चूर कर देता है।
गांव के विकास कार्य को निर्धारित समय सीमा के भीतर और लक्ष्य के अनुरूप पूरा किये जाने की जरूरत है। यह बात प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नानाजी देशमुख जन्म शताब्दी समारोह कार्यक्र म को संबोधित करते हुए कही।
केंद्र सरकार गांवों के सामर्य, रुचि और प्रकृति को जोड़कर ग्रामोदय की दिशा में काम कर रही है और कोई चीज थोपना नहीं चाहती है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि गांव आत्मनिर्भर बने, समृद्ध बने और सभी को जोड़ने वाला बने, ऐसे गांव के विकास के लिए भारत सरकार योजनाएं तैयार कर रही है और इस दिशा में प्रयास कर रही है।
गांव का विकास कैसे हो? इसके लिए सरकार गंभीर है।
हमारा प्रयास है कि गांव की अपनी जो शक्ति है, सबसे पहले उसी को जोड़ते हुए विकास का मॉडल बनाया जाए। जो सुविधाएं शहर में हैं वैसी अगर हम गांव में दे दें तो एक जीवन स्तर में बदलाव आएगा जो लोगों को गांव में रहने के लिए प्रेरित करेगा।
मोदी ने कहा, हम ग्रामीण विकास के कार्य को तेजी से लेना चाहते हैं। हम विकास करना चाहे, इतने से बात पूरी नहीं होगी, हम विकास की बात करें, इतने से बात पूरी नहीं होगी।
हम कार्यो को समय सीमा के भीतर पूरा करें। योजनाएं जिस मकसद से शुरू की गई थी, उसमें कोई बदलाव नहीं आए।
उन्होंने कहा कि योजनाओं पर काम करते हुए यह ध्यान रखना होगा कि वह इस बात पर आधारित नहीं हो कि उसमें कितना काम किया (आउटपुट) गया बल्कि इसका परिणाम (आउटकम) क्या रहा।
हमने कितना बजट खर्च किया, इस पर जोर होने की बजाए, यह ध्यान रखा जाए कि लक्ष्य क्या था और हमने कितना कार्य पूरा किया ।
मोदी ने कहा कि 70 साल में जो विकास की गति रही, साल 2022 में जब देश की आजादी के 75 साल पूरे होंगे तब हम सात दशकों से सपने संजो कर बैठे व्यक्ति की आशा आकांक्षा को हम पूरा सकें, हम इस लक्ष्य के साथ काम करना है।
इससे हिंदुस्तान के आखिरी छोर के व्यक्ति तक भी उसका हक पहुंचाया जा सकता है।