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अजीम प्रेमजी स्कूल: नन्हे शोधकर्ताओं ने जीवंत की हड़प्पा सभ्यता और पाषाण युग

मुख्य बिंदु
  • बाड़मेर | शहर के अजीम प्रेमजी स्कूल में कक्षा 6 के विद्यार्थियों ने सामाजिक विज्ञान प्रदर्शनी 'फुटप्रिंट्स ऑफ हिस्ट्री' (Footprints of History) का आयोजन किया।
  • इस प्रदर्शनी में विद्यार्थियों ने पाषाण युग के जीवन से लेकर सिंधु घाटी सभ्यता की उन्नत नगरीय व्यवस्था को बेहद रचनात्मक ढंग से प्रस्तुत किया।
  • कला और इतिहास का संगम विद्यार्थियों ने 'हड़प्पा कालीन ईंटों', 'विशाल स्नानागार', जल निकासी प्रणाली और समकालीन आभूषणों के 3D मॉडल स्वयं तैयार किए।
  • यह प्रयास राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF) के तहत 'कला एकीकृत शिक्षण' (Art Integrated Learning) का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
  • शोध-आधारित शिक्षण पर जोर विद्यालय में विषयों को रटाने के बजाय शोध (Research) और अन्य विषयों के साथ जोड़कर (Interdisciplinary approach) पढ़ाया जाता है।
  • बच्चों ने गाइड्स की भूमिका निभाते हुए न केवल मॉडल दिखाए, बल्कि मेसोपोटामिया और मिस्र जैसी सभ्यताओं के साथ तुलनात्मक विवरण भी दिए।
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अजीम प्रेमजी स्कूल: नन्हे शोधकर्ताओं ने जीवंत की हड़प्पा सभ्यता और पाषाण युग

बाड़मेर | शहर के अजीम प्रेमजी स्कूल में कक्षा 6 के विद्यार्थियों ने सामाजिक विज्ञान प्रदर्शनी 'फुटप्रिंट्स ऑफ हिस्ट्री' (Footprints of History) का आयोजन किया। इस प्रदर्शनी में विद्यार्थियों ने पाषाण युग के जीवन से लेकर सिंधु घाटी सभ्यता की उन्नत नगरीय व्यवस्था को बेहद रचनात्मक ढंग से प्रस्तुत किया।

कला और इतिहास का संगम विद्यार्थियों ने 'हड़प्पा कालीन ईंटों', 'विशाल स्नानागार', जल निकासी प्रणाली और समकालीन आभूषणों के 3D मॉडल स्वयं तैयार किए। यह प्रयास राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF) के तहत 'कला एकीकृत शिक्षण' (Art Integrated Learning) का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

शोध-आधारित शिक्षण पर जोर विद्यालय में विषयों को रटाने के बजाय शोध (Research) और अन्य विषयों के साथ जोड़कर (Interdisciplinary approach) पढ़ाया जाता है। बच्चों ने गाइड्स की भूमिका निभाते हुए न केवल मॉडल दिखाए, बल्कि मेसोपोटामिया और मिस्र जैसी सभ्यताओं के साथ तुलनात्मक विवरण भी दिए।

इस प्रदर्शनी ने साबितकिया कि जब बच्चों को स्वयं करके सीखने (Learning by Doing) का मौका मिलता है, तो विषय में उनकी रुचि गहरी होती है। इतिहास को किताबों से बाहर निकालकर मॉडल्स के रूप में ढालना बच्चों की कल्पनाशक्ति और समझ को नई उड़ान देता है।