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देश के उद्योग जगत में राजस्थानी समाज का योगदान

राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े: ‘राजस्थानी उद्योजक यशोगाथा’ कॉफी टेबल बुक का प्रकाशन

मुख्य बिंदु
  • मुंबई-पुणे : “राजस्थान से देश के विभिन्न क्षेत्रों में गए समाज ने नौकरी की अपेक्षा उद्योग, व्यवसाय को प्राथमिकता दी।
  • छोटे व्यवसाय से लेकर बड़े उद्योग समूह तक स्वतंत्र विश्व निर्माण करते हुए समाजसेवा, दानशीलता और संस्कार की परंपरा जगाई।
  • इसलिए देश के उद्योग जगत के उत्थान में राजस्थानी समाज का योगदान उल्लेखनीय है,” ऐसा प्रतिपादन राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने किया।
  • ‘राजस्थानी उद्योजक यशोगाथा’ इस कॉफी टेबल बुक के प्रकाशन प्रसंग पर वे बोल रहे थे।
  • इस अवसर पर राजस्थान के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की प्रतिनिधि ऋतु सोढ़ी, ‘सकाळ’ के संपादक सम्राट फडणीस सहित विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य उद्योगपति उपस्थित थे।
  • बागड़े ने कहा, “राजस्थान के अनेक परिवार पहले अकाल और अन्य परिस्थितियों के कारण राज्य के बाहर चले गए।
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देश के उद्योग जगत में राजस्थानी समाज का योगदान

मुंबई-पुणे : “राजस्थान से देश के विभिन्न क्षेत्रों में गए समाज ने नौकरी की अपेक्षा उद्योग, व्यवसाय को प्राथमिकता दी। छोटे व्यवसाय से लेकर बड़े उद्योग समूह तक स्वतंत्र विश्व निर्माण करते हुए समाजसेवा, दानशीलता और संस्कार की परंपरा जगाई।

इसलिए देश के उद्योग जगत के उत्थान में राजस्थानी समाज का योगदान उल्लेखनीय है,” ऐसा प्रतिपादन राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने किया। ‘राजस्थानी उद्योजक यशोगाथा’ इस कॉफी टेबल बुक के प्रकाशन प्रसंग पर वे बोल रहे थे।

इस अवसर पर राजस्थान के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की प्रतिनिधि ऋतु सोढ़ी, ‘सकाळ’ के संपादक सम्राट फडणीस सहित विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य उद्योगपति उपस्थित थे।बागड़े ने कहा, “राजस्थान के अनेक परिवार पहले अकाल और अन्य परिस्थितियों के कारण राज्य के बाहर चले गए।

लेकिन उन्होंने जहां बसाव किया, वहां व्यवसाय, उद्योगों की नींव रखी। बिड़ला, बजाज, पिरामल, मित्तल, अग्रवाल जैसी अनेक उद्योजक पीढ़ियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना स्थान निर्माण किया।

उद्योग के साथ शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र में भी समाज ने बड़ा योगदान दिया है।” राजस्थान की दानशीलता की परंपरा का उल्लेख करते हुए उन्होंने ‘भामाशाह’ का उदाहरण दिया।

“महाराणा प्रताप के संघर्ष के काल में भामाशाह ने अपनी संपत्ति उनके कार्य के लिए दी। इसलिए राजस्थान में आज भी बड़े दानदाता को ‘भामाशाह’ कहकर सम्मानित किया जाता है।

शिक्षा के साथ संस्कार, सामाजिक जागरूकता महत्वपूर्ण है। जन्म-मृत्यु तक जीवन का कोरा कागज अपनी कर्मनिष्ठा से भरना होता है।

इस पुस्तक में उद्योजकों ने उस कागज पर उद्योग के साथ समाजसेवा की यशोगाथा लिखी है,” ऐसा भी बागड़े ने कहा। श्री बागड़े ने आगे कहा कि राजस्थानी समाज की ओळख उद्योग, व्यवसाय और उद्यमशीलता से जुड़ी हुई है।

देश-विदेश में अनेक राजस्थानी उद्योजकों ने निर्माण किया स्वतंत्र स्थान। उद्योग के साथ शिक्षा और समाजसेवा को भी प्राथमिकता दी गई।

व्यवसायाला वेगवान निर्णय आणि पोषक वातावरणाची गरज है। शिक्षा के साथ संस्कार और सामाजिक जागरूकता आवश्यक है।

अगली पीढ़ी के लिए उद्योजकों के कार्य का दस्तावेज बनेगी ‘यशोगाथा’। कार्यक्रम का प्रास्ताविक करते हुए सम्राट फडणीस ने ‘कॉफी टेबल बुक’ मागची भूमिका स्पष्ट की।

समाज में विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय, सकारात्मक काम करने वाले व्यक्तियों के कार्य का दस्तावेजीकरण होना चाहिए, उनकी प्रेरणादायक यात्रा की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचानी चाहिए, समाज के सामने ऐसी सकारात्मक कार्यों का आदर्श निर्माण होना चाहिए, इस उपक्रम के लिए ‘सकाळ’ की ओर से इस स्वरूप में उन्हें सांगितले।ऋतु सोढ़ी, प्रतिनिधि, राजस्थान सूचना एवं विभाग, मुंबई ने कहा, “‘कॉफी टेबल बुक’ केवल कुछ पन्नों का संकलन नहीं है, बल्कि प्रेरणादायक चेहरों की कठोर मेहनत की, सफलता की सच्ची कहानी है।

जिन्होंने अपनी जिद से एक महत्वपूर्ण स्थान हासिल किया है।

इस तरह का आयोजन केवल अपने समाज की सफलता को सामने नहीं लाता, बल्कि महाराष्ट्र और राजस्थान इन दोनों राज्यों के आपसी संबंध, भाईचारा और भी मजबूत करता है।”इस अवसर पर अभय संघेती, आशिष डालिया, भरतलाल धर्मावत, गोपाल अग्रवाल, जसराज चौधरी, जेठमल दाधीच, जुगलकिशोर मालू, जुगलकिशोर पुंगलिया (महेश बैंक), रागेश और मगराज राठी (महेश नागरी मल्टीस्टेट), महेश राठी, नीलेश और नेहा लड्डा, ओमप्रकाश धूत, पंकज मंत्री, पुरुषोत्तम लोहिया, राजेश मालपाणी, राजकुमार लोढा, रमेश चौधरी, सचिन मालपाणी, शेखर मुंदड़ा, श्यामसुंदर कलंत्री, सुरेश लखोटिया, विजयकुमार नाहर का सम्मान किया गया।