प्रतापगढ़। जिले की पीपलखूंट एवं सुहागपुरा पंचायत समितियों के जनजातीय एवं ग्रामीण अंचलों में गठित बाल संसद के बाल प्रतिनिधियों ने सोमवार को पहली बार जिला मुख्यालय पहुंचकर जिला कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक कार्यालय का अवलोकन किया और वरिष्ठ अधिकारियों से सीधे संवाद किया।
यह पहल गायत्री सेवा संस्थान एवं चाइल्ड राइट्स एंड यू (सी.आर.वाय) के सहयोग एवं मार्गदर्शन में बाल अधिकारों के प्रति बच्चों और समुदाय को जागरूक करने के उद्देश्य से की जा रही है।
इस अवसर पर प्रतापगढ़ जिला पुलिस अधीक्षक विशाल जांगिड़ ने बाल संसद के प्रतिनिधियों से संवाद करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया।
उन्होंने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि यदि उनके आसपास किसी बच्चे के साथ कुछ गलत होता है, कोई बच्चा किसी बात से डरता है या उसे किसी प्रकार की परेशानी है, तो वे सीधे उनसे उनके व्यक्तिगत नंबर 8764535201 पर भी संपर्क कर सकते हैं।अधीक्षक ने बच्चों को भरोसा दिलाया कि उनकी बात को गंभीरता से सुना जाएगा।
पुलिस अधीक्षक ने बच्चों को विभिन्न कानूनी प्रावधानों की जानकारी देते हुए प्रत्येक पुलिस थाने में बच्चों से संबंधित मामलों के लिए तैनात बाल कल्याण पुलिस अधिकारी (CWPO) की भूमिका के बारे में भी बताया।
उन्होंने बच्चों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने तथा बाल अधिकारों के प्रति जागरूकता विकसित करने बाल संसद के माध्यम से अपनी बात रखने का मंच उपलब्ध कराने की पहल की सराहना की।
इसके पश्चात बाल संसद के प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलेक्टर कार्यालय में अतिरिक्त जिला कलेक्टर विजेश कुमार पंड्या से भी मुलाकात कर संवाद किया। उन्होंने बच्चों को जिला प्रशासन द्वारा संचालित विभिन्न कार्यक्रमों तथा बच्चों से संबंधित योजनाओं एवं सुविधाओं की जानकारी दी और उनकी समस्याओं को समझने के लिए उनसे संवाद किया।
बाल संसद के प्रतिनिधिमंडल के साथ बाल अधिकार विशेषज्ञ एवं गायत्री सेवा संस्थान के निदेशक डॉ. शैलेन्द्र पंड्या ने अधिकारियों को बाल संसद की अवधारणा, इसकी कार्यप्रणाली एवं ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों की भागीदारी के बारे में जानकारी दी।
उन्होंने राजस्थान सरकार द्वारा जारी बाल पंचायत संबंधी आदेश की प्राथमिकता से प्रतापगढ़ जिले में प्रभावी अनुपालना किए जाने की आवश्यकता पर भी चर्चा की, ताकि बच्चों की सहभागिता को स्थानीय शासन व्यवस्था से जोड़ा जा सके।
इस दौरान बाल संसद की प्रतिनिधि वंदना मीणा, नारी मीणा , प्रिया यादव एवं परमेश्वर मीणा, सुमित अंजना ने बाल संसद के बच्चों द्वारा तैयार किए गए पोस्टर अधिकारियों को भेंट किए। बाल प्रतिनिधियों ने अपने-अपने गांवों से जुड़े स्थानीय मुद्दों एवं बच्चों से संबंधित समस्याओं से भी अधिकारियों को अवगत कराया।
बाल संसद के प्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन एवं पुलिस अधिकारियों से सीधे संवाद को अपने लिए एक महत्वपूर्ण अनुभव बताया। बच्चों ने कहा कि इस तरह के संवाद से उन्हें अपने अधिकारों, सरकारी योजनाओं और शिकायतों के लिए उपलब्ध व्यवस्थाओं की जानकारी मिलती है तथा अपनी बात अधिकारियों तक सीधे पहुंचाने का आत्मविश्वास भी बढ़ता है।
इस अवसर पर गायत्री सेवा संस्थान के जिला समन्वयक रामचन्द्र मेघवाल ने बताया कि विभिन्न बाल संसद से चयनित 30 बच्चों का यह विजिट कार्यक्रम आयोजित किया गया अब ये बाल प्रतिनिधि अपने-अपने गाँव में जाकर अन्य बच्चों के साथ मासिक बैठक में यह जानकारी साझा करेंगे l
