उदयपुर। विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान की ओर से रविवार को उदयपुर में आयोजित प्रांतीय प्रबंध समिति सम्मेलन को लेकर पत्रकार वार्ता आयोजित की गई। पत्रकार वार्ता में विद्या भारती राजस्थान के क्षेत्र प्रचार प्रमुख नवीन कुमार ने संस्था की शैक्षणिक गतिविधियों, उपलब्धियों, सामाजिक सरोकारों और आगामी योजनाओं की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि विद्या भारती का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को शैक्षणिक ज्ञान देना नहीं, बल्कि उन्हें संस्कारवान, जिम्मेदार और राष्ट्र के प्रति समर्पित नागरिक के रूप में तैयार करना है।
नवीन कुमार ने बताया कि विद्या भारती देश का सबसे बड़ा गैर-सरकारी शिक्षा संस्थान है, जो भारतीय जीवन-मूल्यों, संस्कृति, परंपराओं, संस्कार, राष्ट्रीयता और राष्ट्रभक्ति को शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों तक पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। संस्था की शैक्षिक यात्रा वर्ष 1952 में उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से शुरू हुई थी। इसके बाद विद्या भारती का शिक्षा का कार्य देश के विभिन्न राज्यों और क्षेत्रों में निरंतर विस्तार हुआ। वर्तमान में विद्यालयों के साथ-साथ अनौपचारिक शिक्षा केंद्रों और विभिन्न सामाजिक गतिविधियों के माध्यम से भी विद्यार्थियों एवं समाज के बीच शिक्षा और संस्कार का कार्य किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि विद्या भारती चित्तौड़ प्रांत के अंतर्गत बांसवाड़ा, डूंगरपुर, उदयपुर, राजसमंद, प्रतापगढ़, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा और अजमेर सहित विभिन्न क्षेत्रों में शिक्षा का कार्य संचालित किया जा रहा है। विशेष रूप से जनजातीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। प्रांत में वर्तमान में 38 प्राथमिक, 85 उच्च प्राथमिक, 76 माध्यमिक और 35 उच्च माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं। इन विद्यालयों के माध्यम से बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के साथ उनके व्यक्तित्व और चरित्र निर्माण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
वंचित क्षेत्रों तक शिक्षा पहुंचाने पर जोर
नवीन कुमार ने कहा कि विद्या भारती का प्रमुख उद्देश्य समाज के उन वर्गों और क्षेत्रों तक शिक्षा एवं संस्कार पहुंचाना है, जहां आज भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। इसके लिए संस्कार केंद्रों, एकल शिक्षक विद्यालयों और अन्य शैक्षणिक माध्यमों के जरिए दूरस्थ ग्रामीण एवं जनजातीय क्षेत्रों में कार्य किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा के साथ योग, संगीत, संस्कृत, नैतिक शिक्षा और आध्यात्मिक शिक्षा जैसी गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। इन गतिविधियों का उद्देश्य विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के साथ उनमें आत्मविश्वास, अनुशासन, सेवा भावना और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है।
विभिन्न गतिविधियों और कार्यक्रमों की जानकारी
पत्रकार वार्ता में विद्या भारती की ओर से आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों और अभियानों की जानकारी भी दी गई। इस दौरान ‘सप्तशक्ति संगम कार्यक्रम’ सहित संस्था की विभिन्न गतिविधियों पर प्रकाश डाला गया। वहीं 25 सितंबर 2026 को आयोजित ‘वंदे मातरम्’ कार्यक्रम में देशभर में बड़ी संख्या में लोगों की सहभागिता का भी उल्लेख किया गया।
नवीन कुमार ने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा के क्षेत्र में तेजी से बदलाव हो रहे हैं। ऐसे में विद्यार्थियों को आधुनिक ज्ञान और तकनीकी दक्षता के साथ अपनी सांस्कृतिक एवं नैतिक जड़ों से जोड़ना भी आवश्यक है। विद्या भारती इसी दिशा में शिक्षा और संस्कार के समन्वय के माध्यम से कार्य कर रही है।
उन्होंने कहा कि संस्था का लक्ष्य ऐसी युवा पीढ़ी तैयार करना है, जो शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक रूप से विकसित होने के साथ समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों को समझे। विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता, अनुशासन, सेवा भावना, सामाजिक संवेदनशीलता और राष्ट्रभक्ति का भाव विकसित करने के लिए विद्यालयों में नियमित रूप से विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाती हैं।
उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल रोजगार प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्ति के व्यक्तित्व और चरित्र निर्माण का आधार भी है। इसी सोच के साथ विद्या भारती विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ संस्कार देने और उन्हें राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया से जोड़ने का प्रयास कर रही है।
प्रचार विभाग, विद्या भारती चित्तौड़ प्रांत की ओर से आयोजित पत्रकार वार्ता में संस्था की आगामी योजनाओं, शैक्षणिक कार्यक्रमों और विभिन्न क्षेत्रों में संचालित गतिविधियों की भी जानकारी दी गई।
