डॉ. चित्तौड़ा ने बताया कि उदयपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान स्व. शेखावत ने उनकी कला को प्रोत्साहित किया था। उन्होंने चित्तौड़ा को मंच पर बुलाकर उनकी कला की सराहना की और उनके द्वारा बनाई गई एक कृति का विमोचन भी किया था। यह प्रसंग आज भी कलाकार के लिए विशेष स्मृति बना हुआ है।
इसी आत्मीय अनुभव और सम्मान की भावना को अभिव्यक्त करते हुए डॉ. चित्तौड़ा ने पूर्व उपराष्ट्रपति के जीवन और योगदान को 13 फीट लंबे पत्रक में प्रस्तुत किया है।
उन्होंने इस पत्रक का प्रदर्शन उदयपुर की रानी रोड स्थित स्व. भैरोंसिंह शेखावत की प्रतिमा स्थल पर किया। यहां पहुंचे स्थानीय लोगों और शहर भ्रमण पर आए पर्यटकों ने पत्रक का अवलोकन किया तथा कलाकार के इस प्रयास की सराहना की।
यह पहल कला के माध्यम से एक जननेता की स्मृतियों को संजोने और उनके सार्वजनिक जीवन से नई पीढ़ी को परिचित कराने का प्रयास है।
