उदयपुर। सेक्टर-14 स्थित महावीर भवन में विराजित मुनि 108 श्री आदित्य सागर ने धर्मसभा में स्वाध्याय, तत्वचर्चा और गुरु सानिध्य के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्वाध्याय परम तप है, जिससे मन में स्थिरता आती है और व्यक्ति आत्मकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ता है।
उन्होंने कहा कि जीवन में यश और सम्मान प्राप्त करने के लिए गुरु एवं प्रभु के सानिध्य में रहना चाहिए।
तत्वचर्चा और स्वाध्याय से ज्ञान में वृद्धि होती है तथा जीवन को सही दिशा मिलती है।ट्रस्ट अध्यक्ष भंवरलाल मुंडलिया ने बताया कि धर्मसभा में मुनि श्री के पद प्रक्षालन का पुण्यलाभ शरद सर्राफ एवं रमेश रावका परिवार को मिला, जबकि शास्त्र भेंट करने का पुण्यार्जन गेहरी लाल मुंडलिया परिवार ने प्राप्त किया।ट्रस्ट महामंत्री भूरीलाल जैन ने मुनि श्री के छह दिवसीय प्रवास को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी श्रद्धालुओं एवं समाजजनों का आभार व्यक्त किया।
उन्होंने श्री महावीर युवा परिषद, त्रिशला महिला मंडल, कार्यक्रम संचालक राजेश देवड़ा, संगीतकार मनीष तथा सभी दानदाताओं के योगदान की सराहना करते हुए उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया।सैकड़ों श्रद्धालु मुनि संघ के विहार में हुए शामिलधर्मसभा के पश्चात मुनि संघ का विहार गमेर बाग के लिए हुआ।
इस अवसर पर सैकड़ों साधर्मियों ने मुनि श्री के साथ विहार कर अपनी श्रद्धा और भक्ति प्रकट की। मुनि श्री के सानिध्य में गमेर बाग में 23 से 25 अक्टूबर तक मंत्राक्ष कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।
इस दौरान श्रद्धालुओं को धार्मिक एवं आध्यात्मिक गतिविधियों से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
