हनुमानगढ़। समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए महिला सशक्तीकरण, बेटियों की शिक्षा, स्वास्थ्य जागरूकता और युवाओं की सामाजिक भागीदारी को मजबूत करना जरूरी है।
समाजसेवा तभी सार्थक बनती है, जब उसका लाभ जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचे और लोगों में अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूकता विकसित हो।
इन्हीं विषयों को लेकर अंतरराष्ट्रीय जाट संसद महिला मोर्चा की प्रदेश संयोजक किरण जान्दू ने श्री खुशाल दास विश्वविद्यालय में गुरु गोबिंद सिंह चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं वाग्भट वेलनेस आयुष रिसर्च सेंटर के संस्थापक बाबू लाल जुनेजा से शिष्टाचार मुलाकात की।
चर्चा में महिला जागरूकता, स्वास्थ्य चेतना, महिला सशक्तीकरण, शिक्षा, युवा जागृति, बेटियों के सम्मान तथा आयुर्वेद के प्रति जनजागरूकता जैसे विषय प्रमुख रहे।
बाबू लाल जुनेजा का संदेश—पद से अधिक महत्वपूर्ण जनसेवा बाबू लाल जुनेजा ने किरण जान्दू के सामाजिक प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि सामाजिक नेतृत्व की असली पहचान जनहित के कार्यों और जरूरतमंदों के प्रति संवेदनशीलता से होती है।
युवाओं को केवल अपनी व्यक्तिगत उपलब्धियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि समाज की समस्याओं को समझकर उनके समाधान में भी योगदान देना चाहिए।
महिलाओं को जागरूक बनाने, बेटियों की शिक्षा को प्रोत्साहित करने और जरूरतमंद परिवारों की सहायता के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग को अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
उन्होंने सामाजिक संस्थाओं, युवाओं और जागरूक नागरिकों की सामूहिक भागीदारी को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक जागरूकता से जुड़े प्रयासों को निरंतर आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। जब सेवा भावना व्यवहार में उतरती है और समाज के लोग मिलकर काम करते हैं, तभी सकारात्मक परिवर्तन की संभावनाएं मजबूत होती हैं।
जरूरतमंद बेटियों की सहायता और महिला सशक्तीकरण पर सक्रियता किरण जान्दू अंतरराष्ट्रीय जाट संसद महिला मोर्चा की प्रदेश संयोजक हैं। वह पूर्व में महाराजा सूरजमल संगठन की जिला अध्यक्ष भी रह चुकी हैं। उनकी सामाजिक गतिविधियों में जरूरतमंद परिवारों की बेटियों के विवाह में सहयोग, ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान को राज्य स्तर तक पहुंचाने के प्रयास और महिलाओं तथा बेटियों के सम्मान के प्रति जागरूकता बढ़ाना शामिल है।
महिला सशक्तीकरण केवल एक नारा नहीं, बल्कि शिक्षा, आत्मनिर्भरता, स्वास्थ्य संबंधी जानकारी और सामाजिक भागीदारी से जुड़ा विषय है। बेटियों को शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने, महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करने और जरूरतमंद परिवारों को सहयोग देने जैसे प्रयास सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। किरण जान्दू की गतिविधियां इन्हीं सामाजिक सरोकारों को केंद्र में रखती हैं।
परिंडा खेली से गोसेवा तक सेवा की पहल किरण जान्दू की सेवा गतिविधियों में गर्मी के मौसम में पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था करने के उद्देश्य से ‘परिंडा खेली’ अभियान, निर्जला एकादशी पर मीठे पानी की छबील तथा जन्मदिन पर गोशाला में गोवंश के लिए चारा और गुड़ भेंट करना शामिल है। जरूरतमंद परिवारों की सहायता के साथ जीव-जंतुओं के प्रति संवेदनशीलता से जुड़े ये प्रयास समाज में सेवा और सहयोग की भावना को प्रोत्साहित करते हैं।
इन गतिविधियों का महत्व इस बात में है कि सामाजिक जिम्मेदारी को दैनिक जीवन के व्यवहार से जोड़ा जाए। स्थानीय स्तर पर छोटे-छोटे सेवा कार्य भी लोगों को प्रेरित कर सकते हैं और सामूहिक भागीदारी के लिए सकारात्मक वातावरण बना सकते हैं।
वाग्भट वेलनेस के माध्यम से आयुर्वेद और स्वास्थ्य चेतना का महत्व बाबू लाल जुनेजा वाग्भट वेलनेस आयुष रिसर्च सेंटर के संस्थापक हैं। आयुर्वेद और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूकता बढ़ाने के संदर्भ में स्वास्थ्य चेतना भी चर्चा का महत्वपूर्ण विषय रही।
संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद और समय पर चिकित्सकीय परामर्श स्वस्थ जीवन के बुनियादी पहलू हैं।
आयुर्वेद संबंधी जानकारी देते समय प्रमाणिक मार्गदर्शन, व्यक्ति की जरूरतों के अनुरूप सलाह और आवश्यकतानुसार आधुनिक चिकित्सा का महत्व भी बनाए रखना जरूरी है।
महिलाओं और युवाओं तक स्वास्थ्य संबंधी सही जानकारी पहुंचाना विशेष रूप से उपयोगी हो सकता है।
स्वास्थ्य जागरूकता से जुड़ी गतिविधियां लोगों को अपनी जीवनशैली पर ध्यान देने, समय पर जांच कराने और जरूरत पड़ने पर योग्य चिकित्सक से परामर्श लेने के लिए प्रोत्साहित कर सकती हैं।
वाग्भट वेलनेस आयुष रिसर्च सेंटर की पहचान को आयुर्वेद और स्वास्थ्य जागरूकता के संदर्भ में प्रस्तुत करते हुए इन विषयों पर तथ्यपरक संवाद की संभावनाएं सामने आती हैं।
महिला जागरूकता, शिक्षा और युवा भागीदारी से मजबूत होगा समाज मुलाकात का केंद्रीय विषय समाजसेवा को महिला सशक्तीकरण, शिक्षा, स्वास्थ्य चेतना और युवा जागृति से जोड़ना रहा। किरण जान्दू की संगठनात्मक एवं सामाजिक गतिविधियां और बाबू लाल जुनेजा की ट्रस्ट तथा आयुर्वेद-स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी भूमिका इन मुद्दों पर जागरूकता और संवाद के महत्व को रेखांकित करती हैं।
समाज में स्थायी सकारात्मक बदलाव के लिए जरूरी है कि बेटियों की शिक्षा और सम्मान, महिलाओं की भागीदारी, युवाओं की सामाजिक जिम्मेदारी और स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता को निरंतर महत्व दिया जाए। सामाजिक संगठनों, स्वास्थ्य संस्थानों और नागरिकों के समन्वित प्रयास इन विषयों पर जनचेतना बढ़ाने में उपयोगी हो सकते हैं।
