*राजस्थानी संस्कृति और संगीत को सात समुंदर पार लोकप्रिय बनाने का ऐतिहासिक कार्य करने वाले वीणा संगीत के संस्थापक के सी मालू को दी गई श्रद्धांजलि और लघु फ़िल्म दिखाई गई* *एक लाख रुपए का पदम अन्तर्राष्ट्रीय फोटो जनरलिज्म पुरस्कार की घोषणा* नीति गोपेन्द्र भट्ट नई दिल्ली/जयपुर।
पत्रकारिता में तस्वीरों की बढ़ती प्रभावशीलता, फोटो पत्रकारिता की बदलती चुनौतियों और तकनीकी बदलावों के दौर में मीडिया की भूमिका पर व्यापक मंथन के साथ जयपुर में आयोजित एक दिवसीय 12वां जयपुर फोटो जर्नलिज्म सेमिनार सम्पन्न हुआ।
राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर जयपुर में आयोजित इस राष्ट्रीय स्तर के सेमिनार का शुभारंभ राजस्थान के नगरीय विकास एवं आवासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने दीप प्रज्वलित कर किया।
इमेजिन फोटो जर्नलिस्ट सोसायटी की ओर से आयोजित इस सेमिनार में देश के विभिन्न हिस्सों से आए फोटो पत्रकारों, पत्रकारों, मीडिया और जनसंपर्क विशेषज्ञों तथा सामाजिक क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों ने फोटो पत्रकारिता के वर्तमान स्वरूप, नई तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मीडिया की सामाजिक जिम्मेदारी पर अपने विचार रखे।
*एआई का विवेकपूर्ण उपयोग जरूरी : खर्रा* उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा कि आधुनिक तकनीक ने पत्रकारिता को नई गति और व्यापक पहुंच दी है, लेकिन तकनीक का विवेकपूर्ण उपयोग नहीं हुआ तो इसके दुष्परिणाम समाज के सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक ताने-बाने के लिए गंभीर हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई)आज पत्रकारिता सहित जीवन के लगभग हर क्षेत्र को प्रभावित कर रहा है, ऐसे में इसका उपयोग करने में विवेकपूर्ण ढंग, जिम्मेदारी के साथ और भारतीय जीवन मूल्यों का ध्यान रखना आवश्यक है।
उन्होंने प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और फोटो पत्रकारों से आह्वान किया कि मीडिया की नई पीढ़ी को नकारात्मकता के बजाय सकारात्मक पत्रकारिता का पाठ पढ़ाए। साथ ही पत्रकारिता भारतीय संस्कृति, जीवन मूल्यों और स्वस्थ एवं गौरवशाली परम्पराओं के अनुरूप समाज को दिशा देने का कार्य करे।
खर्रा ने कहा कि पत्रकारों को राजनीतिक स्वार्थपूर्ति के लिए होने वाले प्रयासों से दूरी बनाए रखते हुए ऐसी पत्रकारिता करनी चाहिए जो समाज को शिक्षित करे, लोगों को जागरूक बनाए और देश एवं प्रदेश में विकास की सकारात्मक पहलों को सामने लाए। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता का हुनर समाज के हित में इस्तेमाल होना चाहिए और तस्वीरों के माध्यम से उन वास्तविक कहानियों को सामने लाया जाना चाहिए, जो सामान्यतः लोगों की नजरों से दूर रह जाती हैं।
*एक तस्वीर में छिपी होती है पूरी कहानी* सेमिनार में वक्ताओं ने कहा कि डिजिटल और सोशल मीडिया के दौर में तस्वीर की ताकत कई गुना बढ़ गई है। एक प्रभावशाली तस्वीर कुछ ही क्षणों में किसी घटना, व्यक्ति या सामाजिक सरोकार को देश-दुनिया तक पहुंचा सकती है।
ऐसे में फोटो पत्रकार केवल किसी घटना को कैमरे में कैद करने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि वह अपने समय का साक्षी और समाज के महत्वपूर्ण घटनाक्रमों का डॉक्युमेंटेशन भी है।
फोटो पत्रकारिता केवल एक तस्वीर लेना नहीं, समाज और समय का ऐतिहासिक दस्तावेज है ।
*के सी मालू को श्रद्धांजलि* इस अवसर पर राजस्थानी संस्कृति और संगीत को सात समुंदर पार लोकप्रिय बनाने का ऐतिहासिक कार्य करने वाले वीणा संगीत के संस्थापक के सी मालू को श्रद्धांजलि दी गई और उन पर पुरुषोत्तम लीला दिवाकर द्वारा निर्मित एक लघु फ़िल्म भी दिखाई गई।
*सेमिनार में वरिष्ठ पत्रकारों ने लिया भाग* सेमिनार में दिल्ली से वरिष्ठ पत्रकार डॉ. रामा सोलंकी, जयपुर से रोहित परिहार, मुकेश माथुर, पीआर प्रोफेशनल अयोध्या प्रसाद गौड़, वीणा म्यूजिक के निदेशक हेमजीत मालू, नोखा-बीकानेर से आए पत्रकार राजेश अग्रवाल सहित अन्य वक्ताओं ने फोटो पत्रकारिता और मीडिया की बदलती भूमिका पर विचार रखे। साथ ही एक लाख रुपए का पदम अन्तर्राष्ट्रीय फोटो जनरलिज्म पुरस्कार की घोषणा भी की गई ।
*दिवाकर ने दिखाई नेपाल बाढ़ से राजस्थान के रेगिस्तान तक की जिंदगी की तस्वीर* सेमिनार के आयोजक एवं वरिष्ठ फोटो जर्नलिस्ट पुरुषोत्तम लीला दिवाकर ने अपने लंबे पत्रकारिता जीवन के कई लोमहर्षक और यादगार प्रसंग साझा किए। उन्होंने नेपाल की बाढ़ त्रासदी, कोविड काल की चुनौतियों और राजस्थान के रेगिस्तानी क्षेत्रों में पेयजल संकट को अपने कैमरे और डॉक्यूमेंट्री के माध्यम से सामने लाने के अनुभव सुनाए।
दिवाकर ने बताया कि राजस्थान के दूरदराज इलाकों में पानी के लिए महिलाओं को सिर पर घड़ा रखकर कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था। उन्होंने इस मानवीय समस्या को तस्वीरों और डॉक्यूमेंट्री के माध्यम से प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
साथ ही इस समस्या और पेयजल संकट के समाधान के लिए कतिपय एनजीओ द्वारा पॉलिपैक थैलियों का वितरण और उनका प्रयोग सहित विभिन्न प्रयासों को भी अपने कैमरे के माध्यम से दस्तावेजबद्ध करने की कहानी तफसील से दिखाई ।
उन्होंने सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों की जीवटता, संघर्ष और विपरीत परिस्थितियों में जीवन जीने की कहानियों को भी अपने फोटो कार्य के माध्यम से सामने लाने के अनुभव भी साझा किए। उनके अनुसार, एक फोटो पत्रकार के लिए कैमरा केवल उपकरण नहीं, बल्कि समाज की अनकही कहानियों को सामने लाने का माध्यम है।
इस अवसर पर वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार गोपेन्द्र नाथ भट्ट, हरिदेव जोशी पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के संकाय प्रभारी मनोज लोढ़ा , विश्वविद्यालय के छात्रों सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
*युवा फोटो पत्रकारों के लिए अनुभव साझा करने का मंच* दो सत्रों में चले इस सेमिनार में फोटो पत्रकारिता के अतीत, वर्तमान और भविष्य के साथ-साथ बदलती तकनीक, सोशल मीडिया, एआई के प्रभाव, तस्वीरों की विश्वसनीयता और पत्रकारिता की सामाजिक जिम्मेदारी जैसे विषयों पर संवाद हुआ। युवा फोटो पत्रकारों को वरिष्ठ पत्रकारों और फोटो जर्नलिस्टों के अनुभवों से सीखने तथा अपने अनुभव साझा करने का अवसर मिला।
आयोजकों के अनुसार, इमेजिन फोटो जर्नलिस्ट सोसायटी का उद्देश्य फोटो पत्रकारिता को प्रोत्साहित करना और नई पीढ़ी के फोटोग्राफरों को अनुभवी पत्रकारों के साथ संवाद के लिए साझा मंच उपलब्ध कराना है। जयपुर फोटो जर्नलिज्म सेमिनार का यह 12वां संस्करण इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कड़ी रहा।
