नीति गोपेन्द्र भट्ट
नई दिल्ली/जयपुर। पत्रकारिता में तस्वीरों की बढ़ती भूमिका, फोटो पत्रकारिता की बदलती चुनौतियों और उसके समकालीन स्वरूप पर विचार-विमर्श के लिए 12वां जयपुर फोटो जर्नलिज्म सेमिनार 8 अक्टूबर को जयपुर के राजस्थान इण्टरनेशनल सेण्टर में आयोजित किया जाएगा।
वरिष्ठ फोटो जर्नलिस्ट पुरुषोत्तम लीला दिवाकर ने बताया कि राजस्थान के नगरीय विकास एवं आवासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा सेमिनार का शुभारंभ करेंगे ।उन्होंने बताया कि इमेजिन फोटो जर्नलिस्ट सोसायटी की ओर से आयोजित इस राष्ट्रीय स्तर के आयोजन में देश के विभिन्न हिस्सों से जुड़े फोटो पत्रकार, मीडिया विशेषज्ञ और पत्रकारिता एवं जन संपर्क से जुड़े प्रतिनिधि भाग लेंगे।
सेमिनार का आयोजन राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर, जयपुर में सुबह 9:30 बजे से आरम्भ होगा। यह आयोजन इण्डियन फ़ोटो जर्नलिज़्म मीट -अप के रूप में भी महत्वपूर्ण है, जिसमें फोटो पत्रकारिता के वर्तमान परिदृश्य, बदलती तकनीक और पत्रकारिता में दृश्य माध्यमों की प्रभावशीलता पर चर्चा होगी।आज के डिजिटल और सोशल मीडिया युग में एक तस्वीर कुछ ही क्षणों में किसी घटना को देश-दुनिया तक पहुंचाने की क्षमता रखती है। ऐसे समय में फोटो पत्रकार की भूमिका केवल घटनाओं को कैमरे में कैद करने तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि वह समाज, समय और घटनाक्रम का महत्वपूर्ण दस्तावेज तैयार करता है। इसी दृष्टि से जयपुर फोटो जर्नलिज्म सेमिनार लगातार फोटो पत्रकारिता से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को मंच प्रदान करता रहा है।
इस वर्ष आयोजित होने वाला यह 12वां संस्करण फोटो पत्रकारिता के क्षेत्र में संवाद और अनुभवों के आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण अवसर होगा। आयोजन से जुड़े इमेजिन फोटो जर्नलिस्ट सोसायटी का उद्देश्य फोटो पत्रकारिता को प्रोत्साहित करना तथा इस क्षेत्र से जुड़े पेशेवरों और नई पीढ़ी के फोटोग्राफरों को एक साझा मंच उपलब्ध कराना है।
आयोजकों के अनुसार, सेमिनार में फोटो पत्रकारिता के अनुभवों, तकनीकी बदलावों और वर्तमान मीडिया परिदृश्य में तस्वीरों की विश्वसनीयता एवं प्रभाव जैसे विषयों पर संवाद को आगे बढ़ाया जाएगा। युवा फोटो पत्रकारों के लिए भी यह आयोजन वरिष्ठ एवं अनुभवी फोटो पत्रकारों से सीखने और अपने अनुभव साझा करने का अवसर प्रदान करेगा।
जयपुर में होने वाला यह फोटो जर्नलिज्म सेमिनार न केवल फोटो पत्रकारों का मिलन-बिंदु बनेगा, बल्कि यह भी रेखांकित करेगा कि “एक तस्वीर हजार शब्दों से अधिक प्रभावशाली हो सकती है” और लोकतांत्रिक समाज में पत्रकारिता के इस सशक्त माध्यम की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण बनी हुई है।
