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Udaipur News

ब्लड डोनेशन की तरह हो जल डोनेशन कैंप

पहले दो ब्लड फिर लो नशे से बने दूरी

मुख्य बिंदु
  • जिस तरह रोगी को ब्लड की जरूरत होती है उस समय परिजन पहले ब्लड देते हैं फिर उनको मिलता है ।
  • ब्लड में भी 90% पानी होता है ।
  • भूमि जल अब लगभग समाप्ति पर है ऐसे में भूमि भी जल मांग रही है और अब हम देंगे तो ही वह पुनः आपको दे सकेगी।
  • अतः अब" ब्लड डोनेशन कैंप" की तरह "जल डोनेशन कैंप" भी कॉलोनी कॉलोनी में लगाया जाए और और जिन भवनों में भूमि जल निकाला जा रहा है उन्हें पुनः डालने हेतु रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने हेतु बाध्य किया जाए क्योंकि अब अंदर और घर के बाहर पक्का करके वर्षा जल भूमि जल में जाने के सारे रास्ते बंद कर दिए गए हैं।
  • यह बात वरिष्ठ चिकित्सक एवं जल मित्र डॉ पी सी जैन आरएनटी मेडिकल कॉलेज में नव प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों के इंडक्शन प्रोग्राम में कही।
  • कार्यक्रम का प्रारंभ "जल आरती" "ओम जय जल देव हरे,पीड़ित जन संकट जल्दी दूर करें " और एक दूसरे को "जल प्रणाम" करने के बाद हुआ।
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ब्लड डोनेशन की तरह हो जल डोनेशन कैंप

जिस तरह रोगी को ब्लड की जरूरत होती है उस समय परिजन पहले ब्लड देते हैं फिर उनको मिलता है । ब्लड में भी 90% पानी होता है ।

भूमि जल अब लगभग समाप्ति पर है ऐसे में भूमि भी जल मांग रही है और अब हम देंगे तो ही वह पुनः आपको दे सकेगी।

अतः अब" ब्लड डोनेशन कैंप" की तरह "जल डोनेशन कैंप" भी कॉलोनी कॉलोनी में लगाया जाए और और जिन भवनों में भूमि जल निकाला जा रहा है उन्हें पुनः डालने हेतु रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने हेतु बाध्य किया जाए क्योंकि अब अंदर और घर के बाहर पक्का करके वर्षा जल भूमि जल में जाने के सारे रास्ते बंद कर दिए गए हैं।

यह बात वरिष्ठ चिकित्सक एवं जल मित्र डॉ पी सी जैन आरएनटी मेडिकल कॉलेज में नव प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों के इंडक्शन प्रोग्राम में कही।

कार्यक्रम का प्रारंभ "जल आरती" "ओम जय जल देव हरे,पीड़ित जन संकट जल्दी दूर करें " और एक दूसरे को "जल प्रणाम" करने के बाद हुआ। नगर अभी जल संकट से गुजर रहा है ऐसे में "रोज जल बचाना और वर्षा जल संरक्षण सिस्टम" लगाना अनिवार्य हो ।

" काश रिचार्ज कर लिया होता" नाटिका में नल का पानी जब खत्म हो जाता है तो दोनों बहने नहाने के लिए लड़ने लगती है और कोई भी हैंडपंप से पानी लाने को तैयार नहीं होता है।

तब सभी मिलकर कहते हैं अपने पापा से कि पापा अगर अपने अपना ट्यूबवेल रिचार्ज कर लिया होता आज यह स्थिति नहीं आती।अपनी पी पी टी में ,विश्व जल का निकला दिवाला, वर्ल्ड मेटियोरोलिजकल रिपोर्ट, विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 35% प्रतिशत जल प्रदूषित हो चुका है।

इसलिए हम सबको अभी से पानी के प्रति अपनी अपनी सोच बदलनी होगी।

अलग-अलग जल नारे बुलवाकर उपस्थित विद्यार्थियों को जल संरक्षण हेतु प्रेरित किया।

सत्र का अंत भोपाल कमिश्नर से सेवानिवृत आईएएस ऑफिसर श्री मोहन श्री एम मोहन राव द्वारा रचित जल गीत 'जल ही जीवन है "पर नव प्रवेश विद्यार्थियों ने "जल नृत्य" किया।

दूसरे सत्र में डॉक्टर पी सी जैन ने नशे से स्वयं बचें और दूसरों को कैसे बचाएं इस हेतु "सिक्स डी "के उपाय बताए। साथ ही उन्होंने नशे से बचने और बचाने के लिए और उपचार करने के लिए "एडिक्शन आर एक्स" एप सभी से डाउनलोड करवाया। "ड्रिंकिंग ड्राइविंग" की लघु नाटिका बताते हुए संदेश दिया कि नशे में वाहन चलाना कितना घातक हो सकता है यह इस नाटिका से स्पष्ट है।

देहदान की घोषणा- डॉक्टर पी सी जैन इसी मेडिकल कॉलेज से 1968 के बेच से डॉक्टर बने हैं। अपने अंतिम इच्छा व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि "मेरी" देह" भावी डॉक्टर बनने हेतु मैं समर्पित कर मेरा चिकित्सक ऋण भी चुका देना चाहता हूं।

अपनी नशे पर पीपीटी दिखाते हुए कहा कि कानूनी रूप से लड़के लड़की बराबर हैं परंतु नशे का प्रभाव लड़की पर लड़कों की तुलना में बहुत अधिक होता है तथा होने वाली संतति में मानसिक और शारीरिक विकार पैदा करता है।

"नशे के नजारे" नाटिका में अलग-अलग नशो के न मिलने पर क्या-क्या सिंपटम दिखते हैं उनका सजीव प्रदर्शन किया। अंत में ब्राउन शुगर, गांजा और शराब पीने वाले परिजन की मौत और रूदन करते परिजनों का दृश्य बताया।

डॉक्टर जैन ने स्वयं "आजा रे ये नशा, मुझको खाजा रे रो रो के घर के सारे " गीत सामूहिक रूप से गावाया।

प्रिंसिपल डॉक्टर राहुल जैन ने नशा मुक्ति पर समय-समय पर कार्यक्रम होते रहने की आवश्यकता बताइ।

परिचय डॉक्टर पल्लवी दुबे ने दिया। संयोजक समिति के डॉ पूजा धाभाई , डॉ पल्लवी दुबे, डॉ निराली सालगिया यह जल संरक्षण एवं नशा मुक्ति के इस कार्यक्रम को बहुत सराहा।

मनस्वी चावला ,यशांसी सिंघल ,निधि गुप्ता,निकिता मालधनी,माही सिंह, रोहित चौधरी ,अनुज,संकल्प मीणा मैं सभी कार्यक्रमों में अभिनय किया।

डॉ पी सी जैन ऐम बी बी ऐस