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Udaipur News

सम्यक्त्व का प्रकाश ही आत्मिक जीवन का सबसे बड़ा लक्ष्यःसाध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी

उदयपुर। वासुपूज्य मंदिर दादाबाड़ी में शुक्रवार को आयोजित नियमित व्याख्यान में साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी आदि ठाणा-6 ने श्रावक-श्राविकाओं को संबोधित करते हुए कहा कि जिन शासन अनादिकाल से चला आ रहा है।

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उदयपुर। वासुपूज्य मंदिर दादाबाड़ी में शुक्रवार को आयोजित नियमित व्याख्यान में साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी आदि ठाणा-6 ने श्रावक-श्राविकाओं को संबोधित करते हुए कहा कि जिन शासन अनादिकाल से चला आ रहा है।

इसका न कोई आरंभ है और न अंत। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर और भगवान पार्श्वनाथ के शासन में मूल तत्व समान हैं, केवल बाहरी स्वरूप में अंतर दिखाई दे सकता है।साध्वीश्री ने पंचव्रतों की व्याख्या करते हुए कहा कि धर्म में किसी प्रकार की दिखावटी छूट नहीं है।

जीवन का वास्तविक लक्ष्य हृदय में सम्यक्त्व का प्रकाश उत्पन्न करना है। मिथ्यात्व से मुक्त होकर सम्यक दृष्टि प्राप्त करना अत्यंत मूल्यवान है।

संयम के बिना जीव का निर्माण संभव हो सकता है, लेकिन सम्यक्त्व के बिना आध्यात्मिक प्रगति संभव नहीं है।उन्होंने कहा कि धन-संपत्ति स्वयं न अच्छी है, न बुरी।

उसका प्रभाव इस बात पर निर्भर करता है कि उसका उपयोग कौन और किस उद्देश्य से करता है। सदुपयोग करने वाला व्यक्ति संपत्ति के माध्यम से पुण्य अर्जित कर सकता है।

इस अवसर पर साध्वी प्रज्ञानजना श्रीजी, साध्वी नमन रुचि श्रीजी, साध्वी योगरुचि श्रीजी एवं साध्वी तन्मय रुचि श्रीजी ने भक्ति गीत प्रस्तुत किया।