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“जाते” के परिणाम
किराये के रिश्ते और सामाजिक संतुलन का संकट
क्या आधुनिकता के नाम पर हम अपनी सभ्यता की नींव खो रहे हैं?
इंद्र ने एकलिंगजी की तपस्या कर पाई थी ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्ति- जगद्गुरु श्री वसन्त विजयानन्द गिरी जी महाराज
– तीसरे प्रहर तक गूंजे कीर्तिदान गढ़वी के भक्ति सुर, झूम उठे श्रद्धालु – भगवान हनुमानजी के विभिन्न रूपों के दर्शन का अनुभव कर रोमांचित हुए हजारों श्रद्धालु
नए साल की धमाल, से दूर सनातन संस्कृति का कमाल
जगद्गुरु पूज्यपाद श्री वसन्त विजयानन्द गिरीजी महाराज ने नई पीढ़ी को दिया खास संदेश










