हमें दैनिक अग्निहोत्र-यज्ञ करके अपने घर की वायु को सुगन्धित व रोगरहित करना चाहिये
वैदिक धर्म एवं संस्कृति में यज्ञ का प्रमुख स्थान है। यज्ञ किसी भी पवित्र व श्रेष्ठ कार्य करने को कहा जाता है। मनुष्य जो शुभ कर्म करता है वह सब भी यज्ञीय कार्य …
“ऋषि” के परिणाम
वैदिक धर्म एवं संस्कृति में यज्ञ का प्रमुख स्थान है। यज्ञ किसी भी पवित्र व श्रेष्ठ कार्य करने को कहा जाता है। मनुष्य जो शुभ कर्म करता है वह सब भी यज्ञीय कार्य …
उदयपुर। नारायण सेवा संस्थान के अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल के सानिध्य में चल रही ‘अपनों से अपनी बात’ कथा में गणेश जी से जुड़े प्रेरक प्रसंगों के माध्यम से नियमित भ…
भारतीय संस्कृति विश्व की पहली और सम्पूर्ण संसार द्वारा वरण करने योग्य है, आदरणीय वंदनीय संस्कृति है। जो सारे संसार को अपना परिवार कुटुम्ब मानती है। भारतीय धर्म…
आज हम आर्यसमाज धामावाला, देहरादून के रविवारीय साप्ताहिक सत्संग में सम्मिलित हुए। आर्यसमाज में आज प्रातः 8.00 बजे से समाज की यज्ञशाला में आर्यसमाज के विद्वान पु…
उदयपुर। पाथेय कण संस्थान, विश्व संवाद केंद्र एवं रवींद्रनाथ टैगोर आयुर्विज्ञान महाविद्यालय, उदयपुर संयुक्त तत्वावधान में हस्तीमल व्याख्यानमाला के अंतर्गत ‘हम भ…
उदयपुर। गणेश चतुर्थी केवल भगवान गणेश की पूजा-अर्चना का पर्व नहीं, बल्कि जीवन में आने वाले विघ्नों पर धैर्य, विवेक और विश्वास से विजय पाने की प्रेरणा देने वाला …
उदयपुर। राजस्थान नायर सेवा समाज, उदयपुर द्वारा रविवार, 13 सितम्बर 2026 को अमृता भवन, सेक्टर-4 में ओणम उत्सव 2026 का भव्य आयोजन किया गया। समारोह में समाज के सदस…
श्री प्रेम प्रकाश शर्मा जी देहरादून में आर्यसमाज के प्रमुख स्तम्भ हैं। वह जन्म से आर्यसमाज से जुड़े रहे हैं। उन्होंने अपने जीवन में अनेक आर्यसमाजों का सुधार व उ…
एरा ऑफ़ लाइट फिल्म्स, रंगनील क्रिएशंस, कम्यूटाडोर जंकीज़ प्रोडक्शंस और पजाक पिक्चर्स फिल्मप्रोडक्शन के बैनर तले नील कोठारी, गौरव ऋषिकेश ठाकुर और डेनियल ई. पजाक…
उदयपुर। नारायण सेवा संस्थान के अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल ने ‘अपनों से अपनी बात’ के दूसरे दिन कथा के दौरान एकादशी के आध्यात्मिक महत्व से जुड़े विभिन्न प्रसंगों के…
उत्तर पश्चिम रेलवे द्वारा अजमेर मण्डल के अजमेर-चंदेरिया रेलखण्ड पर झड़वासा-बान्दनवाडा व सिंगावल स्टेशनों के मध्य दोहरीकरण कार्य के अंतर्गत नॉन इण्टरलॉकिंग ब्लॉक…
ऋषि दयानन्द के आगमन से पूर्व विश्व में लोगों को वेदों तथा ईश्वर सहित आत्मा एवं प्रकृति के सत्यस्वरूप का स्पष्ट ज्ञान विदित नहीं था। वेदों, उपनिषद एवं दर्शन आदि…