गत एक माह में महिलाओं को मशरूम की खेती, वर्मी कंपोस्ट, बकरी पालन व मुर्गी पालन पर पूर्णतया प्रायोगिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। परियोजना प्रभारी डॉ. विशाखा बंसल ने बताया कि वर्ष 2025 से 2027 तक झाड़ोल व फलासिया की 150 महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों में संगठित कर रोजगार प्रशिक्षण देकर स्वरोजगार स्थापित करने में सहायता की जाएगी। अब तक 10 स्वयं सहायता समूहों का गठन कर उन्हें बैंकों से जोड़ा गया एवं प्राथमिक प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है।
वर्ष 2026 में निरंतर फॉलोअप प्रशिक्षण एवं तकनीकी मार्गदर्शन के माध्यम से महिलाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया जाएगा। साथ ही, उन्हें प्रोत्साहन स्वरूप 20 यूनिट प्रतापधन मुर्गी के चूजे, 3 सिरोही नस्ल के बकरे, 30 यूनिट मशरूम उत्पादन एवं 30 यूनिट वर्मी कंपोस्ट प्रदान किए जाएंगे।
राजस्थान की बांधनी कला के बढ़ते आकर्षण को देखते हुए 24-25 मार्च को अनुसंधान निदेशालय में दो दिवसीय प्रायोगिक प्रशिक्षण आयोजित किया गया, जिसे सीसीआरटी द्वारा मान्यता प्राप्त ख्याति प्राप्त प्रशिक्षकों श्री याकूब मोहम्मद मुल्तानी एवं श्रीमती अंजुम आरा द्वारा प्रदान किया गया। इसमें झाड़ोल की 30 महिला सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में श्री कार्तिक सालवी, प्रमोद कुमार, डॉ. वंदना जोशी, डॉ. कुसुम शर्मा एवं अनुष्का तिवारी का विशेष सहयोग रहा।