उदयपुर, पेसिफिक मेडिकल कॉलेज एण्ड हॉस्पिटल में विश्व गुर्दा दिवस 13 मार्च के अवसर पर एक वर्कशॉप का आज आयोजन किया गया। लोगों को किडनी की बीमारी के प्रति जागरूक करने के उद्धेश से गुर्दा रोग विभाग और मूत्र रोग विभाग एवं पेसिफिक कॉलेज ऑफ फिजियोथैरेपी की ओर से आयोजित इस वर्कशॉप का उद्घाटन पेसिफिक मेडिकल विश्वविधालय के वाइस चॉसलर डॉ.एम.एम.मंगल,पीएमसीएच के प्रिसिंपल डॉ.यू.एस.परिहार,हॉस्पिटल अद्यीक्षक डॉ.सुनीता माहेश्वरी,गुर्दारोग विशेषज्ञ डॉ.मोहित नारेडी,मूत्र रोग विशेषज्ञ डॉ.हनुवन्त सिंह राठौड़,डॉ.क्षितित रॉका एवं डॉ.जफर खान ने मॉ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन करके किया।
इस अवसर पर गुर्दारोग विशेषज्ञ डॉ.मोहित नारेडी ने कहा कि पिछले कुछ सालों से किडनी के मरीजों की संख्या में इजाफा होता जा रहा है। लोगों को किडनी की बीमारी के प्रति जागरूक करने के लिए हर साल विश्व किडनी दिवस मनाया जाता है। इस बार इसकी थीम ‘स्वस्थ किडनी के लिए प्रारंभिक पहचान को प्राथमिकता देना’ रखी गई है. जिसका मतलब है कि किडनी की समस्याओं को अधिक गंभीर समस्याओं में विकसित होने से पहले ही उसकी पहचान करने पर जोर देना है। डॉ.मोहित का कहना है कि समय पर निदान,उचित इलाज और सही देखभाल से किडनी रोगों के गंभीर प्रभावों को रोका जा सकता है। डॉ.नारेडी का कहना है कि किडनी मरीजों की देखभाल में नियमित जांच, सही दवाइयों का सेवन और खानपान का विशेष ध्यान रखना बेहद जरूरी है। खासतौर पर डायलिसिस और किडनी ट्रांसप्लांट कराने वाले मरीजों को विशेष देखभाल की जरूरत होती है।
इस दौरान मूत्र रोग विशेषज्ञ डॉ.हनुवंत सिंह राठौड़ ने यूरोलॉजिकल समस्याओं और किडनी रोगों को लेकर जागरूकता फैलाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि समय पर निदान और सही उपचार से इन बीमारियों को नियंत्रित किया जा सकता है।
डॉ.राठौड़ ने कहा कि कई यूरोलॉजिकल समस्याएं किडनी को प्रभावित कर सकती हैं। यदि इनका समय पर इलाज न किया जाए, तो ये गंभीर किडनी रोगों में बदल सकती हैं। उन्होंने बताया कि यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन,पथरी,प्रोस्टेट समस्याएं और मूत्र अवरोध जैसी बीमारियां अगर अनदेखी की जाएं, तो ये किडनी फेल्योर का कारण बन सकती हैं।
वर्कशॉप के इस अवसर पर विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा डायलिसिस में आम समस्याएं,गुर्दे की बीमारी में पुनर्वास,सी.के.डी. में विशिष्ट श्वास व्यायाम की भूमिका पर अपना सम्बोधन दिया। इस दौरान गुर्दे की बीमारियों में न्यूरो-मस्कुलर समस्याओं की भूमिका और किडनी रोग में कार्डियो-पल्म-मेटाबोलिक स्वास्थ्य पर पैनल डिस्कशन किया गया।
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