उदयपुर में भाषा और संस्कृति महोत्सव का आयोजन

( 1129 बार पढ़ी गयी)
Published on : 28 Feb, 25 08:02

डॉ. आरती जैन, सहायक प्रोफेसर, अंग्रेज़ी विभाग

उदयपुर में भाषा और संस्कृति महोत्सव का आयोजन

भाषा और संस्कृति महोत्सव 2025 के अंतर्गत माणिक्यलाल वर्मा श्रमजीवी कॉलेज, जनार्दनराय नागर राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय, उदयपुर के अंग्रेज़ी विभाग द्वारा 13 फरवरी 2025 को अंजुमन तरक्की एसोसिएशन के सहयोग से टैगोर स्टेज के तहत एक रचनात्मक सत्र आयोजित किया गया।

मुख्य वक्ता, डॉ. अपर्णा शर्मा, प्रोफेसर, अंग्रेज़ी विभाग, भूपाल नोबल्स विश्वविद्यालय, उदयपुर, ने "हमारे जीवन में प्रेम और ज्ञान" विषय पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने अंग्रेज़ी साहित्य के प्रसिद्ध ग्रंथों के उदाहरण देकर प्रेम और ज्ञान के आपसी संबंध को स्पष्ट किया। लेखक संवाद सत्र में, उदयपुर की युवा कवयित्री अनुभूति जैन ने बताया कि कैसे सार्वभौमिक प्रेम ने उन्हें कविता लिखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने अपनी कुछ कविताओं का पाठ भी किया। सत्र की अध्यक्षता प्रो. रेखा तिवारी, टेक्नो एनजेआर इंजीनियरिंग कॉलेज, उदयपुर, ने की और कविता-पाठ, कहानी कहने की कला, तथा आधुनिक युग में प्रेम और ज्ञान के मानवीय पक्षों पर अपने विचार प्रस्तुत किए।

"रचनात्मक नवांकुर: काव्य पाठ एवं कहानी लेखन" विषय पर आयोजित तकनीकी सत्र में विभिन्न छात्र-छात्राओं और प्रतिभागियों ने अपनी कविताएँ एवं कहानियाँ प्रस्तुत कीं। रचनात्मक लेखकों में नमन दक्षेश, भावना प्रिय शर्मा, नवधा जय कुमार, नताशा पनेरी, परीलक्षित खंडेलवाल, स्वाति जैन, त्वीषा तिवारी, अनुभूति जैन, और डॉ. रिंकू हीरान शामिल रहे। इस सत्र की अध्यक्षता डॉ. शारदा वी. भट्ट, पूर्व एसोसिएट प्रोफेसर, अंग्रेज़ी विभाग, एम.वी. श्रमजीवी कॉलेज, ने की, जबकि प्रो. अपर्णा शर्मा मुख्य अतिथि रहीं। कार्यक्रम का संचालन डॉ. आरती जैन ने किया और अंत में आभार व्यक्त किया। डॉ. चित्रा दशोरा ने मंच संचालन किया और डॉ. रिंकू हीरान ने प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।

14 फरवरी 2025 को, अंग्रेज़ी विभाग द्वारा श्री भंवर लाल गुर्जर, कुलाधिपति, एवं कर्नल प्रो. शिव सिंह सारंगदेवोत, कुलपति, जनार्दनराय नागर राजस्थान विद्यापीठ डीम्ड टू बी विश्वविद्यालय, उदयपुर के संरक्षण में एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई।

संगोष्ठी की शुरुआत डॉ. शारदा वी. भट्ट के उद्घाटन भाषण से हुई, जिसमें उन्होंने "अंग्रेज़ी साहित्य में प्रेम और आध्यात्मिकता के प्रतिबिंब" विषय पर प्रकाश डाला। मुख्य वक्ता, डॉ. ज्योति त्रिपाठी, सहायक प्रोफेसर, अंग्रेज़ी विभाग, ने पावरपॉइंट प्रस्तुति के माध्यम से प्रेम और आध्यात्मिकता के विभिन्न स्वरूपों तथा उनके साहित्यिक अभिव्यक्तियों पर विस्तृत चर्चा की। डॉ. दिग्विजय पंड्या, प्रोफेसर एवं डीन, परुल इंस्टीट्यूट ऑफ लिबरल आर्ट्स, वडोदरा, गुजरात, ने प्रेम के वास्तविक अर्थ और आधुनिक युवाओं के जीवन में उसकी महत्ता को स्पष्ट किया।

मुख्य अतिथि, डॉ. परितोष चंद्र दुगर, पूर्व प्रोफेसर, अंग्रेज़ी विभाग, एवं राजस्थान के एक सरकारी स्नातकोत्तर कॉलेज के पूर्व प्राचार्य, ने संगोष्ठी के विषय और प्रस्तुत शोधपत्रों पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने बताया कि प्रेम और आध्यात्मिकता का सर्वोत्तम मिश्रण विश्वभर के संत-कवियों की कविताओं में देखने को मिलता है। उन्होंने जयदेव, मीराबाई, अक्का महादेवी, लाल देद और अंडाल जैसे संत कवियों का उल्लेख किया, जिनकी कविताएँ अब अंग्रेज़ी में अनूदित होकर विश्व साहित्य का हिस्सा बन चुकी हैं।

सत्र की अध्यक्षता डॉ. मोनिका आनंद, प्रोफेसर, अंग्रेज़ी विभाग एवं डिप्टी डीन, सर पदमपत सिंघानिया विश्वविद्यालय, उदयपुर, ने की। उन्होंने प्रेम और आध्यात्मिकता के साहित्य में चित्रण पर चर्चा करते हुए युवा शोधकर्ताओं के लिए प्रस्तुत शोधपत्रों का संक्षिप्त विश्लेषण भी किया।

समापन समारोह में प्रो. मलय पनेरी, डीन, सामाजिक विज्ञान और मानविकी संकाय, एमवीएससी, जनार्दनराय नागर राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय, तथा डॉ. हेमेंद्र चौधरी, अकादमिक निदेशक, सामाजिक विज्ञान और मानविकी संकाय, एमवीएससी, की गरिमामयी उपस्थिति रही। इस अवसर पर डॉ. चित्रा दशोरा और डॉ. ज्ञानेश्वरी राठौड़ ने मंच संचालन किया।


साभार :


© CopyRight Pressnote.in | A Avid Web Solutions Venture.