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पारस हेल्थ उदयपुर ने एडवांस्ड कीहोल सर्जरी करके कई ब्रेन ट्यूमर निकाले

36 साल की लंग कैंसर की मरीज़ का इलाज मिनिमली इनवेसिव न्यूरोनेविगेशन-गाइडेड सर्जरी से किया गया। इस केस में कैंसर फेफड़े से लेकर मस्तिष्क तक फैल गया था। 

36 साल की लंग कैंसर की मरीज़ का इलाज मिनिमली इनवेसिव न्यूरोनेविगेशन-गाइडेड सर्जरी से किया गया। इस केस में कैंसर फेफड़े से लेकर मस्तिष्क तक फैल गया था।

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पारस हेल्थ उदयपुर ने एडवांस्ड कीहोल सर्जरी करके कई ब्रेन ट्यूमर निकाले

उदयपुर : पारस हेल्थ उदयपुर ने एक 36 साल की महिला की न्यूरोनेविगेशन-गाइडेड कीहोल सर्जरी सफलतापूर्वक की है। इस 36 वर्षीय महिला को लंग कार्सिनोमा की वजह से मस्तिष्क (ब्रेन) में कई मेटास्टेसिस होने का पता चला था।

यह एक ऐसी कैंसर बीमारी है जिसमें कैंसर फेफड़े (लंग) से मस्तिष्क (ब्रेन) तक फैल जाता है। इस जटिल लेकिन मिनिमली इनवेसिव प्रक्रिया को पारस हेल्थ उदयपुर के सीनियर न्यूरोसर्जन डॉ. अजीत सिंह ने एडवांस्ड हाई-प्रिसिजन न्यूरोनेविगेशन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके किया।

सर्जरी के बाद मरीज़ अब ठीक हो रही है। महिला लंग कार्सिनोमा के लिए कीमोथेरेपी करवा रही थी और उसकी हालत स्थिर (स्टेबल) थी, लेकिन उसे लगातार सिरदर्द, बार-बार उल्टी और धीरे-धीरे उसमें उनींदापन (नींद लगना) ज्यादा रहने लगा।

MRI ब्रेन और PET स्कैन जांच से पता चला कि ब्रेन के अलग-अलग हिस्सों में कई ब्रेन मेटास्टेसिस थे। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें अक्सर सर्जरी करने में बहुत खतरा रहता है और बीमारी के लक्षणों को लेकर सावधानी बरतनी होती है।

कई ब्रेन मेटास्टेसिस के लिए आम तौर पर अलग-अलग ब्रेन क्वाड्रंट में कई बड़ी क्रेनियोटॉमी की ज़रूरत होती है या जटिलताओं, लंबे समय तक हॉस्पिटल में रहने और ऑपरेशन के बाद न्यूरोलॉजिकल समस्याओं के ज़्यादा खतरे की वजह से उन्हें सावधानी से मैनेज किया जाता है।

इस केस में सर्जिकल टीम ने मिनिमली इनवेसिव, न्यूरोनेविगेशन-गाइडेड तरीका चुना।

हाई-प्रिसिजन न्यूरोनेविगेशन सिस्टम और बहुत सावधानी से प्रीऑपरेटिव मैपिंग का इस्तेमाल करके, सर्जन सोच-समझकर की गई छोटी क्रेनियोटॉमी के ज़रिए बड़े मेटास्टैटिक घावों को पता कर पाए और वहां तक पहुंच पाए, जिससे आस-पास के स्वस्थ ब्रेन टिशू को कम से कम नुकसान हुआ।

प्रक्रिया के बारे में समझाते हुए डॉ. अजीत सिंह ने कहा, “न्यूरोनेविगेशन और माइक्रो सर्जिकल तकनीक में नए-नए अविष्कार होने से जटिल मामलों में भी जिसमें कि कई सारे मेटास्टेसिस होते हैं, उनको भी बहुत ही सुरक्षा और सटीकता के साथ ठीक किया जा सकता है।

सावधानी से योजना बनाने, तकनीक का उपयोग करने और कई तरह के काम करने के तरीके ने ऐसी बीमारियों को, जिन्हें कभी जानलेवा माना जाता था, अब इलाज़ योग्य बीमारियों में बदल दिया है।

इससे मरीज़ों को इलाज के अच्छे विकल्प मिले हैं और ज़िंदगी की गुणवत्ता बेहतर हुई है। सर्जरी बहुत ही सही तरीके से हुई।

इसमें बहुत ही कम खून बहा और कोई भी कॉम्प्लिकेशंस ऑपरेशन के दौरान नहीं हुआ। इसके अलावा सर्जिकल कैविटी के अंदर एक फाइबर रिज़र्वॉयर रखा गया ताकि भविष्य में ज़रूरत पड़ने पर एनालॉगेड इंटरथेकल थेरेपी को आसान बनाया जा सके।

मरीज़ में ऑपरेशन के बाद के समय में न्यूरोलॉजिकल सुधार काफ़ी दिखा और उसे उसके निश्चित ऑनकोलॉजिकल मैनेजमेंट के तहत पूरे दिमाग की रेडियोथेरेपी की सलाह दी गई है।

डॉ. सिंह ने कहा, “ब्रेन में कई मेटास्टेसिस होने से इसके इलाज के लिए केस का चयन और न्यूरोसर्जरी, ऑन्कोलॉजी और रेडियोलॉजी टीमों के बीच अच्छे तालमेल की ज़रूरत होती है।

चुने हुए मरीज़ जो सिस्टमिक रूप से स्थिर रहते हैं, उनमें एग्रेसिव लेकिन मिनिमली इनवेसिव सर्जिकल इंटरवेंशन से न्यूरोलॉजिकल लक्षणों में काफ़ी सुधार हो सकता है और सिस्टमिक कैंसर थेरेपी जारी रखने में मदद मिल सकती है।

यह केस जटिल मेटास्टैटिक ब्रेन बीमारी को मैनेज करने में एडवांस्ड न्यूरोनेविगेशन-असिस्टेड न्यूरोसर्जरी की बढ़ती भूमिका पर ज़ोर देता है और इलाज़ के परिणामों को बेहतर बनाने में इंटीग्रेटेड और मल्टीडिसिप्लिनरी कैंसर देखभाल के महत्व को दिखाता है।