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केंद्रीय जनजाति कार्य राज्यमंत्री श्री दुर्गादास उइके का उदयपुर दौरा

‘अतीत के गौरवशाली इतिहास को समझने की आवश्यकता, सामाजिक समरसता को आघात कर रही नकारात्मक शक्तियों को हमें देना होगा जवाब’ केंद्रीय मंत्री श्री उइके

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केंद्रीय जनजाति कार्य राज्यमंत्री श्री दुर्गादास उइके का उदयपुर दौरा

उदयपुर। भारत सरकार के जनजाति कार्य राज्य मंत्री श्री दुर्गा दास उइके ने उदयपुर दौरे के दूसरे दिन रविवार को सुखाड़िया विश्वविद्यालय के बप्पा रावल सभागार में आदिम जाति शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान (टीआरआई) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित संभाग स्तरीय जनजाति युवा कार्यशाला में शिरकत की। ‘विश्वास, विकास एवं जनजाति कल्याण के 12 वर्ष’ विषयक संगोष्ठी में बतौर मुख्य वक्ता संबोधित करते हुए श्री उइके ने कहा कि हमें अतीत के गौरवशाली इतिहास को समझने की आवश्यकता है। जनजाति समाज की जड़े ऋग वैदिक काल से जुड़ी हुई है। समस्त ऋषि वन में ही रहते थे और वनों में ही ग्रंथ लिखे गए। उन्होंने कहा कि हमें वर्तमान परिदृश्य का चिंतन करना है और सही और गलत को पहचानने की जरूरत है। भावना शक्ति जनजाति समाज का प्राण है। उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता को आघात कर रही नकारात्मक शक्तियों को माकूल जवाब देना होगा।

पीएम मोदी के नेतृत्व में देश कर रहा निरंतर प्रगति
श्री उइके ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश निरंतर प्रगति कर रहा है। आज हम हर साल 15 नवंबर को जनजाति गौरव दिवस के रूप में अपने इतिहास को याद करते हैं। ईएमआरएस, पीएम श्री विद्यालय जनजाति अंचलो में शिक्षा में आए आमूलचूल परिवर्तन के सशक्त उदाहरण है। संसदीय संकुल परियोजना के माध्यम से पलायन वाले क्षेत्रों हेतु ठोस परियोजनाएं बनाई गई है। पीएम मोदी द्वारा जनजाति क्षेत्रों में बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के उद्देश्य से धरती आबा योजना के जरिए 80 हजार करोड़ की धनराशि आवंटित की गई है। पीएम जनमन योजना हेतु 24 हजार करोड आवंटित किए जा चुके हैं।

‘परंपराओं को सहेजना और उन्हें भावी पीढ़ियों को सौंपना हमारा विचार’ टीएडी मंत्री श्री खराड़ी
संगोष्ठी में प्रदेश सरकार के जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग मंत्री श्री बाबूलाल खराड़ी ने संबोधित करते हुए कहा कि देश की परंपरा अतिथि देवो भवः की रही है। परंपराओं को सहेजना और उन्हें भावी पीढ़ियों को सौंपना यह हमारा विचार है। हमारी संस्कृति ने सभी अन्य संस्कृतियों को स्वीकारा और पनाह दी और समायोजन हुआ। मंत्री श्री खराड़ी ने कहा कि अनेक प्रयासों के पश्चात भी सनातन कभी समाप्त नहीं हो पाया। देश में अभिव्यक्ति की आजादी का दुरूपयोग हुआ। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार आदिवासी विरासत को संजोने की दिशा में तेजी से कार्य कर रही है इस संबंध में शीघ्र ही डॉक्यूमेंट्री तैयार हो जाएगी। अनुसूचित जनजाति वर्ग के अभ्यर्थियों को प्रशासनिक सेवाओं की तैयारी हेतु जयपुर अथवा दिल्ली में कोचिंग शुरु करने के प्रयास भी जारी है।
लोकसभा सांसद डॉ मन्नालाल रावत कहा की विगत के दशक में राष्ट्र ने उल्लेखनीय प्रगति की है। नॉर्थ-ईस्ट में उग्रवाद खत्म हुआ। जनजाति अस्मिता और नायकों को आगे लाने का कार्य विगत के दशक में हुआ। वफ्फ संशोधन अधिनियम, धरती आबा योजना, पीएम जन मन योजना समेत कई सौगातें महत्वपूर्ण उपलब्धियां है। डॉ रावत ने कहा की विरासत के बगैर आदिवासियों का विकास नहीं हो सकता है। कुछ कतिपय इकोसिस्टम क्षेत्र में सक्रिय है जो देश की प्रगति में बाधक है। कार्यक्रम में टीआरआई निदेशक ओपी जैन सहित गणमान्य अतिथि, प्रबुद्धजन एवं बड़ी संख्या में युवा मौजूद रहे।

संगोष्ठी के पश्चात केंद्रीय मंत्री श्री उइके अशोक नगर स्थित टीआरआई सभागार पहुंचे जहां उन्होंने प्रदेश के जनजातीय सामाजिक संगठनों की बैठक में संगठनों के प्रतिनिधियों के फीडबैक और सुझाव लिए। श्री उइके ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की मंशा है कि विरासत का संवर्धन भी हो और विकास भी हो। ग्राउंड जीरो से सुझावों के आधार पर नीतियां बनाई जाएगी। उन्होंने कहा कि कभी भारतवर्ष आर्यावर्त के रूप में दुनिया का बड़ा देश था। विदेशी आक्रांताओं ने देश की संस्कृति को नुकसान पंहुचाने का प्रयास किया। वर्तमान पीढ़ी की जिम्मेदारी है की भावी पीढ़ियों को देश की विरासत से रूबरू करवाएं इसलिए वर्तमान में चिंतन और मनन करने की आवश्यकता है।

बैठक में हाल ही पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित जोधपुर निवासी तगाराम भील ने सुझाव देते हुए बालिका शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई। वहीं पूर्व आईजी और गोविंद गुरु जनजाति विश्वविद्यालय के पूर्व कुलगुरु टीसी डामोर ने मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्तर का स्मारक घोषित करने और उसे संरक्षित करने की बात कही। इसके अलावा चिकित्सा, शिक्षा समेत विभिन्न विषयों पर संगठनों के पदाधिकारियों ने अपने सुझाव दिए। इससे पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री उइके ने टीआरआई परिसर में एक पेड़ माँ के नाम एवं हरियालो राजस्थान अभियान के तहत पौधरोपण भी किया। इस दौरान टीएडी मंत्री बाबूलाल खराड़ी, सांसद डॉ मन्नालाल रावत, सागवाडा विधायक शंकरलाल डेचा, टीआरआई निदेशक ओपी जैन सहित विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।