उदयपुर। सी थ्री संस्था द्वारा शक्ति मंच टूवर्ड ए फियरलेस फ्यूचर परियोजना के अंतर्गत उदयपुर में जीआरसी (जेंडर रिसोर्स सेंटर) कैडर हेतु अभिमुखीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया।
इसमें उदयपुर, डूंगरपुर एवं प्रतापगढ़ जिलों के जीआरसी कैडर ने भाग लिया।प्रशिक्षण समन्वयक कल्पना ने कार्यशाला का उद्देश्य जीआरसी कैडर को जेंडर रिसोर्स सेंटर की कार्यप्रणाली, उद्देश्यों एवं जिम्मेदारियों से अवगत कराना तथा समुदाय स्तर पर महिलाओं को आवश्यक सहायता सेवाओं से जोड़ने की प्रक्रिया को मजबूत करना था।
इस दौरान महिलाओं को बताया गया कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत जीआरसी की अवधारणा क्यों शुरू की गई तथा ग्रामीण महिलाओं को हिंसा से सुरक्षा, कानूनी सहायता एवं सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने में क्या भूमिका है।कार्यशाला में समुदाय से सामने आने वाली महिलाओं के साथ हिंसा से संबंधित मामलों की पहचान, पंजीकरण, दस्तावेजीकरण एवं समाधान की प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की गई।
साथ ही, मामलों की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए महिलाओं की गोपनीयता बनाए रखने तथा उन्हें सुरक्षित वातावरण में सहायता प्रदान करने पर जोर दिया गया।
प्रतिभागियों को बताया गया कि जरूरतमंद महिलाओं को निःशुल्क कानूनी सहायता सेवाओं, संबंधित विभागों एवं कौशल प्रशिक्षण केंद्रों से कैसे जोड़ा जा सकता है, ताकि वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होने के साथ आत्मनिर्भर भी बन सकें।
महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रतिभागियों को राजकॉप सिटीजन एप के उपयोग की जानकारी सी 3 के नारायण सेन द्वारा भी दी गई।
इसके माध्यम से महिलाओं को उपलब्ध सुरक्षा सेवाओं के बारे में बताया गया समुदाय में इस ऐप के उपयोग को बढ़ावा देने पर चर्चा राजविका डीएमआईबी मेघा द्वारा की गई।
कार्यशाला के दौरान नैंसी ने राजसमंद, कोटा, अलवर एवं दौसा जिलों में पिछले एक वर्ष से संचालित जीआरसी के कार्यों, प्रगति एवं उपलब्धियों को साझा किया।
उन्होंने इन जिलों में किए जा रहे प्रयासों और अनुभवों के माध्यम से जीआरसी की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने तथा अधिक से अधिक जरूरतमंद महिलाओं तक सहायता पहुंचाने के महत्व पर प्रकाश डाला।राजीविका की जिला परियोजना प्रबंधक प्रशिक्षु आईएएस मणिमाला एन ने भी अभिमुखीकरण में सहभागिता करते हुए जीआरसी की भूमिका एवं कार्यों से संबंधित चर्चा में भाग लिया।
वहीं, स्टेट प्रोग्राम मैनेजर सी3 अक्षय ने जीआरसी डैशबोर्ड की जानकारी साझा की।
उन्होंने बताया कि डैशबोर्ड के माध्यम से दर्ज किए गए मामलों का विवरण एवं संबंधित आंकड़े देखे जा सकते हैं, जिससे मामलों की निगरानी, प्रगति की समीक्षा और कार्यों के दस्तावेजीकरण में सहायता मिलती है।
कार्यशाला के माध्यम से जीआरसी कैडर की क्षमता विकसित करने, महिलाओं के साथ हिंसा से संबंधित मामलों में संवेदनशीलता एवं गोपनीयता के साथ कार्य करने तथा महिलाओं को कानूनी सहायता, सुरक्षा सेवाओं एवं आजीविका के अवसरों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की गई।
अंत में सी3 नई दिल्ली से आई शोभा ने सभी का धन्यवाद किया।
