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सद्विचार और शुभ भावना से ही मानव जीवन बनता है सार्थक

उदयपुर। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ, उदयपुर के तत्वावधान में आयोजित धर्मसभा में प्रवचन करते हुए डॉ सुरेन्द्र मुनि ने कहा कि

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सद्विचार और शुभ भावना से ही मानव जीवन बनता है सार्थक

उदयपुर। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ, उदयपुर के तत्वावधान में आयोजित धर्मसभा में प्रवचन करते हुए डॉ सुरेन्द्र मुनि ने कहा कि मानव जीवन की सबसे बड़ी विशेषता उसकी विचार शक्ति है।

मनुष्य जैसा चिंतन करता है, उसी के अनुरूप उसके जीवन का निर्माण होता है। इसलिए विचारों में शुद्धता, सकारात्मकता और विवेक का होना अत्यंत आवश्यक है।उन्होंने कहा कि मानव मन दर्पण के समान है।

जिस प्रकार दर्पण के सामने जो वस्तु आती है, उसका प्रतिबिंब उसमें दिखाई देता है, उसी प्रकार मन में जैसे विचार रखे जाते हैं, उनका प्रभाव व्यक्ति के आचरण और व्यवहार में दिखाई देता है।

परिस्थितियां चाहे जैसी हों, व्यक्ति अपने विचारों और दृष्टिकोण के माध्यम से उन्हें सकारात्मक दिशा दे सकता है।प्रवचन में कहा गया कि मनुष्य के जीवन में अनेक प्रकार की परिस्थितियां आती रहती हैं।

सुख-दुःख, लाभ-हानि और अनुकूल-प्रतिकूल परिस्थितियों के बीच व्यक्ति का वास्तविक परीक्षण उसके विचारों और संयम से होता है।

यदि मन में शुभ भावना, विवेक और आत्मचिंतन बना रहे तो कठिन परिस्थितियां भी जीवन को नई दिशा देने का माध्यम बन सकती हैं।उन्होंने कहा कि हमें प्रतिदिन अपने मन में शुभ विचारों का संचार करना चाहिए।

दूसरों के प्रति सद्भावना, करुणा और प्रेम का भाव रखना ही सच्चे धर्म का आधार है। मनुष्य की सबसे बड़ी संपत्ति उसका धन नहीं, बल्कि उसकी शुद्ध भावना और सद्विचार हैं।

शुभ भावनाएं व्यक्ति को आत्मकल्याण और मोक्ष के मार्ग की ओर ले जाती हैं।धर्मसभा में उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं से प्रवर्तक सो. राजेंद मुनि ने आह्वान किया कि वे अपने जीवन में सकारात्मक चिंतन, संयम और सद्भावना को अपनाएं तथा अपने आचरण से परिवार और समाज में भी अच्छे संस्कारों का प्रसार करें।