उदयपुर। मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के सामाजिक विज्ञान संकाय के इतिहास विभाग की शोधार्थी अनामिका बारहठ को ’राजस्थान में चारण भक्ति परंपरा का ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक अध्ययन (15वीं से 20वीं शताब्दी तक)’ विषय पर पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई।
उन्होंने अपना शोध कार्य विभागाध्यक्ष, इतिहास विभाग और अध्यक्ष, सामाजिक विज्ञान संकाय प्रो. (डॉ.) दिग्विजय भटनागर के निर्देशन में पूर्ण किया।अनामिका बारहठ, पुत्री विक्रम सिंह बारहठ, ने अपने शोध में राजस्थान की चारण भक्ति परंपरा के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक स्वरूप का विस्तृत अध्ययन किया।
शोध में 15वीं से 20वीं शताब्दी तक चारण भक्ति परंपरा के विकास, राजस्थान की साहित्यिक विरासत तथा धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन में इसके योगदान को रेखांकित किया गया है।
चारण परंपरा राजस्थान के इतिहास, साहित्य, लोकसंस्कृति और भक्ति साहित्य की महत्वपूर्ण धरोहर रही है।
अनामिका बारहठ का यह शोध राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण अकादमिक प्रयास है।इस शोध कार्य में शोध निर्देशक प्रो. (डॉ.) दिग्विजय भटनागर के मार्गदर्शन के साथ विश्वविद्यालय के शिक्षकों, विद्वानों एवं साहित्यकारों का महत्वपूर्ण सहयोग रहा।
प्रो. प्रतिभा पांडे, डॉ. पीयूष भादविया, डॉ. मनीष श्रीमाली, डॉ. गिरधर दान रत्नू दासोड़ी, डॉ. गजादान चारण , चारण साहित्य सृजन अंतराष्ट्रीय समूह के अध्यक्ष मोहन सिंह रतनू, डॉ. सुयशवर्धन सिंह दधिवाड़िया, भंवर सिंह चारण (आईएएस) अध्यक्ष चारण साहित्य शोध संस्थान, अजमेर एवं डॉ. प्रदीप पानेरी सहित अनेक विद्वानों के मार्गदर्शन, सुझावों एवं प्रेरणा से शोध कार्य को पूर्णता मिली।अनामिका बारहठ ने अपनी इस उपलब्धि में परिवार के योगदान को भी महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने अपने पिता विक्रम सिंह बारहठ, माता जनक कुंवर, देवी सिंह चारण एवं सोहन कुंवर सहित परिवार के अन्य सदस्यों तथा जीवनसाथी डॉ. नरेंद्र सिंह देवल के सहयोग, स्नेह और प्रोत्साहन के प्रति आभार व्यक्त किया।
साथ ही डॉ. सुरेंद्र सिंह देवल, डॉ. अनुराग बारहठ, नविका, अथर्वा तथा शोध कार्य में सहयोग देने वाले शिक्षकों, मित्रों और शोधार्थियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।
