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Udaipur News

जल संरक्षण हेतु स्वयंसेवकों की बैठक

राजस्थान विद्यापीठ के मास्टर्स ऑफ सोशल वर्क के चिन्हित छात्र-छात्राओं तथा जलदूत एवं नशा दूत समूह से जुड़े स्वयंसेवकों एवं विद्यार्थियों

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जल संरक्षण हेतु स्वयंसेवकों की बैठक

राजस्थान विद्यापीठ के मास्टर्स ऑफ सोशल वर्क के चिन्हित छात्र-छात्राओं तथा *जलदूत एवं नशा दूत* समूह से जुड़े स्वयंसेवकों एवं विद्यार्थियों की बैठक उदयपुर स्कूल ऑफ़ सोशल वर्क के सभागार में डॉ.अवनीश नागर डीन की अध्यक्षता में हुई, जिसमें उदयपुर नगर के वाटर हीरो डॉक्टर पी सी जैन ने अपने प्रभावी प्रेजेंटेशन द्वारा जल संरक्षण हेतु सुझाव दिए।

कार्यक्रम का शुभारम्भ अथितियों के स्वागत एवं माल्यार्पण से हुआ जिसमे महाविद्यालय के आचार्य डॉ. लाला राम जाट,डॉ.अनुकृति राव एवं डॉ.प्रिंस पायस उपस्थित थे.इस वर्ष राज्य एवं शहर में अल्प वर्षा होने के कारण नगर को भीषण जल संकट का सामना करना पड़ सकता है।

उससे बचने एवं जल संरक्षण हेतु बैठक में निम्न सुझाव दिए गए।

1. स्थानीय निकाय जैसे नगर निगम, नगर विकास प्रन्यास, जिला परिषद एवं स्थानीय प्रशासन आने वाले महीने में जन-जन में *दैनिक जीवन* में पानी की बचत कैसे कैसे करें इसका प्रचार प्रसार पंपलेट एवं कचरा संग्रहण मोटर पर लगे माइक से करें ।

2. वर्षा जल को भूजल में डालने हेतु अभी से घर-घर में रूफटॉप रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने का आग्रह करें ।

3. इस हेतु रूफटॉप रेनवाटर हार्वेस्टिंग की विभिन्न वैज्ञानिक तकनीक का प्रचार प्रसार करें ताकि जनता अपने सुविधा अनुसार उनका आने वाली वर्षा पूर्व अपने-अपने भवन में स्थापित कर सके।

5. सामूहिक वर्षा जल संरक्षण( कम्युनिटी रेनवाटर हार्वेस्टिंग) जिसमें आसपास के मकान की छतोंंका वर्षा जल एक साथ लेकर वहां स्थित ट्यूबवेल, हैंडपंप को रिचार्ज किया जा सके को प्रोत्साहित करें ।

6. वॉल टू वॉल सड़क बनने से प्राकृतिक रूप से वर्षा जल का भूमि जल में पुनर्भरण नहीं हो पा रहा है ।

इस हेतु अभी जो गैस के लिए दोनों तरफ खुदा है उस पर इंटरलॉकिंग टाइल्स लगा देंगे तो हर वर्षा काल में भूमि जल रिचार्ज होता रहेगा तो हमारे भूमि जल स्रोत नहीं सूखेंगे एवं भविष्य में कोई भी केबल या पाइप लाइन का कोई भी काम होगा तो केवल इन इंटरलॉकिंग टाइल्स को ही उठाना होगा जो की बहुत सरल होगा. 7. साथ ही स्थानीय प्रशासन से आग्रह किया गया कि इन सुझावों पर कार्य करे ताकि शहर को आने वाले जल संकट से बचाया जा सके।

प्रशासन से यह भी आग्रह किया गया की इस सम्बन्ध में प्रशासन एक जिला स्तरीय जल संरक्षण समिति बना देवे जिसमे इस क्षेत्र में काम करने वाले विशेषज्ञों को सम्मिलित किया जाए ताकि उनके अनुभव एवं सुझाव का उपयोग हो सके. कार्यक्रम के अंत में अतिथियों का आभार कुलपति के निजी सहायक श्री के.के.कुमावत द्वारा दिया गया.