उदयपुर | मेवाड़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, श्रीनाथजी की भक्ति परंपरा और पारंपरिक हस्तशिल्प को कलात्मक अभिव्यक्ति प्रदान करते हुए महाराणा मेवाड़ चैरिटेबल फाउण्डेशन, उदयपुर ने ‘आवरण’ के सहयोग से ‘सुदर्शन’ नामक विशिष्ट कलाकृति प्रस्तुत की है। 28 अक्टूबर से 1 नवंबर 2026 तक प्रदर्शित यह रचना नाथद्वारा के एक दिन की आध्यात्मिक अनुभूति और मेवाड़ के एक वर्ष के प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक परिवर्तनों को साकार करती है।
श्रीजी हुजूर डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने कहा, “मेवाड़ की सांस्कृतिक विरासत हमारे पूर्वजों द्वारा संरक्षित ज्ञान, विज्ञान, आस्था और सृजनशीलता की अमूल्य धरोहर है। इसका संरक्षण केवल हमारी परंपराओं को सहेजना नहीं, बल्कि इस विरासत को भावी पीढ़ियों तक जीवंत रूप में पहुँचाना भी है। ‘सुदर्शन’ जैसी प्रस्तुतियाँ पारंपरिक शिल्पकारों के कौशल को सम्मान देने, युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने और हमारी प्राचीन कलाओं को समकालीन संदर्भों में नई पहचान प्रदान करने का सार्थक माध्यम हैं। हमारा प्रयास है कि यह ज्ञान और कला-परंपराएँ निरंतर विकसित होती रहें।”
फाउण्डेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. मयंक गुप्ता ने बताया कि ‘सुदर्शन’ में श्रीनाथजी की सेवा परंपरा का भाव पारंपरिक डाबू छपाई और प्राकृतिक नील रंगाई की कला के साथ अभिव्यक्त हुआ है। 27 फीट लंबी यह कलाकृति 12 पैनलों में विस्तृत है, जो कुल 108 वर्गफीट में हिंदू पंचांग के बारह महीनों को माघ से आरंभ करते हुए बदलते ऋतुचक्र, प्राकृतिक परिदृश्यों और भक्ति की लय को प्रस्तुत करती है।
‘आवरण’ की अल्का शर्मा ने ‘सुदर्शन’ पर बात करते कहा कि कलाकृति के केंद्र में स्थित गोवर्धन पर्वत आश्रय, संरक्षण और दिव्य उपस्थिति का प्रतीक है। इसके चारों ओर श्रीकृष्ण की लीला प्रकृति की विराटता और ईश्वरीय संरक्षण के संबंध को उजागर करती है। इस प्रकार ‘सुदर्शन’ आस्था, प्रकृति, शिल्पकौशल और सांस्कृतिक स्मृति का एक विशिष्ट कलात्मक संगम प्रस्तुत करती है।
‘सुदर्शन’ के माध्यम से सिटी पैलेस संग्रहालय और आवरण ने पारंपरिक शिल्पज्ञान तथा समकालीन कलात्मक दृष्टि के बीच एक सार्थक संवाद स्थापित किया है। यह प्रस्तुति मेवाड़ की जीवंत सांस्कृतिक पहचान, श्रीनाथजी की सेवा भावना और पारंपरिक हस्तकला की निरंतरता को समर्पित है।
महाराणा मेवाड़ चैरिटेबल फाउंडेशन, उदयपुर के अध्यक्ष एवं प्रबंध न्यासी तथा मेवाड़ के 77वें श्री एकलिंग दीवान श्रीजी हुजूर डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ के दिशा-निर्देशन में मेवाड़ की प्राचीन कलाओं के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु निरंतर कार्यशालाओं, प्रदर्शनियों और अन्य सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन किया जाता रहा है। इन प्रयासों का उद्देश्य पारंपरिक कला-विधाओं को जीवंत बनाए रखना, कलाकारों को अपनी प्रतिभा एवं पारंपरिक ज्ञान प्रदर्शित करने के अवसर प्रदान करना तथा युवा पीढ़ी को इन कलाओं की बारीकियों से परिचित कराना है।
