उदयपुर । पंचायतीराज चुनाव-2026 के तहत गांव की सरकार चुनने के लिए शनिवार को उदयपुर जिले में लोकतंत्र के उत्सव का उत्साह चरम पर रहा।
प्रथम चरण में जिले की 10 पंचायत समितियों की 283 ग्राम पंचायतों में पंच-सरपंच पद के लिए हुए मतदान में मतदाताओं ने उत्साहपूर्वक भागीदारी निभाई।
सुबह से ही मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की कतारें लगनी शुरू हो गईं। जैसे-जैसे दिन चढ़ा, मतदान को लेकर उत्साह भी बढ़ता गया।
कई मतदान केंद्रों पर देर शाम तक मतदाताओं की कतारें लगी रहीं। युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक हर वर्ग में गांव की सरकार चुनने का उत्साह नजर आया।ग्रामीण क्षेत्रों में शनिवार की सुबह चुनावी उत्साह के साथ हुई।
अपने गांव के विकास और भविष्य की बागडोर योग्य हाथों में सौंपने की उम्मीद लिए मतदाता मतदान केंद्रों पर पहुंचे। लोकतंत्र के इस महापर्व में महिला एवं पुरुष मतदाताओं के साथ युवाओं और बुजुर्गों की भागीदारी भी आकर्षण का केंद्र रही।
मतदान केंद्रों पर सुबह से ही चहल-पहल बनी रही। मतदाताओं ने अपने मताधिकार का उपयोग कर लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी भागीदारी सुनिश्चित की।
शनिवार सुबह मतदान प्रारंभ होने के साथ ही मतदाताओं में उत्साह नजर आया। सुबह 10 बजे तक जिले में 16.50 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया।
इसके बाद मतदान की गति में तेजी आई और दोपहर 1 बजे तक मतदान प्रतिशत बढ़कर 42.57 प्रतिशत तथा अपराह्न 3 बजे तक 57.45 प्रतिशत तक पहुंच गया।283 ग्राम पंचायतों में सरपंच पद के लिए 1480 प्रत्याशी मैदान मेंजिले की 10 पंचायत समितियों की कुल 283 ग्राम पंचायतों में सरपंच पद के लिए 1480 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं।
वहीं, कुल 2466 वार्ड पंच पदों के लिए भी मतदान हो रहा है। गांव की सरकार के गठन को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष उत्साह देखने को मिला।
स्थानीय स्तर पर विकास और जनसुविधाओं से जुड़े निर्णयों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले पंच-सरपंच पदों के लिए मतदाताओं ने अपने मताधिकार का उपयोग किया।युवाओं में दिखा जोश, गांव का भविष्य संवारने के लिए किया मतदानगांव की सरकार चुनने के लिए युवा मतदाताओं में विशेष उत्साह नजर आया।
मतदान केंद्रों पर युवाओं की सक्रिय भागीदारी लोकतंत्र के प्रति उनकी जागरूकता का परिचायक रही। विशेष रूप से पहली बार मतदान करने वाले युवाओं के लिए यह अवसर यादगार रहा।
युवाओं ने अपने मताधिकार का उपयोग कर गांव के विकास और बेहतर भविष्य के निर्माण में भागीदारी निभाई।
ग्रामीण विकास, शिक्षा, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी उम्मीदों के बीच युवाओं का उत्साह लोकतंत्र के प्रति उनके विश्वास को दर्शाता नजर आया।उम्र पर भारी पड़ा लोकतंत्र का जज्बापंचायतीराज चुनाव में बुजुर्ग मतदाताओं का उत्साह भी देखते ही बना।
उम्र के इस पड़ाव पर भी गांव की सरकार चुनने का उनका जज्बा लोकतंत्र के प्रति अटूट आस्था का प्रतीक रहा। बुजुर्ग मतदाताओं ने मतदान में भागीदारी निभाकर युवा पीढ़ी के सामने लोकतांत्रिक जिम्मेदारी का उदाहरण प्रस्तुत किया।
गांव के विकास और आने वाली पीढ़ियों के बेहतर भविष्य की उम्मीद के साथ बुजुर्गों की भागीदारी ने मतदान के उत्सव को और अधिक सार्थक बनाया।महिलाओं ने भी दिखाई जागरूकतापंचायतीराज चुनाव में महिला मतदाताओं की भागीदारी भी महत्वपूर्ण रही।
ग्रामीण क्षेत्रों में मतदान को लेकर महिलाओं में उत्साह नजर आया। गांव के विकास, पेयजल, स्वच्छता, शिक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी उम्मीदों के साथ महिलाओं ने अपने मताधिकार का उपयोग किया।
लोकतांत्रिक प्रक्रिया में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती राजनीतिक जागरूकता और सशक्तीकरण की भावना को रेखांकित करती नजर आई।गांव के विकास की उम्मीदों के साथ मतदाताओं ने चुनी अपनी सरकारपंचायतीराज चुनाव केवल जनप्रतिनिधियों के चयन का अवसर नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास की दिशा तय करने का महत्वपूर्ण माध्यम भी है।
शनिवार को मतदान के दौरान ग्रामीणों में अपने गांव के बेहतर भविष्य को लेकर उम्मीदें नजर आईं। सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वच्छता जैसी बुनियादी सुविधाओं के विकास में पंचायतों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।
ऐसे में पंच-सरपंच पदों के लिए मतदान कर ग्रामीणों ने स्थानीय स्वशासन को मजबूत बनाने की दिशा में अपनी भागीदारी निभाई।
