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Udaipur News

उद्यानिकी फसलों में मूल्य संवर्धन एवं प्रसंस्करण पर दो दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न

किसानों ने सीखा जैम, स्क्वैश एवं दुग्ध उत्पाद बनाने का व्यावहारिक प्रशिक्षण

मुख्य बिंदु
  • महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर के हाईटेक यूनिट, राजस्थान कृषि महाविद्यालय में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार द्वारा प्रायोजित “उद्यानिकी फसलों में मूल्य संवर्धन एवं प्रसंस्करण” विषय पर आयोजित दो दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन हुआ।
  • प्रशिक्षण के अंतर्गत किसानों एवं कृषक महिलाओं को सेब एवं अनानास का जैम तथा स्क्वैश बनाने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
  • प्रतिभागियों ने इन उत्पादों को तैयार करने की प्रक्रिया को समझा तथा प्रसंस्करण के माध्यम से फलों को लंबे समय तक उपयोग योग्य बनाए रखने एवं उनसे लाभकारी उत्पाद तैयार करने की जानकारी प्राप्त की।
  • कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी एंड इंजीनियरिंग के कटाई उपरांत तकनीक एवं अभियांत्रिकी विभाग का भ्रमण किया।
  • यहां उन्हें कृषि उत्पादों की कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने, उनके उचित रखरखाव तथा प्रसंस्करण से संबंधित तकनीकों की जानकारी दी गई।
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उद्यानिकी फसलों में मूल्य संवर्धन एवं प्रसंस्करण पर दो दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न

उदयपुर।  महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर के हाईटेक यूनिट, राजस्थान कृषि महाविद्यालय में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार द्वारा प्रायोजित “उद्यानिकी फसलों में मूल्य संवर्धन एवं प्रसंस्करण” विषय पर आयोजित दो दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन हुआ।

प्रशिक्षण के अंतर्गत किसानों एवं कृषक महिलाओं को सेब एवं अनानास का जैम तथा स्क्वैश बनाने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। प्रतिभागियों ने इन उत्पादों को तैयार करने की प्रक्रिया को समझा तथा प्रसंस्करण के माध्यम से फलों को लंबे समय तक उपयोग योग्य बनाए रखने एवं उनसे लाभकारी उत्पाद तैयार करने की जानकारी प्राप्त की। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी एंड इंजीनियरिंग के कटाई उपरांत तकनीक एवं अभियांत्रिकी विभाग का भ्रमण किया। यहां उन्हें कृषि उत्पादों की कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने, उनके उचित रखरखाव तथा प्रसंस्करण से संबंधित तकनीकों की जानकारी दी गई। इसके अतिरिक्त, किसानों ने कॉलेज ऑफ डेयरी एंड फूड टेक्नोलॉजी का भी भ्रमण किया, जहां उन्हें दूध एवं दुग्ध उत्पादों के प्रसंस्करण, विभिन्न दुग्ध उत्पादों की तैयारी तथा उनसे स्वरोजगार की संभावनाओं के बारे में जानकारी प्रदान की गई।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. आर. एल. सोनी ने किसानों के लिए ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों को उपयोगी बताते हुए कृषि उत्पादों में मूल्य संवर्धन एवं प्रसंस्करण तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रसंस्करण एवं उत्पाद विविधीकरण के माध्यम से किसान अपनी उपज का बेहतर उपयोग कर सकते हैं तथा कृषि आधारित आय के नए अवसर विकसित कर सकते हैं।

 

प्रशिक्षण समन्वयक डॉ. कपिल देव आमेटा ने कार्यक्रम की गतिविधियों की जानकारी देते हुए बताया कि किसानों एवं कृषक महिलाओं को व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करने का उद्देश्य उन्हें कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण के प्रति जागरूक करना तथा स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ना है। इस प्रकार के प्रशिक्षण ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमिता विकास, कृषि उत्पादों के बेहतर उपयोग तथा किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में सहायक सिद्ध हो सकते हैं। इस दो दिवसीय प्रशिक्षण में चित्तौड़गढ़ जिले के कुल 20 किसानों एवं कृषक महिलाओं ने भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को फल एवं सब्जियों के प्रसंस्करण, खाद्य उत्पादों की तैयारी तथा कृषि उत्पादों का मूल्य संवर्धन करके उनकी उपयोगिता एवं बाजार मूल्य बढ़ाने के विभिन्न तरीकों की जानकारी दी गई।

इस अवसर पर प्रो. डॉ. दीपक राजपुरोहित, प्रोफेसर (बायोटेक्नोलॉजी) ने महिला कृषकों को विभिन्न प्रसंस्करण मशीनों की कार्यप्रणाली, तकनीकी विशेषताओं, उपयोगिता तथा इनके माध्यम से स्वरोजगार एवं लघु उद्यम स्थापित करने की संभावनाओं के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी

डॉ. आदर्श शर्मा ने बताया की कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों एवं कृषक महिलाओं को उद्यानिकी फसलों के प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन तथा कृषि उत्पादों से अतिरिक्त आय अर्जित करने के व्यावहारिक तरीकों की जानकारी प्रदान करना था।