उदयपुर। स्थानीय देवेन्द्र धाम स्थित महावीर समवशरण में चातुर्मासिक प्रवचन एवं भक्तामर अनुष्ठान के दौरान डॉ. सुरेन्द्र मुनि ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि भाग्य के साथ कर्म का भी अपना विशिष्ट महत्व है।
उन्होंने कर्म की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि किसान कर्म करता है तभी खेत लहलहाते हैं और मजदूर के पसीने से कारखानों में उत्पादन होता है।
गाय में दूध होने के बावजूद बिना कर्म और प्रयास के वह प्राप्त नहीं हो सकता। इसी प्रकार भोजन सामग्री उपलब्ध होने पर भी जब तक उसे पकाया न जाए, वह तैयार नहीं होता और तैयार भोजन को भी मुंह में रखकर दांतों से चबाने के बाद ही शरीर को ऊर्जा मिलती है।
पेट में जाने के बाद दिनभर के पाचन चक्र से ही रक्त, अस्थि और मांस का निर्माण होता है। भगवान महावीर के संदेश का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रभु ने गौतम स्वामी को संबोधित करते हुए स्पष्ट कहा थाकृ ष्उठो, क्षण मात्र का भी प्रमाद न करो।
धर्मसभा में प्रवर्तक डॉ. राजेन्द्र मुनि ने साधना के गूढ़ स्वरूप को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि मन, वचन और कायाकृतीनों के समन्वय से की गई साधना ही वास्तविक रूप से सफल होती है।
मात्र जप-तप को शरीर तक सीमित न रखकर उसे वाणी और मन तक साधना जरूरी है। शास्त्रों में संयम को मन, वचन और काया का त्रिविध रूप बताया गया है।
उपवास, एकाशन, माला, सामायिक, पूजा-पाठ और नाम स्मरण आदि अनुष्ठान तभी फलदायी होते हैं, जब वे पूर्ण मनोयोग एवं एकाग्रता के साथ किए जाएं।
1 नवंबर को सामूहिक गुणानुवाद सभा, 6 को आचार्य देवेन्द्र जाप-श्रावक संघ से प्राप्त जानकारी के अनुसार, रविवार, 1 नवंबर को पूज्य आचार्य देवेन्द्र जी की जयंती के उपलक्ष्य में सामूहिक गुणानुवाद सभा का आयोजन किया जाएगा।
इसमें शहर एवं अनेक नगरों उपनगरों से बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं व समाजसेवी उपस्थित होकर अपनी भावांजलि एवं गुणांजलि समर्पित करेंगे। इसके पश्चात 6 नवंबर को समाजसेवी वरडिया परिवार द्वारा प्रातः 9 बजे देवेन्द्र जाप का विशेष आयोजन संपन्न होगा।
