उदयपुर। भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (पीआरएल) की उदयपुर सौर वेधशाला (यूएसओ) में 28 से 30 अक्टूबर 2026 तक ‘सौर क्षणिक घटनाएँ एवं अंतरिक्ष मौसम‘ विषय पर उदयपुर सौर भौतिकी बैठक (यूएसपीएम 2026) का आयोजन किया जा रहा है।
इस राष्ट्रीय स्तर की बैठक में 22 संस्थानों के 75 वैज्ञानिक एवं शोधकर्ता भाग ले रहे हैं।
बैठक में कुल 60 शोध-योगदान प्रस्तुत किए जा रहे हैं, जिनमें 30 मौखिक और 30 पोस्टर प्रस्तुतियाँ शामिल हैं।उद्घाटन सत्र में पीआरएल के निदेशक प्रो. अनिल भारद्वाज ने प्रतिभागियों का स्वागत किया और उदयपुर सौर वेधशाला के संस्थापक, स्वर्गीय प्रो. अरविंद भटनागर के योगदान को याद किया।
उन्होंने वेधशाला की विकास-यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि सौर गतिविधियों के वास्तविक समय में प्रेक्षण अंतरिक्ष मौसम तथा पृथ्वी पर उसके प्रभावों को समझने के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं।इस अवसर पर प्रो. अनिल भारद्वाज ने स्वर्गीय प्रो. अरविंद भटनागर की पत्नी श्रीमती चित्रा भटनागर को सम्मानित किया।
उनकी पुत्रियाँ डॉ. तृप्ति भटनागर और सुश्री मालविका भटनागर भी उपस्थित रहीं।
डॉ. तृप्ति भटनागर ने अपने पिता के सौर एवं खगोलीय प्रेक्षणों के प्रति गहरे लगाव और समर्पण को याद किया, जिनके परिणामस्वरूप उदयपुर सौर वेधशाला की स्थापना संभव हुई।वेधशाला की पाँच दशकों की वैज्ञानिक यात्रा पर प्रकाश डालते हुए, यूएसओ-पीआरएल के सेवानिवृत्त वरिष्ठ प्रोफेसर प्रो. अशोक अम्बस्था ने फुल-डिस्क दूरबीन से लेकर एमएएसटी, जीओएनजी और सौर रेडियो दूरबीनों तक विकसित हुई प्रेक्षण क्षमताओं का उल्लेख किया।
उन्हें भी इस अवसर पर सम्मानित किया गया।यूएसओ-पीआरएल के प्रमुख प्रो. शिबु के. मैथ्यू ने प्रो. भारद्वाज और प्रतिभागियों का स्वागत किया। कार्यक्रम आयोजन समिति के अध्यक्ष प्रो. भुवन जोशी ने बैठक के उद्देश्यों और वैज्ञानिक कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की।
उन्होंने आदित्य-एल1 से प्राप्त प्रेक्षणों, सौर प्रेक्षण तकनीकों एवं उपकरणों में प्रगति और अंतरिक्ष मौसम अनुसंधान में हो रहे नए विकास के महत्त्व पर प्रकाश डाला।पीआरएल के डीन प्रो डी. पल्लम राजू ने बताया कि बैठक के वैज्ञानिक कार्यक्रम में पाँच प्रमुख सत्र शामिल हैं - भारत में सौर एक्स-रे खगोल विज्ञान, सौर वायुमंडल की गतिशीलता एवं क्षणिक घटनाएँ, सौर प्रेक्षण एवं उपकरण, आदित्य-एल1 से प्राप्त नई वैज्ञानिक जानकारियाँ, तथा अंतरिक्ष मौसम।
उन्होंने बताया कि पहले दिन सौर एक्स-रे खगोल विज्ञान, सौर वायुमंडल की गतिशीलता एवं क्षणिक घटनाओं तथा सौर प्रेक्षण एवं उपकरणों पर सत्र आयोजित किए गए।
शेष सत्रों में आदित्य-एल1 के वैज्ञानिक परिणामों और अंतरिक्ष मौसम से जुड़े विषयों पर चर्चा होगी।
