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Udaipur News

आत्मा को जान लिया तो सब कुछ जान लिया

साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी बोलींकृदूसरों को जानने से पहले स्वयं को पहचानें

मुख्य बिंदु
  • वासुपूज्य मंदिर दादाबाड़ी में आयोजित आध्यात्मिक प्रवचन में साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी आदि ठाणा-6 ने कहा कि जीवन के सार तत्व को जिसने समझ लिया, उससे बड़ा ज्ञानी कोई नहीं है।
  • भगवान महावीर ने केवलज्ञान प्राप्त करने के बाद संघ और गणधरों की स्थापना की।
  • आत्मा का कल्याण, आत्मसुख और भ्रम से मुक्ति का ज्ञान ही वास्तविक ज्ञान है।
  • उन्होंने कहा कि जो एक को जानता है, वह सबको जानता है।
  • मनुष्य दुनिया का ज्ञान प्राप्त करने में लगा है, लेकिन अपने भीतर चल रही कषाय, ईर्ष्या और क्रोध की आग को नहीं पहचानता।
  • दूसरों के दोष गिनते हैं, मगर स्वयं को भूल जाते हैं।
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उदयपुर। वासुपूज्य मंदिर दादाबाड़ी में आयोजित आध्यात्मिक प्रवचन में साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी आदि ठाणा-6 ने कहा कि जीवन के सार तत्व को जिसने समझ लिया, उससे बड़ा ज्ञानी कोई नहीं है।

भगवान महावीर ने केवलज्ञान प्राप्त करने के बाद संघ और गणधरों की स्थापना की। आत्मा का कल्याण, आत्मसुख और भ्रम से मुक्ति का ज्ञान ही वास्तविक ज्ञान है।उन्होंने कहा कि जो एक को जानता है, वह सबको जानता है।

मनुष्य दुनिया का ज्ञान प्राप्त करने में लगा है, लेकिन अपने भीतर चल रही कषाय, ईर्ष्या और क्रोध की आग को नहीं पहचानता। दूसरों के दोष गिनते हैं, मगर स्वयं को भूल जाते हैं।

संसार के बंधनों में हमें कोई और नहीं, बल्कि हम स्वयं बांधते हैं।साध्वी श्रीजी ने कहा कि धन से अधिक मूल्यवान समय है। समय रहते धन कमाया जा सकता है, लेकिन समय निकल जाने पर धन व्यर्थ है।

कर्मों के आगे किसी की नहीं चलती। आत्मविजय ही वास्तविक विजय है।

इस अवसर पर साध्वी प्रज्ञानजना श्रीजी, नमन रुचि श्रीजी, योगरुचि श्रीजी एवं तन्मय रुचि श्रीजी ने गीत प्रस्तुत किया।