उदयपुर। वासुपूज्य मंदिर दादाबाड़ी में बुधवार को नियमित प्रवचन में साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी आदि ठाणा-6 ने माता-पिता की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि माता-पिता चार प्रकार के होते हैंकृथाली, ताली, पाली और माली।
थाली माता-पिता बच्चों से केवल खानपान की बातें करते हैं, ताली वाले उनकी बातों पर बिना समझे सहमति जताते हैं, जबकि पाली वाले अत्यधिक रोक-टोक कर उनकी स्वतंत्रता छीन लेते हैं।
माली जैसे माता-पिता बच्चों को आवश्यक मार्गदर्शन देकर उनके विकास में सहयोग करते हैं।साध्वीश्री ने भगवान नेमिनाथ की देशना से प्रेरित होकर श्रीकृष्ण महाराज के संयम मार्ग अपनाने के प्रसंग का वर्णन किया।
उन्होंने कहा कि शरीर, समाज और संबंध जीवन के महत्वपूर्ण आधार हैं। आपसी संवाद और आत्मीयता से ही रिश्ते जीवंत रहते हैं।
इस अवसर पर साध्वी प्रज्ञानजना श्रीजी, साध्वी नमन रुचि श्रीजी, साध्वी योगरुचि श्रीजी एवं साध्वी तन्मय रुचि श्रीजी ने भक्ति गीत प्रस्तुत किया।