मुख्य सामग्री पर जाएँ
सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 उदयपुर · 29°C
Udaipur News

संगठन से उत्थान, तो विघटन से पतन: डॉ. सुरेन्द्र मुनि

​राष्ट्रीय जैन कॉन्फ्रेंस महिला शाखा के प्रांतीय अधिवेशन में वक्ताओं ने लिया एकता का संकल्प ​गुरु पुष्कर सप्ताह का हुआ भव्य समापन

WAf𝕏TGin✉🖨

उदयपुर ​, महावीर समवशरण में आयोजित ‘गुरु पुष्कर सप्ताह’ के समापन अवसर पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए डॉ. सुरेन्द्र मुनि ने कहा कि जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में संगठित रहने से ही मानव और समाज का विकास संभव है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए समझाया कि जिस प्रकार शरीर के विभिन्न अंग—हाथ, पैर, आंख, नाक, मस्तिष्क और रक्त—एक-दूसरे से तालमेल बनाकर जुड़े रहते हैं, तभी शरीर सुचारू रूप से कार्य करता है।

इसी प्रकार वाहनों में हजारों-लाखों पुर्जे मिलकर उसे गति देते हैं और अंकों की एकजुटता से गणना करोड़ों-अरबों तक पहुँचती है। जिस देश, समाज अथवा धर्म के नागरिक संगठित रहते हैं, वही वास्तविक प्रगति करता है।

​एकता की ली शपथ ​राष्ट्रीय जैन कॉन्फ्रेंस महिला शाखा की राष्ट्रीय अध्यक्षा श्रीमती सन्तोष जैन (रीचा जैन) की अध्यक्षता तथा राजस्थान प्रान्त अध्यक्षा श्रीमती पुष्पा खोरखावत के सानिध्य में राजस्थान महिला शाखा का पावन अधिवेशन संपन्न हुआ। इस अधिवेशन में संगठन की महत्ता पर अनेक वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए तथा समाज में एकजुटता बनाए रखने की शपथ ग्रहण की।

​सामूहिक साधना से संगठित होती है ऊर्जा: डॉ. राजेन्द्र मुनि ​सभा को संबोधित करते हुए प्रवर्तक डॉ. राजेन्द्र मुनि ने कहा कि धर्म क्षेत्र में सामूहिक जप और तप की साधना से असीम ऊर्जा संगठित होती है।

भगवान महावीर ने भी धर्म संगठन के सुदृढ़ीकरण हेतु साधु, साध्वी, श्रावक एवं श्राविका (चतुर्विध संघ) को परस्पर एकता का संदेश दिया था। उन्होंने कहा कि मनकों के एकत्रित होने से ही सुंदर माला का निर्माण होता है।

वर्तमान में जैन समाज को संगठित रखने के लिए ही युवा संघ, महिला संघ व श्रावक संघ जैसी इकाइयाँ निरंतर सामाजिक कार्यों को संपन्न कर रही हैं। व्यक्ति-व्यक्ति के जुड़ने से परिवार, समाज और अंततः राष्ट्र का निर्माण होता है।

​भक्तामर अनुष्ठान व वंदना के साथ समापन ​कार्यक्रम के दौरान उपाध्याय रमेश मुनि एवं दिपेश मुनि के मंगल भावों के साथ संघ द्वारा अतिथियों का सम्मान किया गया एवं आभार व्यक्त किया गया। अंत में भक्तामर अनुष्ठान के साथ सामूहिक रूप से गुरु पुष्कर को भावभरी वंदना समर्पित की गई।