उदयपुर, पिछोला झील में घटता जलस्तर, बढ़ती जलीय खरपतवार और किनारों पर जमा गंदगी झील संरक्षण के लिए गंभीर चुनौती बन रही है। झील के विभिन्न हिस्सों में कचरे और मानव मल से फैल रही दुर्गंध पर चिंता जताते हुए रविवार को बारी घाट पर श्रमदान किया गया। इसका आयोजन झील हितैषी नागरिक मंच, भारतीय मानव विज्ञान संरक्षण एवं लोकजन सेवा संस्था के संयुक्त तत्वावधान में हुआ।
भारतीय मानव विज्ञान संरक्षण के नीलांजन खटुआ, उमेश शंकर शर्मा, डॉ. जयराज आचार्य और जय किशन चौबे ने कहा कि पिछोला झील के गिरते जलस्तर, जलीय खरपतवार और बढ़ती गंदगी की समस्या के समाधान के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। उन्होंने झील की स्वच्छता और संरक्षण को प्राथमिकता देने पर जोर दिया।
झील हितैषी नागरिक मंच के संयोजक हाजी सरदार मोहम्मद, कमलेश पुरोहित, सतीश मेवाड़ा और किशोर गहलोत ने कहा कि महाराणाओं के समय विकसित पारंपरिक जल प्रबंधन व्यवस्था में झीलों और बावड़ियों के संरक्षण को विशेष महत्व दिया जाता था। उन्होंने इस पारंपरिक व्यवस्था को पुनर्जीवित करने की मांग करते हुए कहा कि इससे ऐतिहासिक जलस्रोतों की स्वच्छता बनाए रखने और उनकी उपयोगिता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
श्रमदान में मनोहर मूंदड़ा, सुरेश तमोली, गोविंद ओड़ सहित कई लोगों ने भाग लेकर झील संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई।