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महाराणा भूपाल पूर्व छात्र परिषद ने मनाया 16वाँ स्थापना दिवस

वार्षिक समारोह में वरिष्ठ सदस्यों का सम्मान, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और स्वास्थ्य जागरूकता पर हुआ विशेष सत्र

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महाराणा भूपाल पूर्व छात्र परिषद ने मनाया 16वाँ स्थापना दिवस

उदयपुर। महाराणा भूपाल पूर्व छात्र परिषद का 16वाँ स्थापना दिवस विवेकानंद सभागार, साइंस कॉलेज में समारोहपूर्वक मनाया गया। कार्यक्रम दो सत्रों में आयोजित हुआ। प्रथम सत्र में परिषद की मासिक बैठक तथा द्वितीय सत्र में ‘जीवन रथ’ वार्षिक कार्यक्रम आयोजित किया गया।

मासिक बैठक में गतिविधियों की समीक्षा प्रथम सत्र में परिषद की मासिक बैठक हुई, जिसमें डॉ. आर. के. गर्ग ने गत माह की कार्यवाही एवं गतिविधियों की रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसे सदस्यों ने अनुमोदित किया। अक्टूबर माह में जन्मदिन मनाने वाले सदस्यों का सम्मान कर उनके दीर्घ एवं स्वस्थ जीवन की मंगलकामना की गई।

इसके बाद सदस्यों ने विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। कर्नल अभय लोढ़ा ने ‘मुझे दुनिया वालों शराबी न समझो’, शिवा तलेसरा ने ‘ये रात ये चांदनी फिर कहाँ’ तथा रविंद्र भटनागर ने ‘पोंछ कर अश्क अपनी आँखों के’ प्रस्तुत कर वातावरण को संगीतमय बना दिया। प्रो. डॉ. विमल शर्मा ने अपनी स्वरचित कविता ‘मधुशाला—एक जीवन दर्शन’ प्रस्तुत की। स्नेहलता लोढ़ा ने प्रेरक कविता सुनाई व रेणु भंडारी ने वाक् चातुर्य का रोचक किस्सा सुनाया।

‘जीवन रथ’ वार्षिक समारोह में वरिष्ठ सदस्यों का सम्मान द्वितीय सत्र के ‘जीवन रथ’ वार्षिक कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. जे. के. छापरवाल ने की, जबकि मुख्य अतिथि सुखाड़िया विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. कैलाश डागा थे। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं निवेदिता बक्सी द्वारा वंदना से हुआ। स्वागत उद्बोधन गिरधारी लाल शर्मा ने दिया।

महासचिव शांतिलाल भंडारी ने वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए परिषद की गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस वर्ष परिषद ने ‘वरिष्ठतम आयुष सम्मान’ की नई परंपरा शुरू की है, जिसके अंतर्गत 92 वर्ष या उससे अधिक आयु के सभी सदस्यों को सम्मानित किया जाएगा।

समारोह में 80 वर्ष की आयु पूर्ण करने वाले 7 सदस्यों को ‘अग्रज सम्मान’, 90 वर्ष के 2 सदस्यों को ‘वरिष्ठ अग्रज सम्मान’ तथा 92 वर्ष से अधिक आयु वाले 4 सदस्यों को ‘वरिष्ठतम आयुष सम्मान’ प्रदान किया गया। परिषद के गुरुजनों के प्रति सम्मान की परंपरा के तहत प्रो. एस. एस. सेठी को गुरु सम्मान उनके निवास पर जाकर प्रदान किया जाएगा।

अनुभवों और साहित्य-संगीत की रही रंगारंग प्रस्तुति समारोह में एन. के. बंसल ने वरिष्ठ नागरिक दिवस से जुड़े अपने विचार रखे, जबकि एम. पी. जैन ने जीवन में सफलता के अनुभव साझा किए।

आबिद अदीब ने अपनी स्वरचित ग़ज़ल ‘महकशों की महफिल में दुश्मनी नहीं होगी’ सुनाकर वाहवाही प्राप्त की। संजीव भारद्वाज ने ‘दोस्त दोस्त न रहा’ गीत प्रस्तुत किया। डॉ. के. एल. कोठारी ने एम.बी. कॉलेज पर अपनी कविता प्रस्तुत कर पुरानी स्मृतियों को जीवंत कर दिया।

मुख्य अतिथि डॉ. कैलाश डागा ने सुखाड़िया विश्वविद्यालय की नई एल्युमिनी संस्था ‘मानस’ के बारे में जानकारी देते हुए आगामी दिसंबर में आयोजित होने वाले भव्य आयोजन की रूपरेखा बताई। उन्होंने ‘वृद्ध और वृद्धा’ पर आधारित रोचक कविता भी प्रस्तुत की तथा उपस्थित सदस्यों को हास्य योग कराया।

स्वस्थ एवं शतायु जीवन के लिए दिए उपयोगी सूत्र अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. जे. के. छापरवाल ने शतायु जीवन के लिए स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल तथा पेट की अतिरिक्त चर्बी को नियंत्रित रखने पर जोर दिया। उन्होंने भोजन में अत्यधिक चीनी, नमक और अधिक तली वस्तुओं के सेवन से बचने की सलाह दी।

उन्होंने यह भी कहा कि वैचारिक एवं राजनीतिक मतभेदों के बावजूद सामाजिक संबंधों और मानवीय सौहार्द को बनाए रखना चाहिए। इसी संदर्भ में उन्होंने उदाहरण दिया कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद मोहनलाल सुखाड़िया की जन्मपत्री भानुकुमार शास्त्री जी बनाया करते थे, जो उस दौर के सामाजिक सौहार्द का उदाहरण है।

अंत में डॉ. आर. के. गर्ग ने सभी अतिथियों, पदाधिकारियों एवं सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया। प्रकाश तातेड के सफल संचालन में आयोजित इस समारोह ने पूर्व छात्रों के बीच आत्मीयता, पुरानी स्मृतियों, साहित्य-संगीत और वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान की भावना को और मजबूत किया। राष्ट्र गान एवं स्नेह भोज से कार्यक्रम का समापन हुआ।