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एचडीएफसी बैंक ने इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए अपनी तरह का पहला ‘फ्लेक्सी इलेक्ट्रिक कार लोन’ लॉन्च किया

उदयपुर : भारत के अग्रणी निजी क्षेत्र के बैंकों में से एक, एचडीएफसी बैंक ने इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी ) की खरीद के लिए एक अभिनव ऋण उत्पाद ‘फ्लेक्सी इलेक्ट्रिक कार लोन’ लॉन्च किया है। यह अपनी तरह का पहला ऑटो लोन उत्पाद है, जो

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उदयपुर : भारत के अग्रणी निजी क्षेत्र के बैंकों में से एक, एचडीएफसी बैंक ने इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी ) की खरीद के लिए एक अभिनव ऋण उत्पाद ‘फ्लेक्सी इलेक्ट्रिक कार लोन’ लॉन्च किया है।

यह अपनी तरह का पहला ऑटो लोन उत्पाद है, जो इलेक्ट्रिक वाहन की बॉडी और बैटरी के लिए अलग-अलग ऋण राशि और पुनर्भुगतान अवधि की सुविधा प्रदान करेगा।

बैटरी के लिए लिए गए ऋण का भुगतान लंबी अवधि में किया जा सकेगा। इससे ग्राहक अपनी सुविधा के अनुसार मासिक किस्तों को निर्धारित कर सकेंगे।

यह ऋण सुविधा देशभर में बैंक की 9,700 से अधिक शाखाओं में उपलब्ध है। वर्तमान में इलेक्ट्रिक वाहनों की लागत संरचना के कारण उनकी खरीद कीमत आंतरिक दहन इंजन वाले पारंपरिक वाहनों की तुलना में अधिक होती है।

इसका प्रमुख कारण बैटरी है, जो इलेक्ट्रिक वाहन का सबसे महंगा घटक है।इस ऋण उत्पाद के तहत बैटरी के लिए निर्धारित मासिक किस्त को पारंपरिक वाहन के संचालन पर होने वाले खर्च के अनुरूप रखने की परिकल्पना की गई है।

यह दृष्टिकोण बैटरी सब्सक्रिप्शन मॉडल के विकास के भी अनुरूप है, जो इलेक्ट्रिक वाहनों के स्वामित्व को अधिक सुलभ और किफायती बना रहे हैं।इस नई सुविधा के लॉन्च पर एचडीएफसी बैंक के रिटेल एसेट्स एवं रूरल बैंकिंग के ग्रुप हेड अरविंद वोहरा ने कहा कि भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की क्रांति तेजी से गति पकड़ रही है।

इसमें सरकारी प्रोत्साहन, तकनीकी विकास और दूरदर्शी नीतियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। भारत के इलेक्ट्रिक वाहन क्रांति को अपनाने की दिशा में एचडीएफसी बैंक का ‘फ्लेक्सी इलेक्ट्रिक कार लोन’ एक और महत्वपूर्ण कदम है।

हमें विश्वास है कि यह सुविधा इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने की प्रक्रिया को किफायती, सहज और परेशानी मुक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की दर में तेजी से वृद्धि होने की उम्मीद है।

यात्री कारों के कुल बाजार में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी वर्ष 2030 तक मौजूदा 7% से बढ़कर 15–20% तक पहुंचने का अनुमान है। इससे भारत यात्री इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रमुख बाजारों में शामिल हो सकता है।

इसके अतिरिक्त, वर्ष 2030 तक 30% इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का लक्ष्य हासिल करने के लिए सरकार के प्रयासों से भी इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

बेहतर बैटरी तकनीक और वाहन निर्माताओं द्वारा इलेक्ट्रिक वाहनों की विस्तृत होती रेंज भी इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।