उदयपुर। साधना के शिखर पुरुष, अध्यात्मयोगी एवं विश्वसंत उपाध्याय पूज्य गुरुदेव श्री पुष्कर मुनि जी महाराज के 117वें पावन अवतरण दिवस के उपलक्ष्य में श्री जैनाचार्य देवेन्द्र महिला संस्थान, उदयपुर की ओर से शनिवार को एक विशाल भंडारे का भव्य आयोजन संपन्न हुआ।
धर्म, सेवा और मानवीय सद्भाव को समर्पित इस वृहद अनुष्ठान में शहर व आसपास के क्षेत्रों से पहुंचे 1100 से अधिक श्रद्धालुओं, आम नागरिकों एवं जरूरतमंदों ने पूर्ण श्रद्धा व आत्मीयता के साथ भोजन प्रसादी ग्रहण की।संस्थान की अध्यक्ष रंजना छाजेड़ ने बताया कि यह संपूर्ण सेवा कार्य प्रज्ञा महर्षि श्रमण संघीय उपाध्याय गुरुदेव रमेश मुनि महाराज, प्रज्ञा पुरुषोत्तम श्रमण संघीय प्रवर्तक गुरुदेव डॉ. राजेन्द्र मुनि महाराज, साहित्य दिवाकर एवं प्रवचन रत्नाकर डॉ. सुरेन्द्र मुनि महाराज तथा दीपेश मुनि महाराज के पावन सान्निध्य व मंगलकारी आशीर्वाद के साथ संपन्न हुआ।
इस अवसर पर संतों के उपदेशों और जीवन दर्शन को याद करते हुए श्रद्धालुओं ने गुरु चरणों में भावांजलि अर्पित की।मंत्री वनिता (बबीता) पामेचा ने बताया कि समारोह का औपचारिक उद्घाटन क्षेत्रीय पार्षद अतुल चण्डालिया, सुश्राविका झंकार बाई मोगरा, सुनीता गलुन्दीया तथा पूर्व महापौर रजनी डांगी के कर-कमलों द्वारा दीप प्रज्वलन कर किया गया।
इस मौके पर देवेन्द्र धाम के वरिष्ठ पदाधिकारी हिम्मत मेहता, गर्वित सिसोदिया सहित समाज के अनेक गणमान्य लोग, सामाजिक कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं मौजूद रहे।
उपस्थित अतिथियों ने महिला संस्थान द्वारा निरंतर किए जा रहे सेवाकार्यों की भूरि-भूरि प्रशंसा की।संस्थान की कोषाध्यक्ष आकांक्षा सेठ ने बताया कि गुरु पुष्कर मुनि जी का संपूर्ण जीवन लोक कल्याण, करुणा और समता के सिद्धांतों पर आधारित रहा।
उन्हीं आदर्शों को आत्मसात करते हुए इस भंडारे की रूपरेखा तैयार की गई थी।
आयोजन का मूल उद्देश्य जाति, वर्ग और संप्रदाय की सीमाओं से ऊपर उठकर हर वर्ग के व्यक्ति तक सम्मानपूर्वक भोजन पहुंचाना रहा।संस्थान की समस्त कार्यकारिणी एवं सदस्याओं ने पूरे समर्पण के साथ भोजन वितरण और व्यवस्थाओं को संभाला।
अंत में पदाधिकारियों ने सभी सहयोगियों एवं पधारे हुए धर्मप्रेमियों का रेखा चौरडिया व लीला नाहर ने आभार व्यक्त करते हुए संकल्प दोहराया कि जीवदया, मानव सेवा और सामाजिक समरसता के ऐसे परोपकारी कार्य भविष्य में भी निरंतर संचालित किए जाते रहेंगे।
