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Udaipur News

परमात्मा पर अटूट श्रद्धा ही मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करती है रू साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी

नवपद आराधना के छठे दिन सम्यक्त्व पद की महिमा का वर्णन, संसार के बजाय धर्म और परमात्मा पर विश्वास रखने की दी प्रेरणा

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उदयपुर। वासुपूज्य मंदिर दादाबाड़ी में शुक्रवार को आयोजित धर्मसभा में साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी आदि ठाणा-6 ने नवपद आराधना के छठे दिन सम्यक्त्व पद की महत्ता समझाते हुए कहा कि सम्यक्त्व के बिना आत्मा की मोक्ष प्राप्ति संभव नहीं है।

परमात्मा के प्रति अटूट श्रद्धा, उनके वचनों पर विश्वास और जीवन में उनके सिद्धांतों को अपनाना ही सम्यक्त्व का वास्तविक स्वरूप है।साध्वीश्री ने कहा कि तेला, अठाई और अन्य तपस्याएं करना आराधना है, लेकिन हृदय में परमात्मा के प्रति समर्पण का भाव जागृत होना सम्यक्त्व है।

केवल लोगों को दिखाने, प्रशंसा पाने या दूसरों को प्रसन्न करने के उद्देश्य से की गई आराधना आत्मकल्याण का पूर्ण माध्यम नहीं बन सकती।

मोक्ष के मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए सच्ची श्रद्धा और निर्मल भाव आवश्यक हैं।उन्होंने कहा कि मनुष्य का विश्वास अक्सर परमात्मा से अधिक परिवार, रिश्तों, परिचितों और भौतिक संपत्ति पर रहता है।

उसे लगता है कि संसार के ये सहारे हमेशा उसकी रक्षा करेंगे, जबकि सांसारिक संबंधों की अपनी सीमाएं हैं।

इसलिए जीवन में संसार के भरोसे से ऊपर उठकर परमात्मा के प्रति अटूट विश्वास विकसित करना चाहिए।साध्वीश्री ने अमर कुमार के प्रसंग के माध्यम से श्रद्धा की शक्ति को समझाया।

उन्होंने बताया कि विपरीत परिस्थितियों में जब सभी सहारे समाप्त हो गए, तब नवकार मंत्र के स्मरण और अटूट आस्था ने संकट को बदल दिया तथा सूली सिंहासन में परिवर्तित हो गई।

उन्होंने कहा कि जब मनुष्य की श्रद्धा दृढ़ होती है, तब कठिन परिस्थितियों में भी उसे संबल और मार्गदर्शन मिलता है।धर्मसभा में साध्वी प्रज्ञानजना श्रीजी, साध्वी नमन रुचि श्रीजी, साध्वी योगरुचि श्रीजी एवं साध्वी तन्मय रुचि श्रीजी ने भक्ति गीत प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बनाया।