उदयपुर। व्यक्ति को किसी अन्य विषय की जानकारी हो या न हो, लेकिन उसे अपने कर्मों के बारे में अवश्य पता होना चाहिए, क्योंकि व्यक्ति का वर्तमान और भविष्य उसके कर्मों पर ही निर्भर करता है।
यह विचार शुक्रवार को श्रुतसंवेगी महाश्रमण मुनि श्री 108 आदित्य सागर जी महाराज ने नारायण सेवा संस्थान के नवनिर्मित वर्ल्ड ऑफ ह्यूमैनिटी में संचालित सेवा प्रकल्पों के अवलोकन के बाद अपने मंगल प्रवचन में व्यक्त किए।मुनि श्री ने कहा कि व्यक्ति के कर्म ही उसे सफलता के शिखर तक पहुंचाते हैं और उसकी असफलता का कारण भी बनते हैं।
कर्मों के आधार पर ही उसके अगले जन्म का निर्धारण होता है। उन्होंने कहा कि धर्माचरण में यदि परमार्थ का भाव नहीं है, तो वह धर्म सार्थक नहीं हो सकता।उन्होंने कहा कि धर्म के साथ समाज और राष्ट्र के हित का चिंतन भी आवश्यक है।
व्यक्ति को केवल अपने सुख के लिए ही नहीं, बल्कि दूसरों की खुशियों के लिए भी कार्य करना चाहिए। जब व्यक्ति दूसरों को प्रसन्न रखने और उनके जीवन में खुशियां लाने का प्रयास करता है, तो उसका अपना जीवन भी आनंद से भर जाता है।
दूसरों के हित में किया गया कार्य केवल अपने सुख के लिए किए गए प्रयासों से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।मुनि श्री ने मानवता की सेवा में नारायण सेवा संस्थान के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि यह शहर पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
यहां आने वाले प्रत्येक पर्यटक को संस्थान के सेवा कार्यों को देखकर अपनी सामर्थ्य के अनुसार योगदान देना चाहिए, ताकि जरूरतमंदों की सेवा और अधिक व्यापक स्तर पर हो सके।सेवा प्रकल्पों का किया अवलोकनइससे पूर्व संस्थान के मुख्य द्वार पर संस्थापक चेयरमैन पद्मश्री कैलाश मानव, सह-संस्थापिका कमला देवी एवं अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल और निदेशक वंदना अग्रवाल ने नारायण चिल्ड्रन एकेडमी के बच्चों के स्वागत गीत और नवकार मंत्रोच्चार के बीच मुनि श्री का पाद प्रक्षालन कर स्वागत किया।
इस अवसर पर मुनि श्री के साथ विहार कर रहे मुनि अप्रमित सागर, सहज सागर एवं श्रेय सागर जी का भी अभिनंदन किया गया।इसके बाद मुनि श्री एवं ससंघ ने दिव्यांगजनों के लिए संचालित कंप्यूटर, मोबाइल, सिलाई तथा आर्ट एंड क्राफ्ट के निःशुल्क व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्रों का अवलोकन किया।
उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों से संवाद कर उनके कौशल विकास और भविष्य की योजनाओं के बारे में जानकारी ली।मुनि श्री ने देश के विभिन्न प्रांतों से सुधारात्मक शल्य चिकित्सा के लिए आए दिव्यांगजनों से वार्ड में जाकर मुलाकात की और उन्हें आशीर्वाद प्रदान किया।
उन्होंने हादसों में अपने हाथ-पैर गंवा चुके दिव्यांगजनों से भी आत्मीय संवाद किया।
साथ ही, उनके लिए जापानी और जर्मन तकनीक से तैयार किए जा रहे मॉड्यूलर कृत्रिम अंगों के बारे में जानकारी प्राप्त की।अंत में संस्थान परिवार ने मुनि श्री को अभिनंदन पत्र अर्पित कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।
समारोह में दिगंबर जैन समाज के सैकड़ों श्रद्धालु, स्कूली बच्चे तथा साधक-साधिकाएं उपस्थित रहे।
