उदयपुर | भारतीय लोक कला मंडल, उदयपुर द्वारा केरलम के पूर्व मुख्य सचिव डॉ. विश्वास मेहता, आई. ए. एस की पुस्तक सैंड टू शोर’ के पठन एवं संवाद सत्र का आयोजन मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को संस्था के ग्रामीण संचार हॉल में किया गया।
इस अवसर पर डॉ. विश्वास मेहता ने अपनी पुस्तक के चुनिंदा अंशों का पाठ किया तथा अपनी लगभग चार दशक लंबी प्रशासनिक यात्रा, जीवन के संघर्षों, उपलब्धियों और जनसेवा से जुड़े अनुभवों को साझा किया।भारतीय लोक कला मण्डल के निदेशक डॉ. लईक हुसैन ने बताया कि कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के स्वागत एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।
इस अवसर पर भारतीय लोक कला मण्डल के उपाध्यक्ष श्री कोमल कोठारी, मानद सचिव श्री एस. पी. गौड़ और डॉ. लईक हुसैन आदि ने डॉ. विश्वास मेहता तथा कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे श्री एस.के. महाजन तथा विशिष्ट अतिथि प्रो. कैलाश सोडानी, पूर्व कुलपति एवं अन्य गणमान्य अतिथियों का उपरना ओढ़ाकर एवं माला पहनाकर स्वागत किया।
इसके पश्चात डॉ. लईक हुसैन ने स्वागत उद्बोधन प्रस्तुत दिया। कार्यक्रम का संचालन प्रो. मलय पानेरी ने किया।
कार्यक्रम के दौरान श्री कोमल कोठारी ने डॉ. मेहता का परिचय दिया, जबकि प्रो. हेमेन्द्र चण्डालिया ने पुस्तक की विषयवस्तु और उसके प्रमुख पहलुओं पर प्रकाश डाला।उन्होंने कहा कि पुस्तक सैंड टू शोर’ डॉ. विश्वास मेहता के जीवन और प्रशासनिक अनुभवों पर आधारित एक महत्वपूर्ण संस्मरणात्मक कृति है।
इसके शीर्षक में निहित यात्रा का भाव उनके जीवन के उस सफर को रेखांकित करता है, जिसमें राजस्थान की मिट्टी से जुड़ी पारिवारिक एवं सांस्कृतिक पृष्ठभूमि से निकलकर उन्होंने केरलम में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई।
पुस्तक में उनके व्यक्तिगत जीवन, पारिवारिक संस्कारों, शिक्षा, भारतीय प्रशासनिक सेवा में प्रवेश, विभिन्न पदों पर कार्य करने के अनुभवों और जनसेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को समझने का अवसर मिला।डॉ. मेहता की जीवन यात्रा का एक महत्वपूर्ण पक्ष उनके परिवार का संघर्ष और उससे प्राप्त प्रेरणा है।
पुस्तक में उन्होंने अपनी दादी एवं पिता के जीवन संघर्षों का उल्लेख करते हुए बताया है कि किस प्रकार पारिवारिक मूल्यों, अनुशासन और पिता की प्रेरणा ने उनके व्यक्तित्व को आकार दिया।
भारतीय प्रशासनिक सेवा में जाने का लक्ष्य निर्धारित करने के बाद उन्होंने उसे प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयास किया। प्रथम प्रयास में भारतीय पुलिस सेवा के लिए चयनित होने के बावजूद उन्होंने अपने मूल लक्ष्य को नहीं छोड़ा।
पुनः परीक्षा देकर अखिल भारतीय स्तर पर नौवाँ स्थान प्राप्त करना उनके दृढ़ संकल्प, मेहनत और लक्ष्य के प्रति समर्पण का उदाहरण है।पुस्तक का एक प्रमुख पहलू प्रशासनिक सेवा को केवल पद और अधिकार के रूप में न देखकर जनकल्याण के माध्यम के रूप में समझना है।
डॉ. मेहता के अनुभवों से यह स्पष्ट होता है कि प्रशासनिक अधिकारी की वास्तविक सफलता आमजन की समस्याओं को समझने, उनके समाधान के लिए प्रभावी प्रयास करने और सरकारी योजनाओं एवं सुविधाओं को लोगों तक पहुँचाने में निहित है।
उनकी प्रशासनिक यात्रा में जनहित, उत्तरदायित्व, निर्णय लेने की क्षमता और परिस्थितियों के अनुरूप कार्य करने के अनुभव विशेष महत्व रखते हैं।राजस्थान के डूंगरपुर से संबंध रखने वाले डॉ. मेहता ने केरलम को अपनी कर्मभूमि बनाया।
विभिन्न प्रशासनिक दायित्वों का निर्वहन करते हुए उन्होंने राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था और जनकल्याण से जुड़े कार्यों में योगदान दिया। वे केरलम के 46वें मुख्य सचिव के पद तक पहुँचे तथा बाद में राज्य के चौथे मुख्य सूचना आयुक्त के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं।
इन महत्वपूर्ण पदों तक की उनकी यात्रा पुस्तक को प्रशासनिक सेवाओं में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए विशेष रूप से उपयोगी बनाती है।डॉ. विश्वास मेहता का उदयपुर से भी महत्वपूर्ण संबंध रहा है।
उन्होंने पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र में निदेशक के रूप में कार्य किया। राजस्थान की सांस्कृतिक पृष्ठभूमि और केरलम में प्राप्त प्रशासनिक अनुभवों के बीच उनकी यात्रा विभिन्न क्षेत्रों, भाषाओं और संस्कृतियों को समझने का अवसर भी प्रदान करती है।
इस दृष्टि से पुस्तक केवल एक प्रशासनिक अधिकारी की उपलब्धियों का विवरण नहीं, बल्कि विभिन्न सामाजिक एवं सांस्कृतिक परिवेशों में काम करने के अनुभवों को जानने का माध्यम भी है।पठन एवं संवाद सत्र के दौरान डॉ. मेहता ने पुस्तक के चुनिंदा अंशों का पाठ किया।
इसके बाद आयोजित संवाद में उपस्थित लोगों को उनके जीवन अनुभवों, प्रशासनिक कार्यशैली और जनसेवा से जुड़े दृष्टिकोण को समझने का अवसर मिला।
पुस्तक के माध्यम से यह संदेश उभरकर सामने आता है कि जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए लक्ष्य के प्रति स्पष्टता, कठिन परिस्थितियों में धैर्य, निरंतर परिश्रम और अपने दायित्वों के प्रति ईमानदारी आवश्यक हैं।उन्होंने इस प्रकार के संवाद कार्यक्रमों को साहित्य, प्रशासन और समाज के बीच सार्थक संवाद स्थापित करने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।
अंत में भारतीय लोक कला मण्डल के मानद सचिव श्री एस. पी. गौड़ ने आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर शहर के साहित्यकार, कला प्रेमियों के साथ कई प्रशासनिक अधिकारी भी उपस्थित थे जिसमें विनिता बोहरा, आई.एस., दिनेश कोठारी, डॉ. प्रेम भण्डारी, अशोक शाह, शैल चोयल, डी.एस. पोरवाल, सुरेश पंड्या, डॉ सरवतुनिसा, विलास जानवे, ऐलन टवीड़ी, प्रियव्रत पंड्या, प्रिति मेहता, सुमतिलाल बोहरा आदि गणमान्य साहित्य एवं कला प्रेमी कार्यक्रम मे उपस्थित थे।
