उदयपुर,26 वर्ष की सैन्य सेवा और 12 वर्ष के कॉरपोरेट अनुभव वाले डॉ. संजय सिन्हा, प्रेसिडेंट एवं वाइस चांसलर, सर पदमपत सिंघानिया यूनिवर्सिटी (SPSU), विश्वविद्यालय की शिक्षा व्यवस्था को अनुशासन, नेतृत्व, इंडस्ट्री-रेडी शिक्षा, रिसर्च, इनोवेशन और नैतिक मूल्यों के साथ आगे बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं।
एक विशेष बातचीत में डॉ. संजय सिन्हा ने कहा कि सेना में सीखे नेतृत्व और अनुशासन के सिद्धांत शिक्षा के क्षेत्र में भी बेहद उपयोगी हैं। सेना में एक अधिकारी केवल खुद नेतृत्व नहीं करता, बल्कि अपने साथ काम करने वाले लोगों में भी नेतृत्व क्षमता विकसित करता है। इसके लिए निरंतर प्रशिक्षण और शिक्षा महत्वपूर्ण होती है।
उन्होंने कहा कि सेना में ऑपरेशन हो या विश्वविद्यालय का संचालन, दोनों में प्लानिंग, टीमवर्क, नेतृत्व और निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप कार्य करना महत्वपूर्ण है। विश्वविद्यालय में भी अकादमिक, प्रशासन, करिकुलम, स्टूडेंट वेलफेयर और इंडस्ट्री कनेक्ट को एक समन्वित व्यवस्था के रूप में देखने की जरूरत है।
इंडस्ट्री की जरूरत के अनुसार तैयार होगा करिकुलम
डॉ. सिन्हा के अनुसार SPSU का प्रमुख लक्ष्य विद्यार्थियों को इंडस्ट्री-रेडी बनाना है। इसके लिए विश्वविद्यालय इंडस्ट्री से लगातार संवाद कर यह समझने का प्रयास कर रहा है कि अलग-अलग क्षेत्रों में किस तरह के स्किल्स और कैंडिडेट्स की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि सेल्स, मार्केटिंग, कॉरपोरेट लॉ, माइनिंग, सीमेंट, पेंट टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी, फूड टेक्नोलॉजी और बायोटेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों की जरूरतों को समझकर उसी अनुरूप करिकुलम और सिलेबस विकसित किया जाना चाहिए।
“जब क्लासरूम में वही पढ़ाया जाएगा जिसकी इंडस्ट्री को आवश्यकता है, तो विद्यार्थियों के लिए इंडस्ट्री में रोजगार हासिल करना अधिक आसान और स्वाभाविक हो जाएगा,” उन्होंने कहा।
विद्यार्थियों के लिए तीन प्रमुख करियर पाथ
डॉ. सिन्हा ने बताया कि SPSU विद्यार्थियों के भविष्य को broadly तीन श्रेणियों में देख रहा है—हायर एजुकेशन, रोजगार और एंटरप्रेन्योरशिप।
जो विद्यार्थी अपना स्टार्टअप या व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं, उनके लिए यूनिवर्सिटी के इनक्यूबेशन और आइडिएशन सेंटर तथा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
वहीं इंडस्ट्री में जाने वाले विद्यार्थियों को संबंधित सेक्टर की आवश्यकताओं के अनुसार तैयार किया जा रहा है। उच्च शिक्षा में जाने वाले विद्यार्थियों को मास्टर्स और पीएचडी जैसे अवसरों के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
लेकिन डॉ. सिन्हा के अनुसार इन सभी प्रयासों के पीछे सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य अच्छे इंसान और जिम्मेदार नागरिक तैयार करना है।
शिक्षा के साथ नैतिक मूल्यों पर जोर
उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल नौकरी पाने या पैसा कमाने का माध्यम नहीं होनी चाहिए। बौद्धिक क्षमता बढ़ाने के साथ विद्यार्थियों में नैतिकता, संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा को एक होलिस्टिक और लाइफ-लॉन्ग लर्निंग प्रोसेस के रूप में देखा जाना चाहिए।
AI से लेकर सेमीकंडक्टर तक नए कोर्स
SPSU में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, रोबोटिक्स, साइबर सिक्योरिटी, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, सेमीकंडक्टर, पेंट टेक्नोलॉजी, फूड टेक्नोलॉजी, बायोइन्फॉर्मेटिक्स और कम्प्यूटेशनल बायोलॉजी जैसे उभरते क्षेत्रों पर फोकस किया जा रहा है।
डॉ. सिन्हा ने कहा कि भविष्य के कोर्स तय करते समय यह देखना जरूरी है कि सरकार और इंडस्ट्री किन क्षेत्रों में निवेश कर रहे हैं। उन्होंने सेमीकंडक्टर, स्पेस टेक्नोलॉजी, इंफ्रास्ट्रक्चर और मेडिकल टूरिज्म को तेजी से उभरते क्षेत्र बताया।
पेटेंट से कमर्शियलाइजेशन तक की तैयारी
यूनिवर्सिटी में रिसर्च और इनोवेशन को बढ़ावा देने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। डॉ. सिन्हा ने बताया कि SPSU के एक प्रोफेसर के नाम 100 से अधिक पेटेंट हैं, जबकि कई अन्य फैकल्टी सदस्य भी रिसर्च और इनोवेशन के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि पेटेंट मिलना महत्वपूर्ण उपलब्धि है, लेकिन वास्तविक चुनौती उस इनोवेशन को कमर्शियल स्टेज तक ले जाना है। इसके लिए फंडिंग और इंडस्ट्री सपोर्ट की आवश्यकता होती है।
SPSU Foundry जैसे प्लेटफॉर्म के माध्यम से विश्वविद्यालय विद्यार्थियों और फैकल्टी के इनोवेटिव आइडियाज को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहा है।
इंटरडिसिप्लिनरी रिसर्च और ग्लोबल कोलैबोरेशन
डॉ. सिन्हा ने कहा कि आज के दौर में किसी बड़े इनोवेशन को केवल एक विषय के विशेषज्ञों के माध्यम से पूरा करना संभव नहीं है। अलग-अलग विषयों के विशेषज्ञों को एक साथ लाकर रिसर्च को आगे बढ़ाना जरूरी है।
SPSU विभिन्न अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों के साथ भी अकादमिक और रिसर्च सहयोग को मजबूत कर रहा है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय के वियतनाम, थाईलैंड, सिंगापुर, अमेरिका और जापान सहित विभिन्न देशों के संस्थानों के साथ सहयोग हैं।
ड्रग-फ्री कैंपस के लिए जागरूकता और सहभागिता
युवाओं में बढ़ते नशे की समस्या पर चिंता व्यक्त करते हुए डॉ. सिन्हा ने कहा कि विश्वविद्यालयों की भूमिका केवल गेट या हॉस्टल पर चेकिंग तक सीमित नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने कहा, “अब यह केवल ‘उड़ता पंजाब’ नहीं रहा, बल्कि ‘उड़ता भारत’ बन गया है।”
SPSU में नशा मुक्ति को लेकर जागरूकता कार्यक्रम और विशेषज्ञों के व्याख्यान आयोजित किए जा रहे हैं। विद्यार्थियों को स्पोर्ट्स, काउंसलिंग, स्ट्रेस मैनेजमेंट, टाइम मैनेजमेंट और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।
मोबाइल एडिक्शन से बचाने के लिए रचनात्मक गतिविधियां
डॉ. सिन्हा ने कहा कि मोबाइल और सोशल मीडिया से विद्यार्थियों को पूरी तरह दूर करना समाधान नहीं है, बल्कि उन्हें तकनीक का सही दिशा और उद्देश्य के साथ उपयोग करना सिखाना जरूरी है।
विद्यार्थियों को आइडियाथॉन, हैकाथॉन, डिबेट, डिक्लेमेशन और अन्य प्रतियोगिताओं से जोड़ा जा रहा है। इससे उनकी रचनात्मकता, टीमवर्क और नेतृत्व क्षमता विकसित होने के साथ अनावश्यक मोबाइल उपयोग भी कम किया जा सकता है।
6000 से अधिक विद्यार्थियों से लिया फीडबैक
SPSU में विद्यार्थियों के फीडबैक को भी निर्णय प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। डॉ. सिन्हा ने बताया कि हालिया व्यापक फीडबैक प्रक्रिया में 6000 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया।
Google Forms जैसे डिजिटल माध्यमों से मिले फीडबैक का विश्लेषण कर विश्वविद्यालय स्तर पर आवश्यक सुधारों पर काम किया जाता है।
डॉ. संजय सिन्हा के अनुसार SPSU का लक्ष्य ऐसा शिक्षा वातावरण तैयार करना है, जहां विद्यार्थी ज्ञानवान, इंडस्ट्री-रेडी, इनोवेटिव, अनुशासित, नैतिक रूप से मजबूत और जिम्मेदार नागरिक बनकर आगे बढ़ें।
