उदयपुर । देश में जनजातीय विरासत, जनजाति कलारूपों और मौखिक परम्पराओं सहित विभिन्न जनजातीय भित्ति चित्र एवं माण्डना कला के संरक्षण, दस्तावेजीकरण और संवर्धन के लिये माणिक्य लाल वर्मा आदिम जाति शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान (ज्त्प्), उदयपुर द्वारा जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से सपोर्ट टू टीआरआई कार्यक्रम के तहत भील जनजाति हेतु “स्टेट लेवल ट्राईबल चित्रकला एवं कला कार्यशाला” की कार्यशाला का आयोजन 9 अक्टूबर 2026 से 13 अक्टूबर, 2026 तक सांस्कृतिक स्त्रोत एवं प्रशिक्षण केन्द्र (सीसीआरटी), उदयपुर में किया जाएगा।टीआरआई निदेशक ओपी जैन ने बताया कि कार्यशाला का उद्घाटन 9 अक्टूबर को प्रातः 10.30 बजे जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग की आयुक्त प्रज्ञा केवलरमानी करेंगी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ संयुक्त सचिव, जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग जयपुर श्री शैल चौयल करेंगे। मीरा गर्ल्स कॉलेज के प्रोफेसरश्री रामसिंह भाटी विशिष्ट अतिथि रहेंगे।
इस राज्य स्तरीय कार्यशाला में भील जनजाति के उदयपुर, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, सलूम्बर, बालोतरा, सिरोही जिलों से 35 से अधिक जनजाति कलाकारों की भागीदारी रहेगी।
राजस्थान के विभिन्न जिलों के कलाकार अपनी क्षेत्रीय कला शैलियों का प्रदर्शन करेंगे, तथा अपने-अपने क्षेत्र की जनजाति कला, वैचारिक तथा रचनात्मकता का आदान-प्रदान करेंगे।श्री जैन ने बताया कि आदिवासी चित्रकला में भित्ति चित्र (वाल पेन्टिंग) और माण्डणा आदिवासी समुदायों की प्राचीनतम कला अभिव्यक्तियां हैं।
माण्डणा, जो मुख्य रूप से देश की जनजातियों द्वारा घरों के आंगन और दीवारों पर बनाया जाता है, केवल सजावट नहीं बल्कि शुभता और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है।
यह कला आदिवासी समुदायों की अद्वितीय पहचान और उनके पौराणिक इतिहास को संजोए हुए है। आधुनिक चकाचौंध और शहरीकरण के कारण पारंपरिक विधियों (जैसे प्राकृतिक रंगों और मिट्टी का उपयोग) का चलन कम हो रहा है।
ये कलाकृतियाँ पर्यावरण के अनुकूल सामग्रियों से बनाई जाती हैं, जो आज के समय में ‘सस्टेनेबल लिविंग’ का श्रेष्ठ उदाहरण हैं।
आम नागरिक इन कलाकृतियों को अपने घरों और कार्यालयों में स्थान देकर, स्थानीय कलाकारों को प्रोत्साहित कर और इन पारंपरिक विधियों को सीखने में रुचि दिखाकर इनके संरक्षण में अमूल्य योगदान दे सकते हैं।श्री जैन ने बताया कि इसी तरह की सहरिया जनजाति की कार्यशाला शाहबाद, बारां में चल रही है जिसका समापन 09 अक्टूबर 2026 को होगा।
मीणा जनजाति की कार्यशाला का आयोजन जनजाति भवन जयपुर में आगामी माह में किया जाना प्रस्तावित है।
