देवेन्द्रधाम, महावीर समवशरण में आयोजित धर्मसभा में संतों ने गुरु की महिमा और शिष्य के जीवन में उनके महत्व पर प्रकाश डाला।डॉ. सुरेन्द्र मुनि ने कहा कि गुरु मनुष्य को धर्म का ज्ञान देने के साथ जीवन जीने की कला भी सिखाते हैं।
वे अज्ञान का अंधकार मिटाकर ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं तथा मोह-माया से दूर होकर आत्मकल्याण के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं।
उन्होंने गुरु की तुलना दीपक से करते हुए कहा कि जैसे घने जंगल में दीपक भटके व्यक्ति को राह दिखाता है, वैसे ही गुरु जीवन की कठिनाइयों में सही दिशा प्रदान करते हैं।
गुरु कुंभकार की तरह शिष्य को संस्कार और अनुशासन से गढ़ते हैं।प्रवर्तक डॉ. राजेन्द्र मुनि ने कहा कि जीवन में गुरु का स्थान सर्वाेच्च है। गुरु प्रेरणा, प्रकाश और आत्मिक शक्ति प्रदान करते हैं।
उन्होंने कहा कि गुरु के मार्गदर्शन के बिना मानव जीवन दिशाहीन हो जाता है। ज्ञान प्राप्त करने के लिए शिष्य में विनय और नम्रता जरूरी है।
जैसे घड़ा पानी भरने के लिए झुकता है, वैसे ही शिष्य को अहंकार त्यागना चाहिए।धर्मसभा में हैदराबाद, अहमदाबाद, सवाई माधोपुर ,पालघर और मुंबई से आए समाजसेवियों का सम्मान किया गया।
समापन पर उपाध्याय रमेश मुनि एवं दीपेश मुनि ने मंगल पाठ कर आशीर्वाद दिया।