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अंतर्पीढीगत सम्बन्धो पर कार्यशाला का महिला सशक्तिकरण के साथ समापन

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07 Mar 25
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अंतर्पीढीगत सम्बन्धो पर कार्यशाला का महिला सशक्तिकरण के साथ समापन

संगम विश्वविद्यालय, भीलवाड़ा के सभागार में उद्यमिता और कौशल विकास केंद्र संगम विश्वविद्यालय द्वारा भारत सरकार के राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा संस्थान तथा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के आर्थिक सहयोग से एक दिवसीय अंतर-पीढ़ी संबंध प्रोत्साहन कार्यशालाओं की श्रंखला के अंतर्गत  8वी और अंतिम  कार्यशाला का आयोजन किया गया । कार्यशाला में  उपकुलपति प्रोफेसर (डॉ.) मानस रंजन पाणिग्रही, डिप्टी पुलिस अधीक्षक मांडल सुश्री मेघा गोयल, कुल सचिव प्रोफेसर (डॉ.) राजीव मेहता, श्री श्याम बिरला, सीईओ केसर बाई सोनी अस्पताल एवं श्री यश शर्मा के कर कमलों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित के साथ हुआ। स्वागत उद्बोधन में  संयोजक डॉ. मनोज कुमावत ने बताया की एनआईएसडी, भारत सरकार द्वारा प्रायोजित इन कार्यशालाओं में 700 से ज्यादा कॉलेज छात्र लाभान्वित हुए।  कार्यक्रम में अलग अलग महाविद्यालयों के छात्रों ने भाग लिया तथा 80 छात्र समन्वयकों को पुस्तकें बांटी गयी। उप-कुलपति प्रोफेसर मानस रंजन पाणिग्रही ने अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुये कहा कि परिवार सामाजिक व्यवस्था की प्रथम  इकाई है जिसमें तीन पीढ़ियों के बीच सामंजस्य स्थापित करने का महत्वपूर्व कार्य नारी शक्ति द्वारा ही किया जाता है । प्रथम सत्र में अंतर-पीढ़ीगत संबंध में स्वस्थ महिलाओं की भूमिका प्रकाश डालते हुये महिला स्वास्थ विशेषज्ञ डॉ. दीपेश कुमारी अग्रवाल एमएस, केसर बाई सोनी अस्पताल, भीलवाड़ा ने कहा कि शिशु अवस्था से लेकर किशोरावस्था और उसके बाद भी बालिकाओं और महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी  चुनौतियों का सामना करना पड़ता है । इनसे बचने के लिए स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता अति आवश्यक है, क्योंकि एक स्वास्थ महिला ही स्वस्थ बालक को जन्म ही नहीं देती बल्कि उसका पालन –पोषण भी करती है । द्वितीय सत्र में विशिष्ट अतिथि  मेघा गोयल, डिप्टी पुलिस अधीक्षक मांडल, भीलवाड़ा ने अपने सत्रीय वक्तव्य में विभिन्न परिस्तिथियों का उदाहरण देते हुये प्रश्नोत्तर शैली में कहा कि जो बच्चे अपने परिवार के साथ बड़े होते हैं, उनमें आपराधिक प्रवृति नहीं पायी जाती और जिन बच्चों कि परवरिश परिवार से इतर होती है वे अपराधों में लिप्त होते पाये गए हैं। अपनी बात को विस्तार देते हुये उन्होंने कहा कि महिलाओं को अपने हक कि लड़ाई अपने परिवार के सहयोग से ही लड़नी चाहिए और स्वयं आर्थिक रूप से सक्षम होकर परिवार की भी आर्थिक मदद करनी चाहिए । अतिथियों ने जिला स्तर पर आयोजित कला, निबंध और कविता लेखन आदि प्रतियोगताओं के विजेताओं को ट्रॉफी और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया और कलादीर्घा का अवलोकन कर प्रतियोगियों के कार्य की सराहना की । कार्यशाला में डॉ ज्योति वर्मा, प्राचार्या, रूपी देवी कन्या महाविद्यालय के निर्देशन में 60  बालिकाओं ने भाग लिया। कार्यशाला में सक्रिय योगदान देने वाले सदस्यों और युवाओं का सम्मान प्रशस्ति पत्र देकर किया गया। इस अवसर पर  विभिन संकायों के सदस्य  डॉ प्रीती मेहता, डॉ. तनुजा सिंह, डॉ. राजकुमार जैन,  डॉ. श्वेता बोहरा, डॉ. मुकेश कुमार शर्मा, डॉ. संजय कुमार, डॉ. रामेश्वर रायकवार , डॉ. गौरव सक्सेना, डॉ. कनिका चौधरी, सुश्री निकिता, सुश्री अनन्या उपस्थित रहे ।


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