राजकीय सार्वजनिक मण्डल पुस्तकालय कोटा मे विश्व कविता दिवस पर “ क्रतिम बुद्धिमता के दौर मे काव्य सृजन : प्रमुख चुनोतियां एवं निदान” विषय पर संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया | कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ गीतकार बाबू बंजारा ने की | कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हेमराज सिंह “हेम” रहे , अति विशिष्ट अतिथि लोकेश मृदुल , विशिष्ट अतिथि बाबू बंजारा , गेस्ट ऑफ ऑनर कवि महेश पंचोली तथा आमन्त्रित कवि तंवर सिंह हाड़ा”तारज” , राम शर्मा “कापरेन“ प्रशांत टहलानी, शिवराज श्रीवास्तव , रूपनारायण शर्मा “संजय” , अनुराधा शर्मा , अश्विनी त्रिपाठी,हनुमान प्रसाद विजय , बांटी सुमन , कवियत्री अनुराधा शर्मा तथा नव्या शर्मा रही | उक्त सभी को उनके उत्कृष्ठ योगदान के लिए “शब्द शिल्पी सम्मान-2025” से सम्मानित किया गया |
इस अवसर पर उदघाटन सत्र को संबोधित करते हुये डा दीपक कुमार श्रीवास्तव संभागीय पुस्तकालय अध्यक्ष ने कहा कि – “विश्व कविता दिवस हर वर्ष 21 मार्च को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य कविता के महत्व को समझाना और उसे सम्मानित करना है। आधुनिक तकनीकी विकास, विशेषकर कृतिम बुद्धिमता, ने साहित्य और काव्य सृजन की प्रक्रिया को एक नई दिशा दी है, लेकिन इसके साथ कुछ प्रमुख चुनौतियाँ भी सामने आई हैं। जेसे मूलता और रचनात्मकता की कमी, कविता का मानवता से संवाद का अभाव, मानवीय दृष्टि की अनदेखी एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े नैतिक मुद्दे इत्यादि शामिल है |
इस अवसर पर मुख्य अतिथि हेमराज सिंह “हेम” ने कहा कि - कविता केवल शब्दों का खेल नहीं होती, यह समाज, संस्कृति, और व्यक्तित्व से गहरे संबंध रखती है। कृतिम बुद्धिमता द्वारा लिखी गई कविता मानव जीवन के उन सूक्ष्म पहलुओं को नहीं छू सकती, जो व्यक्ति के अनुभव और भावनाओं से जुड़ी होती हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे बाबू बंजारा ने कहा कि – क्रतिम बुद्धिमता के उपयोग में साहित्यिक और बौद्धिक संपत्ति के अधिकारों का उल्लंघन न हो, इसके लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश और कानूनी प्रावधान होने चाहिए। कवियों को यह समझाना आवश्यक है कि क्रतिम बुद्धिमता का प्रयोग किस हद तक किया जा सकता है, ताकि यह उनके अधिकारों की रक्षा करे और उनके काम की स्वतंत्रता बनाए रखे।
अति विशिष्ट अतिथि लोकेश मृदुल ने कहा कि - कृतिम बुद्धिमता ने काव्य सृजन की प्रक्रिया को सरल बना दिया है, लेकिन इसके साथ ही यह मानवता और रचनात्मकता की गहरी समझ को चुनौती भी देती है। इसलिए, काव्य सृजन में क्रतिम बुद्धिमता का उपयोग करते समय हमें यह ध्यान रखना होगा कि यह केवल एक उपकरण के रूप में काम करे और मानव भावनाओं, संवेदनाओं और रचनात्मकता की मौलिकता को बनाए रखे। क्रतिम बुद्धिमता और मानव रचनात्मकता का संतुलित संयोजन ही काव्य सृजन के नए दौर में सही दिशा प्रदान कर सकता है। कार्यक्रम की संयोजिका डा शशि जैन ने सभी आगन्तुको का आभार व्यक्त किया |