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विश्व का सबसे बड़ा महाकुम्भ महाशिवरात्रि के आखिरी शाही स्नान के साथ हुआ सम्पन्न 

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27 Feb 25
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विश्व का सबसे बड़ा महाकुम्भ महाशिवरात्रि के आखिरी शाही स्नान के साथ हुआ सम्पन्न 

गोपेन्द्र नाथ भट्ट

महा शिवरात्रि के आखिरी शाही स्नान के साथ विश्व का सबसे बड़ा महाकुम्भ भारत के सबसे बड़े आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश के प्रयागराज  में सम्पन्न हो गया। प्रयागराज में गंगा यमुना और लुप्त सरस्वती के पवित्र संगम में देश विदेश के  अनुमानित 70 करोड़ श्रद्धालुओं ने स्नान कर पुण्य कमाया। इसके साथ ही उत्तरप्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार ने चैन की सांस ली। प्रयागराज में भगदड़ और आगजनी की कुछ घटनाओं के साथ यह भव्यतम आयोजन शांतिपूर्वक सम्पन्न हो गया। इस साल के महाकुंभ की शुरुआत 13 जनवरी से हुई थी।

मेला प्रशासन द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, बुधवार को शाम छह बजे तक 1.44 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने गंगा और संगम में डुबकी लगाई तथा 13 जनवरी से अब तक स्नान करने वालों की संख्या 66.21 करोड़ पहुंच गई है। श्रद्धालुओं की यह संख्या चीन और भारत को छोड़कर अमेरिका, रूस और यूरोपीय देशों समेत सभी देशों की आबादी से अधिक है। साथ ही यह मक्का और वेटिकन सिटी जाने वाले श्रद्धालुओं से भी अधिक है।

विश्व के इस सबसे बड़े 45 दिवसीय धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक आयोजन में देश विदेश की अनेक ख्यातिनाम हस्तियों ने भाग लिया। भारत के आधे से अधिक  हिन्दू सनातन धर्वांबलियों ने प्रयाग राज पहुंच कर पवित्र संगम में डुबकी लगाई। शेष हिन्दू सनातन धर्वांबलियों ने अपने परिवारजनों,संबंधियों और मित्रगणों द्वारा प्रयाग राज  संगम से लाए गए त्रिवेणी संगम के पवित्र जल को ग्रहण कर 144 वर्षों बाद लगे महाकुम्भ में अपनी सहभागिता की। सदी के इस सबसे बड़े और विशालतम आयोजन ने एक नया विश्व रिकॉर्ड बनाया। इस महाकुंभ से भारत की संस्कृति,धार्मिक,सांस्कृतिक और आध्यात्मिक तथा राष्ट्रीय एकता की छवि उभरने के साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पर्यटन को ऐतिहासिक सफलता मिली और लाखों डॉलर की रेवेन्यू मिलने के साथ स्थानीय और देश भर के अनेक क्षेत्र के लोगों को रोजगार मिला। साथ ही खरबों रु का व्यवसाय हुआ। प्रयागराज में संगम स्थल पर बसाया गया विशालतम गांव का विहंगम दृश्य  अद्भुत अनुभूति देने वाला रहा। देश विदेश की मीडिया में 45 दिनों का यह भव्य आयोजन प्रतिदिन खबरों की सुर्खियां रहा।

बताया जाता है कि कुंभ कई सदियों से आयोजित किए जा रहे है लेकिन इसकी प्रारंभ तिथि अज्ञात है। खगोलीय गणना के अनुसार, 2025 का वर्तमान महाकुम्भ का यह संस्करण अद्वितीय है क्योंकि, इस प्रकार का नक्षत्र संरेखण 144 वर्षों में एक बार देखा जाता है। प्रत्येक कुंभ मेले का स्थल बृहस्पति, सूर्य और चंद्रमा के ज्योतिषीय संरेखण द्वारा तय किया जाता है। इस बार के महाकुंभ मेले को यूनेस्को द्वारा अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के हिस्से के रूप में मान्यता दी गई है। महाकुंभ के सभी आयोजनों के लिये सबसे उपयुक्त, आदर्श, खुला एवं विशाल स्थान प्रयागराज में ही उपलब्ध है। यहाँ गंगा-यमुना तथा लुप्त सरस्वती नदियों के त्रिवेणी संगम के दोनों किनारों पर कई किलोमीटर लंबा खुला स्थान मौजूद हैं,जहाँ लाखों श्रद्धालु एक ही समय में सुगमता पूर्वक रुक सकते हैं तथा स्नान ध्यान पूजा आदि धार्मिक कृत्य कर सकते हैं। 

 

खगोलीय गणना के अनुसार, 2025 का वर्तमान महाकुम्भ का यह संस्करण अद्वितीय है क्योंकि, इस प्रकार का नक्षत्र संरेखण 144 वर्षों में एक बार देखा जाता है। प्रत्येक कुंभ मेले का स्थल बृहस्पति, सूर्य और चंद्रमा के ज्योतिषीय संरेखण द्वारा तय किया जाता है। इस बार के महाकुंभ मेले को यूनेस्को द्वारा अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के हिस्से के रूप में मान्यता दी गई है। स्वतंत्र भारत में पहला महाकुंभ मेला वर्ष 1954 में इलाहाबाद (अब प्रयागराज) में लगा था, तब यह मेला 14 जनवरी से 3 मार्च तक चला था। इस मेले में करीब 40 लाख श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया था। इस दौरान 3 फ़रवरी, 1954 को मौनी अमावस्या के दिन अनायास भगदड़ मचने से करीब 800 लोगों की मौत हो गई थी। 

प्रयागराज महाकुम्भ 2025 के भव्य आयोजन के लिए उत्तर प्रदेश और भारत सरकार ने बड़े पैमाने पर प्रबंध किए थे।साथ ही आधुनिक सुख सुविधाओं सहित उच्चस्तरीय हाईटेक सुविधाओं से लैस टेंट जैसी अनेक बातों को लेकर यह महाकुंभ चर्चाओं में रहा। उत्तर प्रदेश सरकार ने इस आयोजन में भाग लेने वाले तीर्थ यात्रियों के ठहरने के लिए 4,000 हेक्टेयर (40 किमी ) में एक अस्थायी शहर स्थापित किया हैं। महाकुंभ के 12 किमी (7.5 मील) लंबे घाटों  और आसपास के क्षेत्र को 25 सेक्टरों में विभाजित किया गया हैं। श्रद्धालुओं के लिए लगभग 150,000 टेंट स्थापित किए गए है । इस भव्य आयोजन के लिए 14.28 हजार बिलियन (160 मिलियन डॉलर) की लागत से लगभग 83 आधारभूत परियोजनाएँ भी पूरी की गईं। महाकुंभ क्षेत्र में 150,000 शौचालय और मूत्रालय स्थापित किए और शौचालयों में स्वच्छता के स्तर पर नज़र रखने के लिए एक निगरानी प्रणाली शुरू की गई। सफाई गतिविधियों के लिए लगभग 10,000 सफाई कर्मचारी लगाए गए हैं । उत्तर प्रदेश राज्य सरकार ने महाकुंभ के दौरान नदी की सफाई के लिए 500 समर्पित गंगा प्रहरियों की प्रतिनियुक्ति भी की । किसी भी स्वास्थ्य आपात स्थिति से निपटने के लिए मोबाइल स्वास्थ्य इकाइयाँ और आपातकालीन चिकित्सा सेवाएँ तैनात की गई हैं।

 

 

इस भव्य आयोजन के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस और निगरानी प्रणाली के लगभग 40,000 पुलिस अधिकारी तैनात किए गए । इसके अतिरिक्त, उत्तर प्रदेश प्रांतीय सशस्त्र कांस्टेबुलरी (यूपी-पीएसी), राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के बलों ने सुरक्षा बनाए रखने में सहायता की। लगभग 2,300 कैमरों के नेटवर्क ने चौबीसों घंटे निगरानी रखी जा रही हैं । रिकवरी ऑपरेशन में 100 मीटर (330 फीट) तक गोता लगाने में सक्षम पानी के नीचे के ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा हैं । राज्य सरकार ने अग्निशमन विभाग के लिए 1.31 हजार बिलियन (15 मिलियन डॉलर) आवंटित किए।  उत्तर प्रदेश अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा विभाग ने 50 से अधिक फायर स्टेशनों और 20 फायर पोस्टों पर 351 अग्निशमन वाहन और 2000 से अधिक कर्मियों  तथा चार आर्टिकुलेटिंग वॉटर टावर भी तैनात किए गए । मेला आयोजन समिति ने लापता व्यक्तियों को उनके परिवारों से मिलाने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में दस खोया और पाया केंद्र स्थापित किए। महाकुम्भ के लिए प्रयागराज में 1,850 हेक्टेयर (18.5 किमी) क्षेत्र में पार्किंग सुविधाएं विकसित की गई। महाकुंभ क्षेत्र की लगातार हेलीकाप्टर से निगरानी की गई तथा स्थानीय पुलिस के साथ ही भारतीय सेना और पैरा मिलेट्री एजेंसियां पूरी तरह मुस्तैदी के साथ  सुरक्षा,कानून व्यवस्था और यातायात प्रबंध में जुटी । सबसे अच्छी बात यह देखने में आई है कि महाकुंभ में आने वाले लोगों के प्रति पुलिस और सेना के जवानों का व्यवहार बहुत ही शालीन और  सहयोगात्मक रहा 

 

भारतीय रेलवे ने केन्द्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के कुशल मार्गदर्शन में महाकुंभ के लिए अनेक विशेष ट्रेनें चलाईं। साथ ही प्रमुख ट्रेनों में डिब्बों की संख्या में वृद्धि की है। भारतीय रेलवे ने मौनी अमावस्या के दिन तीर्थयात्रियों की सेवा के लिए 190 विशेष ट्रेनें,110 नियमित ट्रेनें और 60 मेमू ट्रेनें सहित लगभग 360 ट्रेनें चलाई । प्रयागराज हवाई अड्डा से दिल्ली, मुंबई, कोलकाता,बैंगलोर आदि सहित सभी प्रमुख शहरों से दैनिक उड़ानों की सुविधा दी गई। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिये सरकार द्वारा हज़ारों की संख्या में विशेष रेलगाड़ियां,बसें, विमान आदि भी चलाये गये। हालांकि विमान सेवाओं की टिकटें विदेश यात्राओं से भी महंगी रही। साथ ही अतिरिक्त इंतजामों के बावजूद ट्रेन और सरकारी बसों में टिकट आरक्षण कराना एक टेडी खीर जैसा साबित हुआ।

 

इसमें भी कोई संदेह नहीं कि 2019 में आयोजित हुये कुंभ मेले की तुलना में इस बार पूरे महाकुंभ मेला क्षेत्र में लगभग प्रत्येक जनोपयोगी सुविधाओं में व्यापक रूप से विस्तार किया गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने महाकुम्भ  की व्यवस्थाओं पर लिखा कि 'इतना विशाल, इतना सुन्दर, इतनी भव्यता'। अगर कम शब्दों में कहें तो 'महाकुंभ का संदेश, एक हो पूरा देश' और दूसरे तरीक़े से कहूंगा 'गंगा की अविरल धारा, न बंटे समाज हमारा'।

 

महाकुंभ ने इस बार कुल छह शाही स्थान हुए जिसमें पौष पूर्णिमा,मकर संक्रांति,मौनी अमावस्या,वसंत पंचमी,माघ पूर्णिमा और शिवरात्रि शामिल हैं । इनमें नागा साधुओं सहित देश के सभी 13 प्रमुख अखाड़ों ने भाग लिया।

 

प्रयागराज महाकुम्भ ने पूरे विश्व में भारत की असीमित क्षमताओं और ताकत के साथ भारतीय संस्कृति के असाधारण स्वरूप को दर्शा कर सही अर्थों में भारत के विश्व गुरु होने की उपमा को सार्थक किया हैं। इसमें कोई संदेह नहीं हैं।


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